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शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर किया शिक्षण कार्य
Updated Sun, 10 Sep 2017 01:12 AM IST
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शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर किया शिक्षण कार्य
रामपुर। समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट के फैसले के विरोध में शिक्षामित्रों का आंदोलन जारी रहा। इसको लेकर शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। उन्होंने समान कार्य समान वेतन और शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को अधिकतम वेटेज देने का प्रस्ताव पास कराने की मांग की।
आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन रामपुर के जिलाध्यक्ष सैय्यद जावेद मियां ने कहा कि प्रदेश सरकार की दमनकारी नीति के कारण शिक्षामित्र बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हो गए हैं। सरकार ने शिक्षामित्रों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया। इस आंदोलन के चलते प्रदेश भर में बेसिक शिक्षा बदहाल और ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में दस हजार रुपये मानेदय के सरकार के तानाशाह निर्णय से न सिर्फ शिक्षामित्रों और उनके परिवारों पर असर पड़ा है, बल्कि उन नौनिहालों पर इसका असर अधिक पड़ा है जो प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों ने प्राथमिक विद्यालय में गरीबों, मजलूमों, मजदूरों और किसानों के बच्चे पढ़ते हैं तथा सिर्फ और सिर्फ शिक्षामित्र ही उनको पढ़ाने का काम करते हैं। सरकार किसी भी हाल में गरीब, मजदूरों और किसानों के बच्चों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती। इसलिए, सरकार शिक्षामित्रों पर दमनकारी प्रभाव जमा रही है। कहा कि यदि सरकार अपने 5 सितंबर के केबिनेट प्रस्ताव को निरस्त नहीं करती है, तो 11 सितंबर से दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। केंद्र सरकार को मजबूर किया जाएगा कि उत्तर प्रदेश की तानाशाह सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप कर शिक्षामित्रों के पक्ष में निर्णय लेने को का दबाव बनाएं।
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रामपुर। समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट के फैसले के विरोध में शिक्षामित्रों का आंदोलन जारी रहा। इसको लेकर शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। उन्होंने समान कार्य समान वेतन और शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को अधिकतम वेटेज देने का प्रस्ताव पास कराने की मांग की।
आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन रामपुर के जिलाध्यक्ष सैय्यद जावेद मियां ने कहा कि प्रदेश सरकार की दमनकारी नीति के कारण शिक्षामित्र बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हो गए हैं। सरकार ने शिक्षामित्रों को आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया। इस आंदोलन के चलते प्रदेश भर में बेसिक शिक्षा बदहाल और ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में दस हजार रुपये मानेदय के सरकार के तानाशाह निर्णय से न सिर्फ शिक्षामित्रों और उनके परिवारों पर असर पड़ा है, बल्कि उन नौनिहालों पर इसका असर अधिक पड़ा है जो प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मित्रों ने प्राथमिक विद्यालय में गरीबों, मजलूमों, मजदूरों और किसानों के बच्चे पढ़ते हैं तथा सिर्फ और सिर्फ शिक्षामित्र ही उनको पढ़ाने का काम करते हैं। सरकार किसी भी हाल में गरीब, मजदूरों और किसानों के बच्चों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती। इसलिए, सरकार शिक्षामित्रों पर दमनकारी प्रभाव जमा रही है। कहा कि यदि सरकार अपने 5 सितंबर के केबिनेट प्रस्ताव को निरस्त नहीं करती है, तो 11 सितंबर से दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। केंद्र सरकार को मजबूर किया जाएगा कि उत्तर प्रदेश की तानाशाह सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप कर शिक्षामित्रों के पक्ष में निर्णय लेने को का दबाव बनाएं।
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