{"_id":"61706738ac3042229f0b5bef","slug":"201-complaints-reached-in-control-room-rampur-news-mbd406866071","type":"story","status":"publish","title_hn":"24 घंटे में कंट्रोल रूम पर आईं 201 शिकायतें, कराई गईं निस्तारित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
24 घंटे में कंट्रोल रूम पर आईं 201 शिकायतें, कराई गईं निस्तारित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए जनपद स्तर पर संचालित कंट्रोल रूम पर 24 घंटे में 201 शिकायतें दर्ज की गईं। जिनका तुरंत निस्तारण कराया गया। वहीं कंट्रोल रूम से शिकायतों के निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम का निरीक्षण भी किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम में प्राप्त हो रही शिकायतों के निस्तारण एवं मानीटरिंग की स्थिति के बारे में डिप्टी कलेक्टर निधि डोडवाल एवं डिप्टी कलेक्टर देवेन्द्र प्रताप से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को त्वरित रूप से राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। फसल नुकसान से संबंधित शिकायतों का अलग से रजिस्टर व्यवस्थित कराने के लिए निर्देशित किया। जनपद स्तर पर संचालित कंट्रोल रूम में अब तक बाढ़ के कारण उत्पन्न समस्या एवं फसल नुकसान से संबंधित 201 फोन काल प्राप्त हुईं। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि उनकी तैनाती जिन क्षेत्रों में की गई है, वहां पूरी सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिले में गोताखोंरो की चार टीमें सक्रिय हैं, जिनमें से एक टीम पीएससी तथा तीन एसडीआरएफ टीमों द्वारा स्वार, टांडा, सदर और बिलासपुर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलाकर लोगों को राहत पहुंचाई जा रही है। कोसी नदी के तटीय क्षेत्रों में लगभग 55 गांव ऐसे हैं, जहां बाढ़ की समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि प्रभावित लोगों की अत्यावश्यक जरूरतों एवं खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करना है। इसके लिए पूर्ति विभाग के माध्यम से ड्राई राशन की उपलब्धता कराई जा रही है तथा जनपद के स्वयंसेवी संगठन और उद्यमियों द्वारा भी 10 हजार से अधिक फूड पैकेट तैयार कराकर वितरण कराया जा रहा है। पानी के तेज बहाव के कारण सड़कों पर कटान की समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों द्वारा दुरूस्तीकरण का कार्य शुरू करा दिया गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी लगातार सक्रिय बने हुए है। तटबंधों के दुरूस्तीकरण के लिए जरूरी संसाधनों को जुटाने के लिए भी निर्देश दे दिए गए हैं। पानी के घटते जल स्तर के साथ ही संक्रामक बीमारियों के खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय कर दी गई है। गांव में पानी की निकासी के लिए पम्पसेट भी जुटा लिए गए है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण उत्पन्न इस आपदा के दौर में प्रभावित लोगों की हर समस्या का समाधान कराने में किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहने पाए, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को त्वरित रूप से राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। फसल नुकसान से संबंधित शिकायतों का अलग से रजिस्टर व्यवस्थित कराने के लिए निर्देशित किया। जनपद स्तर पर संचालित कंट्रोल रूम में अब तक बाढ़ के कारण उत्पन्न समस्या एवं फसल नुकसान से संबंधित 201 फोन काल प्राप्त हुईं। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि उनकी तैनाती जिन क्षेत्रों में की गई है, वहां पूरी सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। आपदा की इस घड़ी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिले में गोताखोंरो की चार टीमें सक्रिय हैं, जिनमें से एक टीम पीएससी तथा तीन एसडीआरएफ टीमों द्वारा स्वार, टांडा, सदर और बिलासपुर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलाकर लोगों को राहत पहुंचाई जा रही है। कोसी नदी के तटीय क्षेत्रों में लगभग 55 गांव ऐसे हैं, जहां बाढ़ की समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि प्रभावित लोगों की अत्यावश्यक जरूरतों एवं खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करना है। इसके लिए पूर्ति विभाग के माध्यम से ड्राई राशन की उपलब्धता कराई जा रही है तथा जनपद के स्वयंसेवी संगठन और उद्यमियों द्वारा भी 10 हजार से अधिक फूड पैकेट तैयार कराकर वितरण कराया जा रहा है। पानी के तेज बहाव के कारण सड़कों पर कटान की समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों द्वारा दुरूस्तीकरण का कार्य शुरू करा दिया गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी लगातार सक्रिय बने हुए है। तटबंधों के दुरूस्तीकरण के लिए जरूरी संसाधनों को जुटाने के लिए भी निर्देश दे दिए गए हैं। पानी के घटते जल स्तर के साथ ही संक्रामक बीमारियों के खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय कर दी गई है। गांव में पानी की निकासी के लिए पम्पसेट भी जुटा लिए गए है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण उत्पन्न इस आपदा के दौर में प्रभावित लोगों की हर समस्या का समाधान कराने में किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहने पाए, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
विज्ञापन