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Rampur News: ढाई साल में हादसों में गई 779 लोगों की जान
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रामपुर। बेतरतीब ड्राइविंग और तेज रफ्तार लोगों की जान ले रही है। पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी हादसों की संख्या में कोई गिरावट नहीं आ रही है। ढाई साल में जिले में विभिन्न मार्गों एक हजार से ज्यादा हादसे हुए हैं, जिसमें 779 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ज्यादातर हादसे अलग-अलग हाईवे पर हुए। कुछ बार एक ही हादसों में कई-कई लोगों की मौत हुई।
सरकार के प्रयास के बाद भी लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि रामपुर की सड़कें खून से रंगी हुईं हैं। आंकड़ों की बात करें तो जिले में हर दिन एक हादसा जरूर होता है, जिसमें किसी न किसी की जान चली जाती है। जिले में मार्च 2021 से लेकर अगस्त 2023 तक यानी ढाई साल में 1066 हादसे हुए हैं, जिसमें 779 लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। वहीं 594 लोग इन हादसों में घायल भी हुए हैं।
ज्यादातर हादसे लखनऊ-दिल्ली हाईवे, नैनीताल हाईवे, बाईपास, कोसी पुल व अन्य स्थानों पर हुए। हादसे लगातार बढ़ने के पीछे ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों पर ट्रिपलिंग और कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाना भी मौतों का बड़ा कारण है। इसके साथ ही हेलमेट को लेकर भी लोगों में जागरूकता की कमी भी मौत का कारण बनती है।
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इन स्थानों पर सबसे ज्यादा हाईवे
सरकारी आंकड़ों की बात की जाए तो रामपुर में लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर कोसी पुल से लेकर शहजादनगर में स्थित जीरो प्वाइंट पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। यहां पर सिविल लाइंस और शहजादनगर थानों की सीमा पड़ती है। इसके अलावा मिलक व बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में भी लगातार हादसे होते रहते हैं। नैनीताल हाईवे पर भी बड़ी संख्या में हादसे होते हैं।
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सबसे ज्यादा हादसे वाले थाना क्षेत्र
थाना हादसे मृत्यु घायल
सिविल लाइंस 158 106 145
मिलक 153 108 85
बिलासपुर 101 65 52
स्वार 111 85 55
शहजादनगर 95 70 45
शाहबाद 92 80 37
आंकड़े मार्च 2021 से अगस्त 2023 तक के हैं।
ब्लैक स्पॉट्स पर सबसे ज्यादा हादसे
जिले में कोसी पुल के पास जीरो प्वाइंट, पसियापुरा बाईपास, अजीतपुर बाईपास, मंसूरपुर बाईपास, शहजादनगर जीरो प्वाइंट, बिलासपुर गेट, पहाड़ी गेट, भोट, बिलासपुर तिराहा समेत 35 स्थानों पर प्रशासन की ओर से हादसे रोकने के लिए ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। परिवहन विभाग से लेकर एनएचआई व अन्य विभागों के अफसरों की गठित कमेटी की गई थी। इन स्थानों पर साइन बोर्ड भी लगाए गए थे। मगर, इसके अलावा कोई काम नहीं हुआ। जिसके चलते हादसों पर लगान नहीं लग सकी।
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हादसों की निगरानी कर रहा आई रेड एप
हादसों पर निगरानी रखने के लिए परिवहन विभाग और केंद्र सरकार की ओर से इंट्रीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटा बेस एप विकसित किया गया है। इसके जरिये छह विभाग मिलकर डेटा बेस को पूरा करते हैं और उस पर नजर रखते हैं। आईरेड एप की निगरानी करने वाले मोहम्मद नाजिम बताते हैं कि इस एप के जरिये पुलिस हादसों की वजह भी बताती है। इसकी निगरानी के लिए रामपुर में भी पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य विभाग नजर रखते हैं।
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केंद्र सरकार के माध्यम से हादसों को रोकने और इसकी वजह जानने के लिए आईरेड विकसित किया गया है। इस पर तेजी से काम किया जाता है। छह विभागों को जोड़ा जा चुका है, जबकि कई और विभागों को जोड़े जाने की कवायद की जा रही है। पूरा डेटा बेस तैयार कर परिवहन मंत्रालय को भेजा जाता है। यह डेटा फिर इंजीनियरों के पास जाता है और डेटा का आंकलन करने के बाद हादसे रोकने के लिए वह उपाय भी बताते रहे हैं।
