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चुनावी दंगल में औंधे मुंह गिरे किसान नेता
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Mon, 02 Nov 2015 11:44 PM IST
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चुनावी दंगल में किसानों ने अपने ही नेताओं को ऐसी पटखनी दी कि उनके मुंह से कराह निकल पड़ी। कोई भी किसान नेता जिला पंचायत का चुनाव नहीं जीत सका। किसी की जमानत जब्त हो गई तो कई टाप थ्री में भी जगह नहीं बना सके। कई नेता बीडीसी का भी चुनाव हार गए।
किसानों के दम पर राजनीति करने वाले किसान संगठनों के नेता पंचायत चुनाव की पिच पर भी किस्मत आजमाने उतरे थे। भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष हसीब अहमद ने जिला पंचायत के वार्ड-23 से चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में उन्होंने कार्यकर्ताओं की पूरी फौज उतार दी। यूनियन के झंडे और बैनर का भी इस्तेमाल किया।
भाकियू के सहारे जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन चुनाव नतीजों ने उनका भरोसा तोड़ दिया। हसीब अहमद 2127 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे। वो टाप थ्री में भी जगह नहीं बना सके। मंडल सचिव परशुराम शर्मा ने अपनी पत्नी रामेश्वरी देवी को वार्ड-26 से चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव की कमान मंडल सचिव ने संभाली।
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मंडल सचिव की पत्नी को भी हार का मुंह देखना पड़ा। मंडल सचिव की पत्नी 1808 वोट दूसरे स्थान पर रहीं। भाकियू भानु गुट के पदाधिकारियों को भी किसानों ने नकार दिया। भानु गुट के प्रांतीय उपाध्यक्ष भानुप्रताप गंगवार वार्ड-35 से चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने अपनी पत्नी का भी नामांकन कराया।
चुनाव प्रचार में काफी समय पहले से ही राष्ट्रीय महासचिव मो. हनीफ वारसी समेत तमाम पदाधिकारियों की फौज जुट गई थी। गांव-गांव पंचायत कर किसान मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। किसानों ने प्रांतीय उपाध्यक्ष को हार की माला पहना दी। भानुप्रताप गंगवार 3448 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
उनकी पत्नी को सिर्फ 105 वोट मिले और 17वें स्थान पर रहीं। भानु गुट के मंडल उपाध्यक्ष हरताल सिंह की पत्नी तो बीडीसी का भी चुनाव नहीं जीत सकीं। उन्होंने अपनी पत्नी ममता को बीडीसी के आगापुर-116 वाडज्ञ से से चुनाव मैदान में उतारा था। मंडल उपाध्यक्ष की पत्नी अपने घर में ही हार गईं।
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किसानों के दम पर राजनीति करने वाले किसान संगठनों के नेता पंचायत चुनाव की पिच पर भी किस्मत आजमाने उतरे थे। भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष हसीब अहमद ने जिला पंचायत के वार्ड-23 से चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार में उन्होंने कार्यकर्ताओं की पूरी फौज उतार दी। यूनियन के झंडे और बैनर का भी इस्तेमाल किया।
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भाकियू के सहारे जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन चुनाव नतीजों ने उनका भरोसा तोड़ दिया। हसीब अहमद 2127 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे। वो टाप थ्री में भी जगह नहीं बना सके। मंडल सचिव परशुराम शर्मा ने अपनी पत्नी रामेश्वरी देवी को वार्ड-26 से चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव की कमान मंडल सचिव ने संभाली।
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मंडल सचिव की पत्नी को भी हार का मुंह देखना पड़ा। मंडल सचिव की पत्नी 1808 वोट दूसरे स्थान पर रहीं। भाकियू भानु गुट के पदाधिकारियों को भी किसानों ने नकार दिया। भानु गुट के प्रांतीय उपाध्यक्ष भानुप्रताप गंगवार वार्ड-35 से चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने अपनी पत्नी का भी नामांकन कराया।
चुनाव प्रचार में काफी समय पहले से ही राष्ट्रीय महासचिव मो. हनीफ वारसी समेत तमाम पदाधिकारियों की फौज जुट गई थी। गांव-गांव पंचायत कर किसान मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। किसानों ने प्रांतीय उपाध्यक्ष को हार की माला पहना दी। भानुप्रताप गंगवार 3448 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
उनकी पत्नी को सिर्फ 105 वोट मिले और 17वें स्थान पर रहीं। भानु गुट के मंडल उपाध्यक्ष हरताल सिंह की पत्नी तो बीडीसी का भी चुनाव नहीं जीत सकीं। उन्होंने अपनी पत्नी ममता को बीडीसी के आगापुर-116 वाडज्ञ से से चुनाव मैदान में उतारा था। मंडल उपाध्यक्ष की पत्नी अपने घर में ही हार गईं।