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आजम के कम उंचाई वाले गेट को तोड़ने के लिए अफसरों ने फिर मांगी अनुमति

Fri, 13 Oct 2017 01:27 AM IST
Updated Fri, 13 Oct 2017 01:27 AM IST
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आजम के कम उंचाई वाले गेट को तोड़ने के लिए अफसरों ने फिर मांगी अनुमति
आजम के कम उंचाई वाले गेट को तोड़ने के लिए अफसरों ने फिर मांगी अनुमति
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अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां द्वारा बनवाए गए कम ऊंचाई वाले गेट से वाहनों के निकलने में आ रही दिक्कत के बाद इसे अतिक्रमण घोषित किए जाने पर भी अफसर ध्वस्त नहीं करा सके। अफसरों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की गई शिकायत के निस्तारण में उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की अनुमति मांग कर शिकायत निस्तारित कर दी। उधर, शिकायत करने वाले पूर्व मंत्री निसार हुसैन के पुत्र मुस्तफा हुसैन ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर अफसरों पर गुमराह करने और आजम के प्रभाव में कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।
मुस्तफा हुसैन को शिकायत पोर्टल पर भेजी गई सूचना में अधिशासी अभियंता लोनिवि संजय कुमार श्रीवास्तव ने इस कम ऊंचाई वाले गेट को तोड़ने के लिए एक बार फिर अपने उच्चाधिकारियों से अनुमति मांग ली है। जबकि इससे पहले भी लोनिवि के प्रमुख सचिव इसे तोड़ने के लिए कह चुके हैं। कम ऊंचाई के गेट से लगातार दिक्कत है। बड़े वाहन घनी आबादी में होकर निकल रहे हैं, जबकि बाईपासनुमा इस रोड पर कम ऊंचाई वाला गेट वाधक बना है। सपा शासन में इसे बिना अनुमति के बनवाया गया था। अब गेट की शिकायत करने वाले मुस्तफा हुसैन ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। कहा है कि आजम खां ने सपा शासन में सांसद जया प्रदा की निधि से बनाया रैन बसेरा रातों रात तुड़वाया, सैकड़ों दुकानों और गेटों पर बुलडोजर चलवाया था, यह गेट राजमार्ग पर बनाया गया है, अतिक्रमण घोषित होने के बाद भी नहीं तोड़ा जाना, अफसरों की भूमिका को संदिग्ध बनाए हुए है। अधिकारी कहीं न कहीं आजम खां के प्रभाव में काम कर रहे हैं।
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टैंक मंगाकर वाहवाही लूटना चाह रहे आजम: सलाम
रामपुर। पूर्व जिला पंचायत अ ध्यक्ष हाफिज अब्दुल सलाम ने कहा है कि पूर्व मंत्री आजम खां सेना के विरोधी बयान देकर फंसे हैं, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, अब नीलामी में खरीदाहुआ पुराना टैंक खरीदकर ले आए हैं, इसकी नुमाइशगाह के नाम पर वे यह साबित करना चाहते हैं कि वे सेना के हमदर्द हैं। खुद को बचाने के लिए टैंक किसी से खरीदलाए और दिखा रहे हैं हमें सेना ने गिफ्ट किया है। कब्जे की जमीन पर बनाई गई यूनिवर्सिटी की तमाम जांचें चल रही हैं, जल्द कच्चा चिट्ठा खुलकर सामने आने वाला है।
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