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Rampur News: तीन दशक से बसी है आबादी, अब जमीन पर दावा
Sun, 13 Sep 2026 01:30 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sun, 13 Sep 2026 01:30 AM IST
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भोट रामपुर। ग्राम पंचायत पेमपुर के मजरा हिम्मतनगर/हिम्मतपुर में करीब तीन दशक से आबाद बस्ती की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर ग्रामीण जमीन को अपना घर और जीवन का आधार बता रहे हैं तो दूसरी ओर खरीद-फरोख्त को लेकर उठे सवालों ने राजस्व व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला डीएम तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार और बृहस्पतिवार को जांच के बाद शनिवार को हल्का लेखपाल कंचन चौहान ने ग्रामीणों के सामूहिक बयान दर्ज कर जानकारी जुटाई।
ग्रामीणों का दावा है कि गाटा संख्या-01 की करीब 1.820 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 30 वर्ष पहले आबादी बसनी शुरू हुई थी। उनका कहना है कि तत्कालीन भूमि स्वामी अरविंद पांडे और उनके मुनीमों ने धनराशि लेकर ग्रामीणों को जमीन दी थी। हालांकि, ग्रामीणों के पास भुगतान की रसीद नहीं है। इसके बाद लोगों ने अपनी जमा पूंजी और मेहनत से यहां मकान बनाए और धीरे-धीरे पूरी बस्ती अस्तित्व में आ गई। ग्रामीणों का कहना है कि आज हिम्मतनगर को सिर्फ राजस्व अभिलेख में दर्ज किसी गाटा संख्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। यहां प्राथमिक विद्यालय, मस्जिद और कब्रिस्तान मौजूद हैं। बस्ती में सरकारी प्राथमिक विद्यालय, सीसी रोड, नालियां और खड़ंजे बने हैं। निबंधन सहायक रजिस्ट्री पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि टीम मौके पर गई है, जांच कर रही है।
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हाईवे चौड़ीकरण के दौरान सामने आया था आबादी का अस्तित्व
ग्रामीणों के मुताबिक जमीन का कुछ हिस्सा बाद में हाईवे चौड़ीकरण की जद में आया था। उस दौरान प्रशासन व एनएचएआई ने मौके पर बने मकान स्वामियों को कब्जादार मानते हुए स्ट्रक्चर का मुआवजा मकान स्वामियों को, जबकि भूमि का मुआवजा भूमि स्वामी अरविंद पांडे आदि को मिला। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि उस समय प्रशासन ने मकानों का स्ट्रक्चर देखकर मुआवजा दिया था तो मौके पर आबादी होने की जानकारी भी प्रशासनिक रिकॉर्ड और जांच के दायरे में रही होगी। आरोप लगाया कि आबादी बसने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्रियां अलग-अलग लोगों के नाम की जाती रहीं। इनमें अजय कुमार, पूनम, बलवान सिंह, मैसर्स जेवर टैक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड, मोहम्मद यूनुस सैफी, दीपिका रस्तोगी और प्रीति जैन के नाम शामिल होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने खसरे में जमीन आबादी में दर्ज होने के बावजूद रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज के दौरान मौके पर मौजूद मकानों, विद्यालय, मस्जिद, कब्रिस्तान, पेड़ और बोरिंग आदि का उल्लेख नहीं किया गया। जमीन को कृषि भूमि के रूप में दर्शाए जाने पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
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जमीन खाली करने का दबाव और बुलडोजर की धमकी का आरोप
भोट। ग्रामीणों का आरोप है कि आबादी की जमीन को कृषि भूमि में दर्शाकर रजिस्ट्री कराने वाले एक क्रेता द्वारा जमीन दोबारा खरीदकर बैनामा कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जमीन खाली नहीं करने पर मकानों पर बुलडोजर चलवाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों पर कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
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डीएम से शिकायत के बाद जांच का सिलसिला जारी
शिकायत के बाद बुधवार को रजिस्ट्रार कार्यालय की टीम मौके पर पहुंची और जांच की। बृहस्पतिवार को भी सबरजिस्ट्रार और राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से जानकारी ली। शनिवार दोपहर हल्का लेखपाल कंचन चौहान एक बार फिर हिम्मतनगर पहुंचीं। उन्होंने आबादी में वर्षों से रह रहे लोगों से आवश्यक जानकारी लेने के साथ उनके सामूहिक बयान दर्ज किए। ग्राम प्रधान लाल सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर हल्का लेखपाल उनके साथ हिम्मतनगर पहुंची थीं। कई वर्षों से आबादी में रह रहे लोगों की जानकारी लेने के साथ उनके सामूहिक बयान दर्ज किए गए हैं।
