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हसन हम्माद के नाम से फईम ने पाक में बनवाया था पासपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो /रा मपुर।
Updated Tue, 03 Jan 2017 12:28 AM IST
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रामपुर में कोर्ट में आतंकी हमले के आरोपियों की पेशी के दौरान तारीख पर आए लोगों को बाहर ही रोक दिया।
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इसकी पुष्टि पाकिस्तान में तैनात रहे भारतीय राजदूत मनप्रीत सिंह बोहरा ने की है। वर्तमान में अफगानिस्तान में तैनात बोहरा सोमवार को इस मामले में कोर्ट पेश हुए और उन्होंने अपनी गवाही दी। उनसे बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने सवाल जवाब किए, जिसका उन्होंने बखूबी जवाब भी दिया। कोर्ट अब 16 जनवरी को इस मामले में सुनवाई करेगी।
31 जनवरी 2007 की रात सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान गई थी। सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था।
हमले के आरोप में आठ लोगों की गिरफ्तारी की गई। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर के इमरान शहजाद व मोहम्मद फारूख, मुंबई के गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन उर्फ सबा, बरेली जिले के बहेड़ी का गुलाब खां, प्रतापगढ़ जिले के कुंडा का कौसर खां, मुरादाबाद जिले के मूंढापांडे थाना क्षेत्र का जंग बहादुर उर्फ खान बाबा और खजुरिया का शरीफ उर्फ सुहेल शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ अदालत में मुकदमा चल रहा है।
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सोमवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए सभी आतंकियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया गया। गवाही के लिए अफगानिस्तान में तैनात राजदूत मनप्रीत बोहरा कोर्ट में पहुंचे, जहां उनकी गवाही हुई।
इस दौरान उन्होंने अपने बयानों में कहा कि वह वर्ष 2007 से 2009 तक पाकिस्तान में उप उच्चायुक्त के पद पर इस्लामाबाद में तैनात थे। मुंबई हमले के बाद पाक-भारत सरकार द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान किया गया था। उनके द्वारा डोजियर के जरिये फईम के पासपोर्ट की जांच की गई थी, जिसमें उन्होंने पाया कि फईम अरशद अंसारी ने अपना नाम बदलकर हसन हम्माद के नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। इसकी जांच भी उन्होंने की थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की गई, जिसका उन्होंने बखूबी जवाब दिया। उनकी गवाही पूरी हो गई सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। इस मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।
31 जनवरी 2007 की रात सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए थे जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान गई थी। सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था।
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हमले के आरोप में आठ लोगों की गिरफ्तारी की गई। इनमें पाक अधिकृत कश्मीर के इमरान शहजाद व मोहम्मद फारूख, मुंबई के गोरे गांव का फहीम अंसारी, बिहार के मधुबनी का सबाउद्दीन उर्फ सबा, बरेली जिले के बहेड़ी का गुलाब खां, प्रतापगढ़ जिले के कुंडा का कौसर खां, मुरादाबाद जिले के मूंढापांडे थाना क्षेत्र का जंग बहादुर उर्फ खान बाबा और खजुरिया का शरीफ उर्फ सुहेल शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ अदालत में मुकदमा चल रहा है।
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सोमवार को मुकदमे की सुनवाई के लिए सभी आतंकियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट लाया गया। गवाही के लिए अफगानिस्तान में तैनात राजदूत मनप्रीत बोहरा कोर्ट में पहुंचे, जहां उनकी गवाही हुई।
इस दौरान उन्होंने अपने बयानों में कहा कि वह वर्ष 2007 से 2009 तक पाकिस्तान में उप उच्चायुक्त के पद पर इस्लामाबाद में तैनात थे। मुंबई हमले के बाद पाक-भारत सरकार द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान किया गया था। उनके द्वारा डोजियर के जरिये फईम के पासपोर्ट की जांच की गई थी, जिसमें उन्होंने पाया कि फईम अरशद अंसारी ने अपना नाम बदलकर हसन हम्माद के नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। इसकी जांच भी उन्होंने की थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की गई, जिसका उन्होंने बखूबी जवाब दिया। उनकी गवाही पूरी हो गई सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। इस मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।