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बेटी की हत्या में पिता को उम्रकैद
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:20 AM IST
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बेटी की हत्या में पिता को उम्रकैद
रामपुर। अपनी बेटी को जलाकर मारने के मामले में एडीजे -3 की अदालत ने पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बेटी की हत्या का यह मामला मिलक कोतवाली क्षेत्र के रौराकलां गांव का है। गांव निवासी अब्दुल नबी ने अपनी बेटी की एक सितंबर 2012 को जलाकर हत्या कर दी थी।
अब्दुल नबी की विधवा बेटी मोबिन ससुरालियों से विवाद के अपने मायके में रह रही थी। आरोप है कि गांव के ही एक आटो चालक से उसके अवैध संबंध बन गए थे। अब्दुल नबी ने इसको लेकर कई बार अपना विरोध भी जताया था। एक सितंबर 2012 को उसने अपनी बेटी को कमरे में बंद कर उसे जला दिया था। गंभीर रूप से झुलसी महिला को अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मोबिन ने मौत से पहले मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए, जिसमें उसने अपनी मौत के लिए अपने पिता को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। एडीजे-3अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के बाद इस मुकदमे का फैसला सुनाया। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता दावर अली ने मृतका के मजिस्ट्रेटी बयानों को आधार बनाया। साथ ही गवाह भी पेश किए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ कड़ी सजा देने की मांग की,जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को पुलिस ने झूठा फंसाया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता दावर अली ने बताया कि इस मामले में अदालत ने अब्दुल नबी को अपनी बेटी की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और बीस हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
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रामपुर। अपनी बेटी को जलाकर मारने के मामले में एडीजे -3 की अदालत ने पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। बेटी की हत्या का यह मामला मिलक कोतवाली क्षेत्र के रौराकलां गांव का है। गांव निवासी अब्दुल नबी ने अपनी बेटी की एक सितंबर 2012 को जलाकर हत्या कर दी थी।
अब्दुल नबी की विधवा बेटी मोबिन ससुरालियों से विवाद के अपने मायके में रह रही थी। आरोप है कि गांव के ही एक आटो चालक से उसके अवैध संबंध बन गए थे। अब्दुल नबी ने इसको लेकर कई बार अपना विरोध भी जताया था। एक सितंबर 2012 को उसने अपनी बेटी को कमरे में बंद कर उसे जला दिया था। गंभीर रूप से झुलसी महिला को अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मोबिन ने मौत से पहले मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए, जिसमें उसने अपनी मौत के लिए अपने पिता को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेज दिया था। पुलिस ने मामले की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। एडीजे-3अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के बाद इस मुकदमे का फैसला सुनाया। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता दावर अली ने मृतका के मजिस्ट्रेटी बयानों को आधार बनाया। साथ ही गवाह भी पेश किए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ कड़ी सजा देने की मांग की,जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को पुलिस ने झूठा फंसाया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता दावर अली ने बताया कि इस मामले में अदालत ने अब्दुल नबी को अपनी बेटी की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और बीस हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
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