{"_id":"59b444234f1c1be27f8b576c","slug":"61504986147-rampur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रजा लाइब्रेरी में एम अहरार हिन्दी की कैलीग्राफी देखने को जुटी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रजा लाइब्रेरी में एम अहरार हिन्दी की कैलीग्राफी देखने को जुटी भीड़
Updated Sun, 10 Sep 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रजा लाइब्रेरी में एम अहरार हिंदी की कैलीग्राफी देखने को जुटी भीड़
रामपुर। रजा लाइब्रेरी के दरबार हाल में कैलीग्राफर एम अहरार हिंदी की कैलिग्राफी के नमूनों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. अभय कुमार सिंह ने किया। प्रदर्शनी आयोजन के अवसर पर कैलिग्राफर एम अहरार हिंदी ने कहा कि वो पेशे से कैलीग्राफर नहीं हैं बल्कि एक्साइज विभाग से रिटायर्ड हैं। लेकिन, कैलीग्राफी का शौक उन्हें बचपन से ही था और उनके पिता इसमें माहिर थे। पिता से ही उन्होंने कैलीग्राफी सीखी और मेरी कैलीग्राफी नमूनों को ईरान के कैलीग्राफी विशेषज्ञों ने काफी सराहा। ईरान के ही कलाकार रसूल मुरादी साहब मौलवी अपने खर्च पर हिन्दुस्तान आए और मेरे साथ अपने नमूनों की एक प्रदर्शनी गालिब इंस्टीट्यूट में लगवाई। लाइब्रेरी के निदेशक प्रोफेसर सैय्यद हसन अब्बास ने कहा कि कंप्यूटर के इस दौर में इंसान इतना मशीनी हो गया है कि इंसान द्वारा बनाई गई चीजों व कलाओं से दूर हो रहा है। ऐसे दौर में एम अहरार का इस कला में महारथ हासिल करना प्रशंसा योग्य है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर अभय कुमार ने कहा कि रजा लाइब्रेरी में कैलीग्राफी के नमूने देखकर काफी हैरत हुई। इस दौरान लाइब्रेरियन एवं सूचना अधिकारी डा. अबुसाद इस्लाही ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
रामपुर। रजा लाइब्रेरी के दरबार हाल में कैलीग्राफर एम अहरार हिंदी की कैलिग्राफी के नमूनों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. अभय कुमार सिंह ने किया। प्रदर्शनी आयोजन के अवसर पर कैलिग्राफर एम अहरार हिंदी ने कहा कि वो पेशे से कैलीग्राफर नहीं हैं बल्कि एक्साइज विभाग से रिटायर्ड हैं। लेकिन, कैलीग्राफी का शौक उन्हें बचपन से ही था और उनके पिता इसमें माहिर थे। पिता से ही उन्होंने कैलीग्राफी सीखी और मेरी कैलीग्राफी नमूनों को ईरान के कैलीग्राफी विशेषज्ञों ने काफी सराहा। ईरान के ही कलाकार रसूल मुरादी साहब मौलवी अपने खर्च पर हिन्दुस्तान आए और मेरे साथ अपने नमूनों की एक प्रदर्शनी गालिब इंस्टीट्यूट में लगवाई। लाइब्रेरी के निदेशक प्रोफेसर सैय्यद हसन अब्बास ने कहा कि कंप्यूटर के इस दौर में इंसान इतना मशीनी हो गया है कि इंसान द्वारा बनाई गई चीजों व कलाओं से दूर हो रहा है। ऐसे दौर में एम अहरार का इस कला में महारथ हासिल करना प्रशंसा योग्य है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर अभय कुमार ने कहा कि रजा लाइब्रेरी में कैलीग्राफी के नमूने देखकर काफी हैरत हुई। इस दौरान लाइब्रेरियन एवं सूचना अधिकारी डा. अबुसाद इस्लाही ने सभी का आभार व्यक्त किया।