{"_id":"612928cc8ebc3e79db62beb2","slug":"two-cow-shelter-centers-will-be-built-with-2-40-crores-raibaraily-news-lko5930333200","type":"story","status":"publish","title_hn":"2.40 करोड़ से बनेंगे दो गो-आश्रय केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2.40 करोड़ से बनेंगे दो गो-आश्रय केंद्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। आवारा गोवंशों को आश्रय देने के लिए 2.40 करोड़ की लागत के दो और वृहद गो-आश्रय केंद्र बनेंगे। वर्तमान समय में संचालित 49 केंद्रों पर करीब 10 हजार गोवंशों को आश्रय मिल गया है।
दो वृहद सहित नौ निर्माणाधीन अस्थायी केंद्रों का काम पूरा होने के बाद दो हजार से अधिक और गोवंशों को आश्रय मिल जाएगा। हालांकि जिले में लगातार आवारा गोवंश बढ़ रहे हैं। इससे किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
गोवंशों के आवारा घूमने के कारण इन दिनों किसानों को रात में जागकर धान की फसलें बचानी पड़ रही हैं। जिले में पर्याप्त गो-आश्रय केंद्रों के न होने के कारण लोगों को दिक्कत हो रही है।
विज्ञापन
हालांकि वर्तमान समय में जिले में 49 स्थायी व अस्थायी गो-आश्रय केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर 10 हजार से अधिक गोवंशों को आश्रय दिया गया है लेकिन इससे अधिक गोवंश अब भी आवारा घूम रहे हैं। गोवंशों को सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त बंदोबस्त अब तक नहीं हो सके हैं।
समस्या के निदान के लिए जिले को दो और वृहद गो-आश्रय केंद्र मिल गए हैं। महराजगंज ब्लॉक के बावन बुजुर्ग बल्ला और बछरावां क्षेत्र के विनायकपुर में 2.40 करोड़ रुपये की लागत से गोवंश संरक्षण केंद्रों के निर्माण का काम शुरू करवा दिया गया है। इन केंद्रों के पूर्ण होने के बाद करीब एक हजार गोवंशों को संरक्षण मिल जाएगा।
इसके अलावा जिले में कनौली, अंगुरी, नरेथुआ, अंबा, कान्हा उपवन, सलोन, नसीराबाद, ऊंचाहार में अस्थायी गो-आश्रय केंद्र जल्द ही बन कर तैयार हो जाएंगे। इन केंद्रों के बनने के बाद दो हजार से अधिक और गोवंशों को आश्रय मिल जाएगा।
सीवीओ डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले को दो और वृहद गो-आश्रय केंद्र मिले हैं। 2.40 करोड़ की लागत के गो-आश्रय स्थलों का काम भी शुरू करवा दिया गया है। सेहंगो पश्चिमगांव का वृहद आश्रय केंद्र तैयार हो गया है। जल्द ही यहां भी गोवंशों को आश्रय देने का काम शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
दो वृहद सहित नौ निर्माणाधीन अस्थायी केंद्रों का काम पूरा होने के बाद दो हजार से अधिक और गोवंशों को आश्रय मिल जाएगा। हालांकि जिले में लगातार आवारा गोवंश बढ़ रहे हैं। इससे किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
गोवंशों के आवारा घूमने के कारण इन दिनों किसानों को रात में जागकर धान की फसलें बचानी पड़ रही हैं। जिले में पर्याप्त गो-आश्रय केंद्रों के न होने के कारण लोगों को दिक्कत हो रही है।
विज्ञापन
हालांकि वर्तमान समय में जिले में 49 स्थायी व अस्थायी गो-आश्रय केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर 10 हजार से अधिक गोवंशों को आश्रय दिया गया है लेकिन इससे अधिक गोवंश अब भी आवारा घूम रहे हैं। गोवंशों को सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त बंदोबस्त अब तक नहीं हो सके हैं।
समस्या के निदान के लिए जिले को दो और वृहद गो-आश्रय केंद्र मिल गए हैं। महराजगंज ब्लॉक के बावन बुजुर्ग बल्ला और बछरावां क्षेत्र के विनायकपुर में 2.40 करोड़ रुपये की लागत से गोवंश संरक्षण केंद्रों के निर्माण का काम शुरू करवा दिया गया है। इन केंद्रों के पूर्ण होने के बाद करीब एक हजार गोवंशों को संरक्षण मिल जाएगा।
इसके अलावा जिले में कनौली, अंगुरी, नरेथुआ, अंबा, कान्हा उपवन, सलोन, नसीराबाद, ऊंचाहार में अस्थायी गो-आश्रय केंद्र जल्द ही बन कर तैयार हो जाएंगे। इन केंद्रों के बनने के बाद दो हजार से अधिक और गोवंशों को आश्रय मिल जाएगा।
सीवीओ डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले को दो और वृहद गो-आश्रय केंद्र मिले हैं। 2.40 करोड़ की लागत के गो-आश्रय स्थलों का काम भी शुरू करवा दिया गया है। सेहंगो पश्चिमगांव का वृहद आश्रय केंद्र तैयार हो गया है। जल्द ही यहां भी गोवंशों को आश्रय देने का काम शुरू हो जाएगा।