आजम खां को दो साल की सजा: 115 पेज में सुनाया फैसला, चेहरे पर छाई खामोशी; जानें मामले में कब-कब क्या हुआ
दोपहर दो बजे आजम खां को कोर्ट ने दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई । इस दौरान आजम खां कोर्ट कस्टडी में लगभग ढाई घंटे रहे और इस दौरान आजम खां के चेहरे पर उदासी और खामोशी रही।
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विस्तार
सपा नेता आजम खां शनिवार को ढाई घंटे कोर्ट की कस्टडी में रहे। इस दौरान उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और कुछ समर्थक उनके साथ रहे। इन ढाई घंटों में आजम खां कोर्ट में शांत बैठे रहे। आजम खां शनिवार को दोपहर 12 बजे अपने बेटे और कुछ चुनिंदा कार्यकर्ताओं के साथ कोर्ट रूम में दाखिल हुए। कुछ देर कोर्ट में रुकने के बाद आजम खां अपने बेटे के साथ कुर्सी पर बैठ गए। उसके बाद आजम खां के अधिवक्ता और अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी और प्रभारी संयुक्त अभियोजन एसपी पांडेय ने कोर्ट मे तर्क दिया कि आजम खां ने भाषण देते समय जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है वह समाज को बांटने वाले हैं। उससे सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का अपमान किया गया है। उन्हें अधिक से अधिक सजा दी जाए।
आजम खां के वकील ने की ये मांग
जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आजम खां को उनकी सेहत का ध्यान रखते हुए कम से कम सजा दी जाए। दोनो पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने आजम खां को धारा 171 जी, 505 1बी आईपीसी व 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में दोषी करार दिया और दोपहर दो बजे आजम खां को कोर्ट ने दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई । इस दौरान आजम खां कोर्ट कस्टडी में लगभग ढाई घंटे रहे और इस दौरान आजम खां के चेहरे पर उदासी और खामोशी रही।
115 पेज में कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला
नफरती भाषण देने के मामले में विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल शोभित बंसल ने अपना फैसला 115 पेज में दिया है। जिसमें अभियोजन की ओर से पेश किए गए सात गवाहों के बयान और बचाव पक्ष की ओर से पेशकिए गए 11 गवाह और उनकी जिरह हाईकोर्ट और सर्वोच्चतम न्यायालय की नजीरों का उल्लेख दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में भाषण की सीडी, सीडी का प्रमाण पत्र, नक्शा नजरी, अभियोजन स्वीकृति, चिक एफआईआर, मुकदमें की जीडी का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने अपने फैसले में अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों और हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट नजीरों का उल्लेख करते हुए आजम खां को दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
आजम और आकाश का हुआ कोर्ट रूम में आमना-सामना
शनिवार को आजम खां के फैसले के समय कोर्ट रूम में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना एक बजे पहुंचे। सुरक्षा में तैनात सीओ ने उनसे गेट पर पूछा तो उन्होंने कहा कि मै अपनी तारीख पर कोर्ट आया हूं। कोर्ट रूम में दाखिल होते ही सीट पर बैठे आजम खां और आकाश का आमना-सामना हो गया। दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और कुछ समय के बाद भाजपा विधायक आकाश सक्सेना अपने समर्थकों के साथ चले गए।
इन्होंने ली आजम खां की जमानत
सजा के बाद केमरी निवासी शमशुद्दीन और शफीक ने जमानती के रूप में उनकी जमानत ली। दोनो ने आजम खां की 20-20 हजार रुपये की जमानत ली है। जमानत के दस्तावेजों के रूप में उन्होंने अपनी खतौनी और आधार कार्ड दाखिल किया है।
कब क्या हुआ...
