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चिटफंड कंपनी : सीबीआई जांच की होगी सिफारिश
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Thu, 25 Aug 2016 02:01 AM IST
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किसानों को जमीन, प्लाट और मकान का लालच देकर आरडी-एफडी के नाम पर अवैध वसूली करने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच तेज हो गई। करोड़ों के घपले की आशंका में 21 चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की तैयारी की जा रही है। साथ ही इन कंपनियों के दफ्तरों पर दोबारा छापेमारी होगी।
शहर में 30 से ज्यादा चिटफंड, रियल इस्टेट और मल्टीपर्पज कंपनियों के दफ्तर चल रहे हैं। कंपनी एक्ट के तहत पंजीकृत कंपनियां किसानों से जमीन, प्लाट और मकान का लालच देकर आरडी-एफडी के नाम पर अवैध वसूली कर रही हैं।
बीते दिनों भाकियू की शिकायत पर डीएम ने कमेटी बनाकर 21 कंपनियों के खिलाफ जांच बैठा दी है। कंपनियों ने जब रिकार्ड नहीं दिया तो कमेटी ने कुछ दिन पहले कंपनी के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। छापे के बाद कई कंपनियां दफ्तर बंद कर फरार हो गईं। कुछ ने दफ्तरों से बोर्ड उतार दिए। लेकिन कंपनियों के एजेंट अभी भी गांवों में जाकर किसानों से वसूली कर रहे हैं। ऐसी कंपनियों के डायरेक्टरों की छानबीन शुरू कर दी है।
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छह करोड़ रुपये लेकर फरार हो चुकी है एक कंपनी ः लोगों का विश्वास जीतने के लिए कंपनी के एजेंट पहले अपने रिश्तेदारों को जाल में फंसाते हैं। रिश्तेदारों से बीमा कराने के नाम पर लालच देकर हर महीने धन की वसूली की जाती है। किसानों के जब करोड़ों रुपये जमा हो जाते हैं तो कंपनी रातों-रात फरार हो जाती है। कुछ दिन पहले शहर से एक कंपनी करीब छह करोड़ रुपये लेकर फरार हो चुकी है। कंपनी के एजेंटों ने भी कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
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शहर में 30 से ज्यादा चिटफंड, रियल इस्टेट और मल्टीपर्पज कंपनियों के दफ्तर चल रहे हैं। कंपनी एक्ट के तहत पंजीकृत कंपनियां किसानों से जमीन, प्लाट और मकान का लालच देकर आरडी-एफडी के नाम पर अवैध वसूली कर रही हैं।
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बीते दिनों भाकियू की शिकायत पर डीएम ने कमेटी बनाकर 21 कंपनियों के खिलाफ जांच बैठा दी है। कंपनियों ने जब रिकार्ड नहीं दिया तो कमेटी ने कुछ दिन पहले कंपनी के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। छापे के बाद कई कंपनियां दफ्तर बंद कर फरार हो गईं। कुछ ने दफ्तरों से बोर्ड उतार दिए। लेकिन कंपनियों के एजेंट अभी भी गांवों में जाकर किसानों से वसूली कर रहे हैं। ऐसी कंपनियों के डायरेक्टरों की छानबीन शुरू कर दी है।
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छह करोड़ रुपये लेकर फरार हो चुकी है एक कंपनी ः लोगों का विश्वास जीतने के लिए कंपनी के एजेंट पहले अपने रिश्तेदारों को जाल में फंसाते हैं। रिश्तेदारों से बीमा कराने के नाम पर लालच देकर हर महीने धन की वसूली की जाती है। किसानों के जब करोड़ों रुपये जमा हो जाते हैं तो कंपनी रातों-रात फरार हो जाती है। कुछ दिन पहले शहर से एक कंपनी करीब छह करोड़ रुपये लेकर फरार हो चुकी है। कंपनी के एजेंटों ने भी कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया था।