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आडवाणी ने पाकिस्तान जाकर जिन्ना की मजार पर टेका था माथा : डॉ. तजीन
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रामपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 'जैम' वाले बयान पर सपा सांसद आजम खां की पत्नी शहर विधायक डॉ. तजीन फात्मा ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आजम खां का नाम जिन्ना के साथ जोड़ना सरासर अन्याय है। आजम खां ने तो हमेशा जिन्ना की विचारधारा का विरोध किया है। भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी ने पाकिस्तान जाकर जिन्ना की मजार पर माथा टेका था। ऐसे में आजम खां किस तरह से जिन्ना की विचारधारा के समर्थक हो सकते हैं।
डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि यह अफसोस कि बात है कि आजम खां जो एक सांसद भी हैं, उनका नाम गृहमंत्री ने जिन्ना के साथ जोड़ा है। आजम खां हमेशा से ही एक मजबूत दृढ़ राष्ट्रवादी रहे हैं। उन्होंने हमेशा ही जिन्ना की विचारधारा का विरोध किया है। उन्होंने कभी पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया और न ही पाकिस्तान जाने जैसी बात कही। ऐसा व्यक्ति जिसके मन में अपनी सरजमीं से इतना प्रेम हो कि यहां शिक्षण संस्थानों की स्थापना की, जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना की, उसका नाम जिन्ना के साथ जोड़ना सरासर अन्याय है।
डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कभी पाकिस्तान जाकर जिन्ना की कब्र पर माथा नहीं टेका। जबकि, लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान गए, तो उन्होंने खासकर जिन्ना की कब्र पर जाकर माथा टेका। ऐसे में आजम खां किस तरह से जिन्ना की विचारधारा के समर्थक हो सकते हैं। जिन्ना की विचारधारा टूरिज्म थ्योरी का पार्टीशन का न सिर्फ समाजवादी पार्टी, आजम खां, बल्कि हर हिंदुस्तानी विरोध करता है। यह सब राजनीति से प्रेरित है।
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बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को आजमगढ़ की जनसभा में 'जैम' शब्द को परिभाषित करते हुए कहा था कि सपा के लिए जैम का मतलब जिन्ना, आजम, मुख्तार है, जबकि हमारे लिए जनधन, आधार कार्ड, मोबाइल है।
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डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि यह अफसोस कि बात है कि आजम खां जो एक सांसद भी हैं, उनका नाम गृहमंत्री ने जिन्ना के साथ जोड़ा है। आजम खां हमेशा से ही एक मजबूत दृढ़ राष्ट्रवादी रहे हैं। उन्होंने हमेशा ही जिन्ना की विचारधारा का विरोध किया है। उन्होंने कभी पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया और न ही पाकिस्तान जाने जैसी बात कही। ऐसा व्यक्ति जिसके मन में अपनी सरजमीं से इतना प्रेम हो कि यहां शिक्षण संस्थानों की स्थापना की, जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना की, उसका नाम जिन्ना के साथ जोड़ना सरासर अन्याय है।
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डॉ. तजीन फात्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कभी पाकिस्तान जाकर जिन्ना की कब्र पर माथा नहीं टेका। जबकि, लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान गए, तो उन्होंने खासकर जिन्ना की कब्र पर जाकर माथा टेका। ऐसे में आजम खां किस तरह से जिन्ना की विचारधारा के समर्थक हो सकते हैं। जिन्ना की विचारधारा टूरिज्म थ्योरी का पार्टीशन का न सिर्फ समाजवादी पार्टी, आजम खां, बल्कि हर हिंदुस्तानी विरोध करता है। यह सब राजनीति से प्रेरित है।
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बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को आजमगढ़ की जनसभा में 'जैम' शब्द को परिभाषित करते हुए कहा था कि सपा के लिए जैम का मतलब जिन्ना, आजम, मुख्तार है, जबकि हमारे लिए जनधन, आधार कार्ड, मोबाइल है।