फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   Azam Khan legislature end without participating in the proceedings of the 18th assembly of UP

Azam Khan: 18वीं विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिए बिना ही चली गई आजम की विधायकी, अखिलेश के बगल वाली थी सीट

Tue, 01 Nov 2022 03:01 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामपुर Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 01 Nov 2022 03:01 AM IST
सार

10वीं बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले आजम खां की विधायकी 27 अक्तूबर को कोर्ट से तीन साल कैद की सजा मिलने के बाद रद्द कर दी गई है। 2022 के विधानसभा का चुनाव आजम खां ने सांसद रहते हुए लड़ा था और विजयी हुए थे।

विज्ञापन
Azam Khan legislature end without participating in the proceedings of the 18th assembly of UP
आजम खां - फोटो : amar ujala

विस्तार

10वीं बार विधायक बने आजम खां की सदस्यता 154 दिन के अंदर ही रद्द हो गई। उन्होंने 10वीं बार विधायक के रूप में शपथ मई महीने में अपने पुत्र अब्दुल्ला आजम के साथ ग्रहण की थी। बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण से पूर्व वो विधानसभा गए थे और विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में शपथ ग्रहण की। इसके बाद सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिए बिना ही वो लौट गए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के बगल वाली सीट उनको आवंटित की गई थी, लेकिन इस सीट पर एक वो एक दिन भी नहीं बैठ पाए।

विज्ञापन

10वीं बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले आजम खां की विधायकी 27 अक्तूबर को कोर्ट से तीन साल कैद की सजा मिलने के बाद रद्द कर दी गई है। 2022 के विधानसभा का चुनाव आजम खां ने सांसद रहते हुए लड़ा था और विजयी हुए थे। जिस वक्त चुनाव हुए थे आजम खां जेल में थे। उन्होंने जेल से ही अपना नामांकन दाखिल किया था। जेल में होने की वजह से वो अपना प्रचार भी नहीं कर सके थे। इसके बाद भी वो भारी अंतर जीते थे। विधानसभा में हर मुद्दे को पूरी संजीदगी के उठाने वाले आजम खां इस सदन में अपनी बेबाक राय नहीं रख पाए। विधानसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने कार्यवाही में भाग नहीं लिया था। बीच में उनकी सेहत भी कुछ खराब रही थी, इस वजह से वो सदन की
कार्यवाही में भाग नहीं ले पाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

सदन में आजम खां की मौजूदगी न होने से पार्टी को उनको कमी महसूस होगी। क्योंकि प्रदेश में जब सपा की सरकार थी तो विपक्ष के सवालों का जवाब आजम खां ही देते थे। सरकार की ओर सदन में वो ही पक्ष रखते थे। विपक्ष में रहते हुए आजम खां कई बार सत्ता पक्ष को अपनी उपस्थिति का एहसास करा चुके हैं। अपनी तकरीर और दलीलों के माध्यम से सत्ता पक्ष को निरुत्तर करने का माद्दा रखते हैं। लेकिन 18वीं विधानसभा में शायद ही आजम खां अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकें। सपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले आजम खां की विधायकी रद्द होने से पार्टी को भी कुछ नुकसान उठाना पड़ सकता है। वो सपा का मुस्लिम चेहरा माने जाते हैं। मुरादाबाद मंडल सहित पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है।

विज्ञापन

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आजम खां के पास 45 साल का लंबा अनुभव है। विधानसभा के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य वो रह चुके हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक अनुभव का सपा को लाभ नहीं मिल पाएगा। सपा को इसका नुकसान निकाय चुनावों में उठाना पड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed