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रिटायर्ड डीएसपी से बचाव पक्ष ने की जिरह
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:02 PM IST
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अभियोजन पक्ष ने 54वें गवाह के रूप में सीबीआई के रिटायर्ड डीएसपी को पेश किया। मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जिरह शुरू की, जो पूरी नहीं हो सकी।
इस पर विशेष मजिस्ट्रेट अनुराग कुरील ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 8 जनवरी तय कर दी। अभियोजन पक्ष सीबीआई की ओर से शनिवार को 54वें गवाह के रूप में सीबीआई के पूर्व डीएसपी भवानंद खरकवाल को पेश किया।
गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में बताया कि वह 1992 में मामले की विवेचना टीम में शामिल हुआ था। टीम में मुख्य विवेचक तत्कालीन एसपी एम. नारायणन के अलावा कई लोग शामिल थे।
वह विवेचना की टीम में एक सदस्य के हैसियत से मदद करता था। गवाह ने बताया कि विवेचना के दौरान समय-समय पर वह लखनऊ, फैजाबाद, अयोध्या गया था।
मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने जिरह शुरू की। गवाह ने एक सवाल के जवाब में इस बात को गलत बताया कि उसने सिर्फ कागजी कार्रवाई की थी।
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विवेचना में भाग नहीं लिया था। गवाह ने बताया कि सीबीआई ने मामले में दो आरोप पत्र प्रेषित किए थे। जिरह न पूरी होने पर सुनवाई की अगली तारीख 8 जनवरी तय कर दी गई।
सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक पी. चक्रवर्ती और अधिवक्ता एमएम हक मौजूद रहे।
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इस पर विशेष मजिस्ट्रेट अनुराग कुरील ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 8 जनवरी तय कर दी। अभियोजन पक्ष सीबीआई की ओर से शनिवार को 54वें गवाह के रूप में सीबीआई के पूर्व डीएसपी भवानंद खरकवाल को पेश किया।
गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में बताया कि वह 1992 में मामले की विवेचना टीम में शामिल हुआ था। टीम में मुख्य विवेचक तत्कालीन एसपी एम. नारायणन के अलावा कई लोग शामिल थे।
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वह विवेचना की टीम में एक सदस्य के हैसियत से मदद करता था। गवाह ने बताया कि विवेचना के दौरान समय-समय पर वह लखनऊ, फैजाबाद, अयोध्या गया था।
मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने जिरह शुरू की। गवाह ने एक सवाल के जवाब में इस बात को गलत बताया कि उसने सिर्फ कागजी कार्रवाई की थी।
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विवेचना में भाग नहीं लिया था। गवाह ने बताया कि सीबीआई ने मामले में दो आरोप पत्र प्रेषित किए थे। जिरह न पूरी होने पर सुनवाई की अगली तारीख 8 जनवरी तय कर दी गई।
सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक पी. चक्रवर्ती और अधिवक्ता एमएम हक मौजूद रहे।