-8 अप्रैल 2019 को आजम खां ने धमौरा में सामान्य लोकसभा चुनाव के दौरान संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। जिसका वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद थाना शहजादनगर में वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी अनिल चौहान ने थाना शहजादनगर में मुकदमा दर्ज कराया।
-5 मई 2019 को विवेचक प्रभारी निरीक्षक अमर सिंह ने चार्जशीट दाखिल की।
-12नवंबर 2021 को आजम खां पर तय हुए आरोप
-5 जुलाई 2023 को दोनो पक्षों की बहस हुई पूरी
-15जुलाई 2023 को कोर्ट ने आजम खां को दोषी मानते हुए दो साल की कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई।
आजम ने इनके खिलाफ की थी नफरती टिप्पणी
आजम खां ने मुख्यमंत्री, तत्कालीन डीएम के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आजम खां ने इलेक्शन कमीशन और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
अभियोजन की ओर से 7 और आजम खां ने अपने बचाव में कराए 11 गवाहों के बयान
अभियोजन की ओर से मुकदमें के वादी और 38 मिलक विधानसभा के वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी अनिल कुमार चौहान सहित सात गवाहों के बयान कोर्ट में कराए और आजम खां ने अपने बचाव में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार, अमरजीत सहित 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
आजम पर दर्ज हैं 90 से अधिक मुकदमे, 27 माह बाद जेल से हुए थे रिहा
रामपुर। सपा नेता आजम खां पर 90 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। कोर्ट से कुर्की के वारंट जारी होने के बाद आजम खां ने अपनी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ 26 फरवरी 2020 को रामपुर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद तीनों को सुरक्षा कारणों से सीतापुर जेल भेज दिया गया था। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पहले डॉ. तजीन फात्मा और बाद में अब्दुल्ला आजम जेल से बाहर आए थे। आजम खां 27 माह तक सीतापुर जेल में रहने के बाद मई 2022 में जेल से बाहर आए थे। आजम खां के खिलाफ रामपुर और मुरादाबाद सहित प्रदेश के अन्य कई शहरों में मुकदमे दर्ज हैं। उनके खिलाफ सबसे अधिक मुकदमे वर्ष 2019 में दर्ज हुए थे।
नफरती भाषण के एक अन्य मामले में 24 मई को आजम खां हो चुके हैं बरी
2019 में आजम खां के खिलाफ आलियागंज के किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में 26 मुकदमे थाना अजीमनगर में दर्ज हुए। यतीमखाना प्रकरण में 12, डूंगरपुर प्रकरण में 12 और आचार संहिता उल्लंघन सहित अन्य कई मामलों में मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें रामपुर कोर्ट से दो मुकदमों में कोर्ट आजम खां को सजा सुना चुकी है। हालांकि, नफरती भाषण के एक मामले में सेशन कोर्ट 24 मई 2022 को उन्हे बरी कर चुकी है। अब तीसरे मामले में शनिवार को कोर्ट ने आजम खां सजा सुनाई।
मुरादाबाद की कोर्ट से सड़क जाम करने के 2008 के एक मामले में सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में आजम खां और उनके बेटेअब्दुल्ला आजम को दो-दो साल की सजा सुना चुकी है, जिसकी अपील अभी न्यायालय में लंबित है। आजम खां के खिलाफ अधिकतर मामले ट्रायल पर चल रहे हैं। जिसमें जन्म प्रमाण पत्र, पड़ोसी पर जानलेवा हमला, दो पैन कार्ड का मामले सहित कई मामले हैं, जो फैसले के नजदीक हैं। आने वाले समय में आजम खां की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं।
कोर्ट परिसर में डटे रहे सपा नेता और समर्थक
रामपुर। कोर्ट का फैसला आने के बाद परिसर में सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार, सपा नेता प्रमोद गंगवार, अमित शर्मा सहित तमाम सपा समर्थक कोर्ट परिसर में मौजूद रहे। आजम खां के कोर्ट से निकलने के बाद सभी रवाना हो गए।
आजम को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
सजा के प्रश्न पर अभियोजन और बचाव के अधिवक्ताओं का तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि आजम खां ने विधि की उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक अनुभवी राजनीतिक हैं। जिनको पूर्व में कई बार सांसद और विधायक बनने का अनुभव है। अभियुक्त पूर्व में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। उनको चाहने और मानने वालों की संख्या बहुत अधिक है।
आजम को कम दिए जाने की स्थिति में ऐसे मे मामलों की पुनरावृत्ति बढ़ने की संभावना
ऐसे में आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषण से माहौल बिगड़ने की संभावना अधिक थी। इन परिस्थितियों में अगर कम दंड का लाभ दिया जाता है तो भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति संभावना अधिक है। कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की नजीर का उल्लेख करते हुए लिखा है कि न्यायालय दंड में नरमी करती है तो उन सभी लोगों का मनोबल बढ़ेगा जो चुनावी प्रतिद्वंद्विता को व्यक्तिगत शत्रुता समझ लेते हैं और उनके इस बर्ताव का खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को कम सजा या परिवीक्षा का लाभ देने का कोई आधार नही है।