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जायका-ए-रामपुर से जुड़ेगा रामपुर का पैकेजिंग उद्योग
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रामपुर। जायका-ए-रामपुर से जिले के पैकेजिंग उद्योग को भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए दोना पत्तल एवं नैपकिन उद्योग का चयन किया गया है। दोनों उद्योगों के एक दूसरे से जुड़ने की वजह से वित्तीय मदद मिलेगी, वहीं उत्पादों को भी आकर्षक पैकेजिंग मिल सकेगी। इसको लेकर मुख्य विकास अधिकारी की ओर से दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जिला प्रशासन के स्तर पर रामपुर के औद्योगिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। यहां के पारंपरिक उद्योगों के साथ ही नए उद्योगों को भी बढ़ावा दिलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसमें यदि रामपुर के खानपान की बात की जाए तो स्थानीय स्पेशल व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त है। जिसमें वेज, नॉन वेज के साथ ही लजीज मिठाइयां शामिल हैं, जो न सिर्फ देखने में अच्छी लगती हैं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहतर होती हैं। इन व्यंजनों को प्रोत्साहन दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से 20 व्यंजनों के कैटलॉग तैयार कराए गए हैं, जिससे रामपुर के व्यंजनों को पूरे देश में पहचान मिल सके और देश के बाकी हिस्सों के लोग भी यहां के लजीज व्यंजनों का आनंद ले सकें। इसे जायका-ए-रामपुर नाम दिया गया है।
वहीं, अब जायका-ए-रामपुर से जिले के पैकेजिंग उद्योग को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज की ओर से दो उद्योगों का चयन किया गया है। इनमें एक उद्योग में दोना-पत्तल तैयार किए जाते हैं, जबकि दूसरे उद्योग में नैपकिन बनाई जाती हैं। दोनों उद्योगों को बाजार मुहैया कराने के उद्देश्य से सीडीओ ने इन्हें जायका-ए-रामपुर से जोड़ने का फैसला किया है। यदि शुरुआत में यह प्रयोग सफल होता है तो इसे बड़े पैमाने लागू किया जाएगा, ताकि रामपुर के उद्योग तेजी से आगे बढ़ सकें।
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जिला प्रशासन के स्तर पर रामपुर के औद्योगिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। यहां के पारंपरिक उद्योगों के साथ ही नए उद्योगों को भी बढ़ावा दिलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसमें यदि रामपुर के खानपान की बात की जाए तो स्थानीय स्पेशल व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त है। जिसमें वेज, नॉन वेज के साथ ही लजीज मिठाइयां शामिल हैं, जो न सिर्फ देखने में अच्छी लगती हैं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहतर होती हैं। इन व्यंजनों को प्रोत्साहन दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से 20 व्यंजनों के कैटलॉग तैयार कराए गए हैं, जिससे रामपुर के व्यंजनों को पूरे देश में पहचान मिल सके और देश के बाकी हिस्सों के लोग भी यहां के लजीज व्यंजनों का आनंद ले सकें। इसे जायका-ए-रामपुर नाम दिया गया है।
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वहीं, अब जायका-ए-रामपुर से जिले के पैकेजिंग उद्योग को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज की ओर से दो उद्योगों का चयन किया गया है। इनमें एक उद्योग में दोना-पत्तल तैयार किए जाते हैं, जबकि दूसरे उद्योग में नैपकिन बनाई जाती हैं। दोनों उद्योगों को बाजार मुहैया कराने के उद्देश्य से सीडीओ ने इन्हें जायका-ए-रामपुर से जोड़ने का फैसला किया है। यदि शुरुआत में यह प्रयोग सफल होता है तो इसे बड़े पैमाने लागू किया जाएगा, ताकि रामपुर के उद्योग तेजी से आगे बढ़ सकें।
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