रविंद्र सिंह चौहान, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी
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हादसों में मौतों के प्रमुख कारण
- दोपहिया वाहन पर दो से ज्यादा सवारियां।
- बिना हेलमेट दोपहिया वाहनों का संचालन।
- वाहनों की ओवर स्पीड।
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सरकार के प्रयास के बाद भी लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शायद यही वजह है कि रामपुर की सड़कें खून से रंगी हुईं हैं। आंकड़ों की बात करें तो जिले में हर दिन एक हादसा जरूर होता है, जिसमें किसी न किसी की जान चली जाती है। जिले में मार्च 2021 से लेकर अगस्त 2023 तक यानी ढाई साल में 1066 हादसे हुए हैं, जिसमें 779 लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। वहीं 594 लोग इन हादसों में घायल भी हुए हैं।
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ज्यादातर हादसे लखनऊ-दिल्ली हाईवे, नैनीताल हाईवे, बाईपास, कोसी पुल व अन्य स्थानों पर हुए। हादसे लगातार बढ़ने के पीछे ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों पर ट्रिपलिंग और कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाना भी मौतों का बड़ा कारण है। इसके साथ ही हेलमेट को लेकर भी लोगों में जागरूकता की कमी भी मौत का कारण बनती है।
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इन स्थानों पर सबसे ज्यादा हाईवे
सरकारी आंकड़ों की बात की जाए तो रामपुर में लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर कोसी पुल से लेकर शहजादनगर में स्थित जीरो प्वाइंट पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। यहां पर सिविल लाइंस और शहजादनगर थानों की सीमा पड़ती है। इसके अलावा मिलक व बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में भी लगातार हादसे होते रहते हैं। नैनीताल हाईवे पर भी बड़ी संख्या में हादसे होते हैं।
सबसे ज्यादा हादसे वाले थाना क्षेत्र
थाना हादसे मृत्यु घायल
सिविल लाइंस 158 106 145
मिलक 153 108 85
बिलासपुर 101 65 52
स्वार 111 85 55
शहजादनगर 95 70 45
शाहबाद 92 80 37
आंकड़े मार्च 2021 से अगस्त 2023 तक के हैं।
ब्लैक स्पॉट्स पर सबसे ज्यादा हादसे
जिले में कोसी पुल के पास जीरो प्वाइंट, पसियापुरा बाईपास, अजीतपुर बाईपास, मंसूरपुर बाईपास, शहजादनगर जीरो प्वाइंट, बिलासपुर गेट, पहाड़ी गेट, भोट, बिलासपुर तिराहा समेत 35 स्थानों पर प्रशासन की ओर से हादसे रोकने के लिए ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। परिवहन विभाग से लेकर एनएचआई व अन्य विभागों के अफसरों की गठित कमेटी की गई थी। इन स्थानों पर साइन बोर्ड भी लगाए गए थे। मगर, इसके अलावा कोई काम नहीं हुआ। जिसके चलते हादसों पर लगान नहीं लग सकी।
हादसों की निगरानी कर रहा आई रेड एप
हादसों पर निगरानी रखने के लिए परिवहन विभाग और केंद्र सरकार की ओर से इंट्रीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटा बेस एप विकसित किया गया है। इसके जरिये छह विभाग मिलकर डेटा बेस को पूरा करते हैं और उस पर नजर रखते हैं। आईरेड एप की निगरानी करने वाले मोहम्मद नाजिम बताते हैं कि इस एप के जरिये पुलिस हादसों की वजह भी बताती है। इसकी निगरानी के लिए रामपुर में भी पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य विभाग नजर रखते हैं।
केंद्र सरकार के माध्यम से हादसों को रोकने और इसकी वजह जानने के लिए आईरेड विकसित किया गया है। इस पर तेजी से काम किया जाता है। छह विभागों को जोड़ा जा चुका है, जबकि कई और विभागों को जोड़े जाने की कवायद की जा रही है। पूरा डेटा बेस तैयार कर परिवहन मंत्रालय को भेजा जाता है। यह डेटा फिर इंजीनियरों के पास जाता है और डेटा का आंकलन करने के बाद हादसे रोकने के लिए वह उपाय भी बताते रहे हैं।
रविंद्र सिंह चौहान, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी
हादसों में मौतों के प्रमुख कारण
- दोपहिया वाहन पर दो से ज्यादा सवारियां।
- बिना हेलमेट दोपहिया वाहनों का संचालन।
- वाहनों की ओवर स्पीड।