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द़स्तान ए रियासत : रियासत काल में उद्योग स्थापना ने भरी थी उड़ान..
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रामपुर। रियासत काल की शुरुआत में भले ही उस वक्त के पुश्तैनी कारोबार रोजगार का जरिया रहे हों लेकिन, अंतिम शासक नवाब रजा अली खां ने रामपुर को उद्योग नगरी के रूप में विकसित किया। उनके प्रयासों से रामपुर में करीब 33 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कारखानों की स्थापना हुई। जिससे रामपुर ने उद्योगों के क्षेत्र में ऊंची उड़ान भरी।
नवाब रजा अली खां ने जब रियासत की बागडोर संभाली तो उस वक्त रोजगार या शहर के लोगों की आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत नहीं थी। इस आर्थिक संकट से लोगों को उबारने के लिए नवाब रजा अली खां ने उद्योगों के विकास की योजना बनाई और उन्हें जमीनी हकीकत भी प्रदान की। नवाब रजा अली खां ने घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्रियल बोर्ड का गठन किया। इसके साथ ही अंग्रेज उद्योगपति ई ग्रांट गोन रेमंड को रामपुर में चीनी मिल लगाने के लिए राजी किया।
रियासतकाल के जानकार एडवोकेट शौकत अली खां की पुस्तक रामपुर का इतिहास में रामपुर के उद्योग नगरी के रूप में विकसित होने की यह तमाम जानकारियां हैं। जिसके मुताबिक ई ग्रांट गोवन रेमंड ने रामपुर में 20 जनवरी 1933 को रजा शुगर फैक्टरी बनाई और यहां के 1039 लोगों को रोजगार दिया। इसके बाद गोवन दूसरी फैक्टरी बुलंदशहर में लगाना चाहते थे लेकिन, नवाब रजा अली खां ने उन्हें यह दूसरी फैक्टरी भी रामपुर में ही लगाने के लिए राजी किया। जिसके बाद रामपुर में 7 फरवरी 1936 को बुलंद शुगर फैक्टरी का उद्घाटन किया गया। इसके बाद लगातार रामपुर में उद्योगों ने तेजी से पैर पसारे। साल 1938 में सर ज्वाला प्रसाद श्रीवास्तव ने बीस हजार तकलों और पांच सौ करघों के साथ रजा टैक्सटाइल की शुरुआत की प्रक्रिया शुरू की, जिसकी नवाब रजा अली खां ने 1939 में आधारशिला रखी। इसके साथ ही रामपुर में हिंदुस्तान प्रोड्क्टस बरेली से फ्रूट फैक्टरी, गोविंदराम सेवा राम कंपनी कोलकाता से तेल मिल की स्थापना का भी करार हुआ।
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इन फैक्टरियों की स्थापना के बाद रामपुर में उद्योग लगाने को लेकर होड़ सी मच गई और एक के बाद एक करीब 33 सार्वजनिक व निजी उद्योगों की स्थापना हुई।
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नवाब रजा अली खां ने जब रियासत की बागडोर संभाली तो उस वक्त रोजगार या शहर के लोगों की आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत नहीं थी। इस आर्थिक संकट से लोगों को उबारने के लिए नवाब रजा अली खां ने उद्योगों के विकास की योजना बनाई और उन्हें जमीनी हकीकत भी प्रदान की। नवाब रजा अली खां ने घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्रियल बोर्ड का गठन किया। इसके साथ ही अंग्रेज उद्योगपति ई ग्रांट गोन रेमंड को रामपुर में चीनी मिल लगाने के लिए राजी किया।
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रियासतकाल के जानकार एडवोकेट शौकत अली खां की पुस्तक रामपुर का इतिहास में रामपुर के उद्योग नगरी के रूप में विकसित होने की यह तमाम जानकारियां हैं। जिसके मुताबिक ई ग्रांट गोवन रेमंड ने रामपुर में 20 जनवरी 1933 को रजा शुगर फैक्टरी बनाई और यहां के 1039 लोगों को रोजगार दिया। इसके बाद गोवन दूसरी फैक्टरी बुलंदशहर में लगाना चाहते थे लेकिन, नवाब रजा अली खां ने उन्हें यह दूसरी फैक्टरी भी रामपुर में ही लगाने के लिए राजी किया। जिसके बाद रामपुर में 7 फरवरी 1936 को बुलंद शुगर फैक्टरी का उद्घाटन किया गया। इसके बाद लगातार रामपुर में उद्योगों ने तेजी से पैर पसारे। साल 1938 में सर ज्वाला प्रसाद श्रीवास्तव ने बीस हजार तकलों और पांच सौ करघों के साथ रजा टैक्सटाइल की शुरुआत की प्रक्रिया शुरू की, जिसकी नवाब रजा अली खां ने 1939 में आधारशिला रखी। इसके साथ ही रामपुर में हिंदुस्तान प्रोड्क्टस बरेली से फ्रूट फैक्टरी, गोविंदराम सेवा राम कंपनी कोलकाता से तेल मिल की स्थापना का भी करार हुआ।
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इन फैक्टरियों की स्थापना के बाद रामपुर में उद्योग लगाने को लेकर होड़ सी मच गई और एक के बाद एक करीब 33 सार्वजनिक व निजी उद्योगों की स्थापना हुई।