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फोटो-बीएचओटी01,02
फोटो कैप्शन-बीएचओटी01-शनिवार को हिम्मतनगर गांव में ग्रामीणों से सामूहिक बयान लेतीं हल्का लेखपाल कंचन चौहान।बीएचओटी02-हिम्मतनगर गांव की आबादी का फोटो।
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ग्रामीणों का दावा है कि गाटा संख्या-01 की करीब 1.820 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 30 वर्ष पहले आबादी बसनी शुरू हुई थी। उनका कहना है कि तत्कालीन भूमि स्वामी अरविंद पांडे और उनके मुनीमों ने धनराशि लेकर ग्रामीणों को जमीन दी थी। हालांकि, ग्रामीणों के पास भुगतान की रसीद नहीं है। इसके बाद लोगों ने अपनी जमा पूंजी और मेहनत से यहां मकान बनाए और धीरे-धीरे पूरी बस्ती अस्तित्व में आ गई। ग्रामीणों का कहना है कि आज हिम्मतनगर को सिर्फ राजस्व अभिलेख में दर्ज किसी गाटा संख्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। यहां प्राथमिक विद्यालय, मस्जिद और कब्रिस्तान मौजूद हैं। बस्ती में सरकारी प्राथमिक विद्यालय, सीसी रोड, नालियां और खड़ंजे बने हैं। निबंधन सहायक रजिस्ट्री पुनीत श्रीवास्तव ने बताया कि टीम मौके पर गई है, जांच कर रही है।
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हाईवे चौड़ीकरण के दौरान सामने आया था आबादी का अस्तित्व
ग्रामीणों के मुताबिक जमीन का कुछ हिस्सा बाद में हाईवे चौड़ीकरण की जद में आया था। उस दौरान प्रशासन व एनएचएआई ने मौके पर बने मकान स्वामियों को कब्जादार मानते हुए स्ट्रक्चर का मुआवजा मकान स्वामियों को, जबकि भूमि का मुआवजा भूमि स्वामी अरविंद पांडे आदि को मिला। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि उस समय प्रशासन ने मकानों का स्ट्रक्चर देखकर मुआवजा दिया था तो मौके पर आबादी होने की जानकारी भी प्रशासनिक रिकॉर्ड और जांच के दायरे में रही होगी। आरोप लगाया कि आबादी बसने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्रियां अलग-अलग लोगों के नाम की जाती रहीं। इनमें अजय कुमार, पूनम, बलवान सिंह, मैसर्स जेवर टैक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड, मोहम्मद यूनुस सैफी, दीपिका रस्तोगी और प्रीति जैन के नाम शामिल होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने खसरे में जमीन आबादी में दर्ज होने के बावजूद रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज के दौरान मौके पर मौजूद मकानों, विद्यालय, मस्जिद, कब्रिस्तान, पेड़ और बोरिंग आदि का उल्लेख नहीं किया गया। जमीन को कृषि भूमि के रूप में दर्शाए जाने पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
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जमीन खाली करने का दबाव और बुलडोजर की धमकी का आरोप
भोट। ग्रामीणों का आरोप है कि आबादी की जमीन को कृषि भूमि में दर्शाकर रजिस्ट्री कराने वाले एक क्रेता द्वारा जमीन दोबारा खरीदकर बैनामा कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जमीन खाली नहीं करने पर मकानों पर बुलडोजर चलवाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों पर कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
डीएम से शिकायत के बाद जांच का सिलसिला जारी
शिकायत के बाद बुधवार को रजिस्ट्रार कार्यालय की टीम मौके पर पहुंची और जांच की। बृहस्पतिवार को भी सबरजिस्ट्रार और राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से जानकारी ली। शनिवार दोपहर हल्का लेखपाल कंचन चौहान एक बार फिर हिम्मतनगर पहुंचीं। उन्होंने आबादी में वर्षों से रह रहे लोगों से आवश्यक जानकारी लेने के साथ उनके सामूहिक बयान दर्ज किए। ग्राम प्रधान लाल सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर हल्का लेखपाल उनके साथ हिम्मतनगर पहुंची थीं। कई वर्षों से आबादी में रह रहे लोगों की जानकारी लेने के साथ उनके सामूहिक बयान दर्ज किए गए हैं।
फोटो-बीएचओटी01,02
फोटो कैप्शन-बीएचओटी01-शनिवार को हिम्मतनगर गांव में ग्रामीणों से सामूहिक बयान लेतीं हल्का लेखपाल कंचन चौहान।बीएचओटी02-हिम्मतनगर गांव की आबादी का फोटो।