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अवैध खनन के लिए रामपुर प्रदेश में रहा है बदनाम
Updated Sun, 09 Dec 2018 01:12 AM IST
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रामपुर। अवैध खनन के लिए रामपुर पूरे प्रदेश में बदनाम रहा है। रामपुर में हो रहे अवैध खनन को लेकर हाईकोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की थी। इसके बाद भी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि रामपुर में अवैध खनन नहीं हो रहा है। इन दावों के विपरीत स्थिति यह है कि स्वार,टांडा, दढ़ियाल, मसवासी और बिलासपुर क्षेत्र में खुलेआम अवैध खनन हो रहा है। अवैध खनन के कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है। इस वजह से अधिकारी उन पर हाथ नहीं डाल रहे हैं।
2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में अवैध खनन को पूरी तरह से बंद करने के साथ साथ खनन माफिया पर पूरी तरह अंकुश लगाने की बात कही थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार को बने डेेढ़ साल से अधिक का वक्त हो चुका है, लेकिन स्थितियां जस की तस हैं। खनन माफिया पहले से ज्यादा बेलगाम हो गए हैं।
स्वार और मसवासी के कई इलाकों में ग्रामीणों से खनन माफिया का सीधा टकराव शुरू हो गया है। ग्रामीणों और खनन माफिया के बीच फायरिंग की घटना हो रही है। इसके बाद भी अधिकारी कह रहे हैं कि अवैध खनन नहीं हो रहा है। स्वार, टांडा, दढ़ियाल, मसवासी में खनन का एक भी वैध पट्टा नहीं है, लेकिन इसके बाद भी वहां खनन हो रहा है। क्या यह अवैध खनन नहीं है। भोट क्षेत्र में खनन करनेे वालों ने किसानों के खेत से रास्ता बना लिया था। किसानों ने जब विरोध किया तो भाजपा के एक नेता खनन कारोबारियों के पक्ष में उतर आए। मामला रफादफा कर दिया गया। मसवासी में शुक्रवार की रात भी अवैध खनन के कारोबारियों को रोकने के लिए राजस्व कर्मियों ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया। पुलिस का यह रवैया क्या प्रदर्शित करता है। एसपी ने मसवासी चौकी के प्रभारी को छोड़कर अन्य सभी लाईन हाजिर कर दिया है। स्थिति यह है कि स्वार कोतवाली और मसवासी चौकी में पोस्टिंग के लिए पुलिसकर्मी अपनी ऊंची पहुंच का इस्तेमाल करते हैं। रामपुर के अन्य कई थानों में तैनात कोतवाली स्वार थाने का प्रभारी बनने के लिए लालायित हैं। आखिर क्या वजह है कि हर पुलिसकर्मी स्वार थाने और मसवासी चौकी में अपनी तैनाती करना चाहते हैं। वहीं एसपी शिवहरि मीना का कहना है कि जिले मेें अवैध खनन नहीं हो रहा है। अगर कहीं से कई सूचना मिलती है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।
2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में अवैध खनन को पूरी तरह से बंद करने के साथ साथ खनन माफिया पर पूरी तरह अंकुश लगाने की बात कही थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार को बने डेेढ़ साल से अधिक का वक्त हो चुका है, लेकिन स्थितियां जस की तस हैं। खनन माफिया पहले से ज्यादा बेलगाम हो गए हैं।
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स्वार और मसवासी के कई इलाकों में ग्रामीणों से खनन माफिया का सीधा टकराव शुरू हो गया है। ग्रामीणों और खनन माफिया के बीच फायरिंग की घटना हो रही है। इसके बाद भी अधिकारी कह रहे हैं कि अवैध खनन नहीं हो रहा है। स्वार, टांडा, दढ़ियाल, मसवासी में खनन का एक भी वैध पट्टा नहीं है, लेकिन इसके बाद भी वहां खनन हो रहा है। क्या यह अवैध खनन नहीं है। भोट क्षेत्र में खनन करनेे वालों ने किसानों के खेत से रास्ता बना लिया था। किसानों ने जब विरोध किया तो भाजपा के एक नेता खनन कारोबारियों के पक्ष में उतर आए। मामला रफादफा कर दिया गया। मसवासी में शुक्रवार की रात भी अवैध खनन के कारोबारियों को रोकने के लिए राजस्व कर्मियों ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया। पुलिस का यह रवैया क्या प्रदर्शित करता है। एसपी ने मसवासी चौकी के प्रभारी को छोड़कर अन्य सभी लाईन हाजिर कर दिया है। स्थिति यह है कि स्वार कोतवाली और मसवासी चौकी में पोस्टिंग के लिए पुलिसकर्मी अपनी ऊंची पहुंच का इस्तेमाल करते हैं। रामपुर के अन्य कई थानों में तैनात कोतवाली स्वार थाने का प्रभारी बनने के लिए लालायित हैं। आखिर क्या वजह है कि हर पुलिसकर्मी स्वार थाने और मसवासी चौकी में अपनी तैनाती करना चाहते हैं। वहीं एसपी शिवहरि मीना का कहना है कि जिले मेें अवैध खनन नहीं हो रहा है। अगर कहीं से कई सूचना मिलती है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।
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