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Rampur News: रामपुर में 75 साल ही चले अंग्रेजों के कानून

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2024 06:15 AM IST
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British laws lasted only 75 years in Rampur
रामपुर। सोमवार से देश में अंग्रेजों के कानून की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू हो रही है। भले ही देश में अंग्रेजों द्वारा 1860 में कानून (आईपीसी) लागू किए गए हों, लेकिन नवाबों के शहर रामपुर में उस समय नवाबों का अपना ही कानून था। रामपुर रियासत के भारत में विलय के बाद 1949 में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे कानून यहां लागू हुए थे। कुल मिलाकर रामपुर में अंग्रेजों के कानून 75 साल ही चले।
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रामपुर में नवाबों का शासन करीब पौने दो सौ साल रहा। 1774 में पहले नवाब फैजुल्ला खां ने रामपुर रियासत के लिए अलग कानून बनवाए। समय के साथ नवाबों के अपने कानूनों में बदलाव भी किया, लेकिन अंग्रेजों के देश में आने और अपने कानून लागू करने के बाद भी रामपुर में उनके कानून नहीं चलते थे। रामपुर में नवाब के कानूनों के अनुसार न्याय मिलता था। यहां 1930 में पुरानी तहसील में हाईकोर्ट बनाई गई थी, जिसका उद्घाटन दो मार्च 1931 को किया गया था।
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रामपुर हाईकोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश मोअज्जम अली खां हुए। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश बदलते रहे। नवाब परिवार के पूर्व मंत्री नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि 1949 से पहले रामपुर में नवाबों का अपना कानून हुआ करता था। रामपुर के नवाब इजलात-ए-हुमायूं कहे जाते थे। उनका फैसला रामपुर रियासत का अंतिम फैसला होता था। उनके फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती थी। नवाब रजा अली खां के समय में एक जुलाई 1949 को रामपुर रियासत का विलय भारतीय गणराज्य में हो गया था, जिसके बाद से रामपुर में अंग्रेजों के जमाने के कानून के हिसाब से काम होने लगा था।
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सोमवार से भारतीय न्याय संहिता लागू होने जा रही है। पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने का कार्य पूरा करा लिया गया है। सोमवार से नए कानून के तहत मामले दर्ज होंगे। - विद्या सागर मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, रामपुर

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पुलिस प्रशासन ने पूरी की तैयारी, प्रशिक्षण भी हो चुका पूरा
सोमवार से देश का कानून बदलने जा रहा है। अब अंग्रेजों के कानून की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू होगी। इसके तहत धाराओं में बदलाव किया गया है। इसको लागू कराने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। नए प्रावधान के अनुसार अब एफआईआर का फार्मेट भी बदल जाएगा। पहले रिपोर्ट धारा 154 दंड प्रक्रिया के तहत दर्ज होती थी, लेकिन अब एक जुलाई से एफआईआर धारा 173 बीएनएसएस के तहत दर्ज होगी।
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