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Raebareli News: ट्रिपिंग व अघोषित कटौती ने छीना चैन
Mon, 16 Jun 2025 01:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:17 AM IST
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रायबरेली। जिले में गर्मी से लोग बेहाल हैं। तापमान बढ़ने के साथ बिजली का संकट भी गहराने लगा है। हफ्तेभर पहले बिजली की मांग 300 मेगावाट थी जो शनिवार को बढ़कर 330 मेगावाट पहुंच गई है। इससे बिजली कटौती और ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है। शहर में बिजली की आवाजाही से लोग परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अघोषित कटौती से लोगों को दो चार होना पड़ रहा है।
जिले के 54 विद्युत उपकेंद्रों से पांच लाख बिजली उपभोक्ताओं को आपूर्ति होती है। शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति का रोस्टर है। बिजली की मांग बढ़ने पर उपकेंद्र ओवरलोड हैं। यही वजह है कि कम वोल्टेज के चलते उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली नहीं मिल पा रही है।
विद्युत उपकेंद्र सूची से करीब 100 गांवों को बिजली की आपूर्ति होती है। उपकेंद्र से निकले फीडरों की लंबाई अधिक होने के कारण अंतिम छोर तक भरपूर बिजली नहीं पहुंच रही है। इससे उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है। विद्युत उपकेंद्र कठगर की हालत सबसे दयनीय है। कभी 33 केवी तो कभी 11 केवी लाइन में फॉल्ट के चलते बिजली गुल रहती है।
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वोल्टेज कम होने से नहीं चल पा रहे नलकूप
वोल्टेज इतना कम रहता है कि पंखे, कूलर, फ्रिज और सबमर्सिबल पंप की मोटर काम नहीं कर रही है। विद्युत उपकेंद्र कुंदनगंज, रतापुर, भुएमऊ, सिंधौना से जुड़े उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली नहीं मिल रही है। गदागंज के उपभोक्ता नागार्जुन प्रसाद, डलमऊ के सतीशचंद्र बाजपेयी, घुरवारा निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि कटौती से रात की नींद उड़ गई है। बिजली के अभाव में नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। यदि बारिश नहीं हुई, तो धान की नर्सरी तैयार करना कठिन हो जाएगा। ऐसे में धान उत्पादन पर असर पड़ेगा।
गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ी है। ऐसे में लो वोल्टेज की समस्या है। अघोषित कटौती ट्रांसमिशन से की जाती है।
- मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता
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जिले के 54 विद्युत उपकेंद्रों से पांच लाख बिजली उपभोक्ताओं को आपूर्ति होती है। शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति का रोस्टर है। बिजली की मांग बढ़ने पर उपकेंद्र ओवरलोड हैं। यही वजह है कि कम वोल्टेज के चलते उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली नहीं मिल पा रही है।
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विद्युत उपकेंद्र सूची से करीब 100 गांवों को बिजली की आपूर्ति होती है। उपकेंद्र से निकले फीडरों की लंबाई अधिक होने के कारण अंतिम छोर तक भरपूर बिजली नहीं पहुंच रही है। इससे उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है। विद्युत उपकेंद्र कठगर की हालत सबसे दयनीय है। कभी 33 केवी तो कभी 11 केवी लाइन में फॉल्ट के चलते बिजली गुल रहती है।
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वोल्टेज कम होने से नहीं चल पा रहे नलकूप
वोल्टेज इतना कम रहता है कि पंखे, कूलर, फ्रिज और सबमर्सिबल पंप की मोटर काम नहीं कर रही है। विद्युत उपकेंद्र कुंदनगंज, रतापुर, भुएमऊ, सिंधौना से जुड़े उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली नहीं मिल रही है। गदागंज के उपभोक्ता नागार्जुन प्रसाद, डलमऊ के सतीशचंद्र बाजपेयी, घुरवारा निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि कटौती से रात की नींद उड़ गई है। बिजली के अभाव में नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। यदि बारिश नहीं हुई, तो धान की नर्सरी तैयार करना कठिन हो जाएगा। ऐसे में धान उत्पादन पर असर पड़ेगा।
गर्मी के चलते बिजली की मांग बढ़ी है। ऐसे में लो वोल्टेज की समस्या है। अघोषित कटौती ट्रांसमिशन से की जाती है।
- मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता