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तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मुहब्बत की राहों में आकर तो देखो..
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रामपुर। तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मुहब्बत की राहों में आकर तो देखो। तड़पने पे मेरे न फिर तुम हंसोगे, कभी दिल किसी से लगाकर तो देखो।
वफाओं की हमसे तवक्को नहीं है, मगर एक बार आजामा कर तो देखो। सूफी गायक शाहिद समी निजामी की इस कव्वाली ने लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया।
रामपुर में चल रहे हुनर हाट में शुक्रवार को शाहिद समी निजामी एवं गायक तलत अजीज के कार्यक्रम होने थे। लिहाजा, शाम होते ही हुनर हाट का मंच सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सजकर तैयार था। गायकों ने अपनी गायिकी के कमाल से सूफी संगीत के जरिए कार्यक्रम में समां बांध दिया। वहीं, सूफी गायक शाहिद समी निजामी ने कार्यक्रम शुरु करने से पहले कुछ शेर पेश किए। कहा कि इश्क उनको अता नहीं होता, जिनके दिल में खुदा नहीं होता, दिल में क्या क्या ख्याल आते हैं, सामना जब तेरा नहीं होता। यह शेर सुनते ही लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद उन्होंने अपनी कव्वाली के जरिए दर्शकों का दिल जीता और एक से बढ़कर एक कव्वाली पेश की। वहीं, गायक तलत अजीज ने भी अपनी गजलों से समां बांध दिया। इसके अलावा हुनर हाट में लोगों ने जमकर खरीदारी की। हस्तकला के अलग अलग राज्यों की दुकानें, जरी पेचवर्क का काम, बांस से बनी वस्तुओं को लोगों ने खूब पसंद किया। स्थानीय परिधानों की भी खूब बिक्री हुई। लोगों ने विभिन्न राज्यों के खाने पीने के स्टॉलों पर अलग अलग व्यंजनों का आनंद लिया। साथ ही बच्चों ने झूलों पर जमकर मस्ती की।
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वफाओं की हमसे तवक्को नहीं है, मगर एक बार आजामा कर तो देखो। सूफी गायक शाहिद समी निजामी की इस कव्वाली ने लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया।
रामपुर में चल रहे हुनर हाट में शुक्रवार को शाहिद समी निजामी एवं गायक तलत अजीज के कार्यक्रम होने थे। लिहाजा, शाम होते ही हुनर हाट का मंच सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सजकर तैयार था। गायकों ने अपनी गायिकी के कमाल से सूफी संगीत के जरिए कार्यक्रम में समां बांध दिया। वहीं, सूफी गायक शाहिद समी निजामी ने कार्यक्रम शुरु करने से पहले कुछ शेर पेश किए। कहा कि इश्क उनको अता नहीं होता, जिनके दिल में खुदा नहीं होता, दिल में क्या क्या ख्याल आते हैं, सामना जब तेरा नहीं होता। यह शेर सुनते ही लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद उन्होंने अपनी कव्वाली के जरिए दर्शकों का दिल जीता और एक से बढ़कर एक कव्वाली पेश की। वहीं, गायक तलत अजीज ने भी अपनी गजलों से समां बांध दिया। इसके अलावा हुनर हाट में लोगों ने जमकर खरीदारी की। हस्तकला के अलग अलग राज्यों की दुकानें, जरी पेचवर्क का काम, बांस से बनी वस्तुओं को लोगों ने खूब पसंद किया। स्थानीय परिधानों की भी खूब बिक्री हुई। लोगों ने विभिन्न राज्यों के खाने पीने के स्टॉलों पर अलग अलग व्यंजनों का आनंद लिया। साथ ही बच्चों ने झूलों पर जमकर मस्ती की।