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95 फीसदी तक झुलसे थे श्रमिक

Sun, 05 Nov 2017 11:39 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Sun, 05 Nov 2017 11:39 PM IST
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Workers were scorched 95 percent
दुर्घटना - फोटो : अमर उजाला
एनटीपीसी की छठवीं यूनिट में हुए बॉयलर धमाके की भयावहता इससे समझी जा सकती है कि हादसे में ऐसी आग बरसी कि जिले में मरे श्रमिक 95 फीसदी से अधिक झुलस गए। यही वजह है कि एक बाद एक लोग मरते चले गए। यह खौफनाक तस्वीर मृतकों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उजागर हुई है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है कि विस्फोट का मंजर कैसा रहा होगा और घटनास्थल की स्थिति क्या रही होगी। हादसे के बाद जिले में हुए मृतकों के शवों का पीएम छह डॉक्टरों की टीम ने किया। कई श्रमिक इतने झुलस गए थे कि उनकी पहचान तक नहीं हो पाई। हालांकि बाद में उनकी पहचान हुई तो पोस्टमार्टम कराया गया।
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पीएम रिपोर्ट से स्पष्ट है कि आग ऐसी बरसी की जो भी चपेट में आया उसके शरीर की खाल झुलसने के साथ ही मांस तक जल गया। इतने बडे़ हादसे के बाद जांच-दर-जांच का दौर जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री के कहने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। एनटीपीसी हादसे में छह ऐसे श्रमिक रहे जो 95 फीसदी से अधिक झुलस गए थे।
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इसमें लवलेश पुत्र तुलसी, कृष्ण मुरारी पुत्र झूरी, हीरा सिंह पुत्र रामजी, सीताराम पुत्र अज्ञात, नरेश चौधरी पुत्र मिठाईलाल और संजय बैठा पुत्र सुखलाल बैठा शामिल हैं। इसमें तीन श्रमिकों ने तो घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया था। इसी कारण तुरंत उनकी पहचान तक नहीं हो सकी थी। फैजउल्लाखां पुत्र गुलाम मुस्तफा, अवधेश जायसवाल पुत्र श्यामलाल, संजय कुमार पुत्र मंगरू पटेल, गहवर पुत्र राम औतार, रूपचंद्र पुत्र हीरा, मानचंद्र पुत्र हीरा, रवींद्र सिंह पुत्र राम विचार, जैफरुल्ला खां पुत्र मुख्तार, हबीब उल्लाखां पुत्र गुलाम मुस्तफा, ओमप्रकाश पुत्र रतीराम, बालकृष्ण पुत्र बद्री प्रसाद, पंचम पुत्र अर्जुन, कंचन कुमार पुत्र लाखन और रामरतन पुत्र कमलेश 80 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे। इनके बचने की कोई उम्मीद ही नहीं थी।


जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल का कहना है कि बच्चे और बुजुर्गों के 30 प्रतिशत और अन्य लोगों के 40 प्रतिशत जलने के बाद बचने की उम्मीद कम होती है। हादसे में मारे गए कई श्रमिकों का स्वयं पीएम किया था। सिर्फ उनकी अंगुलियां ही समझ में आ रही थीं। पूरी की पूरी त्वचा जल चुकी थी। मांस तक जल गया था। 80 प्रतिशत से अधिक झुलसने के बाद तो किसी को बचाया ही नहीं जा सकता है।
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