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लश्कर व मुजाहिद्दीन संगठन के आतंकी रायबरेली में बना चुके अपना ठिकाना
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रायबरेली। गांधी परिवार के गढ़ के नाम से जाना जाने वाला रायबरेली जिला हमेशा आतंकियों के लिए मुफीद रहा है। लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे खूंखार आतंकवादी संगठन के लोग यहां पर रहकर देश को दहलाने की साजिश कई बार रच चुके हैं। लेकिन इसकी भनक खुफिया विभाग को नहीं हो पाती।
वर्ष 1992-93 में आतंकियों का रुख रायबरेली की ओर हुआ। सबसे पहले लश्कर-ए-तैयबा का बम स्क्वायड प्रमुख अब्दुल करीम टुंडा उर्फ डेढ़ फुटा का नाम सामने आया। वह करीब डेढ़ साल तक शहर के एक धर्मस्थल में पनाट लिए रहा।
वह मूलरूप से मेरठ के पिलखुवा गांव का रहने वाला था। उसे यहां पर बम बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। बताते हैं कि बम बनाते वक्त विस्फोट हो गया। हादसे में दो बच्चों की मौत भी हो गई थी। खुफिया विभाग को जब इसकी जानकारी हुई तो करीम टुंडा बांग्लादेश में शरण ले चुका था।
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इसके बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के एरिया कमांडर बिलाल अहमद की 1994 में जिले में इंट्री हुई। वह शहर के खिन्नीतल्ला क्षेत्र में पांच माह तक रहा औैर फिर भाग निकला। वर्ष 2001 में दाऊद के शूटर रियाज अहमद ने अपने साथियों के साथ शहर में शरण ली थी।
वह महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के रुकुनपुर गांव का रहने वाला था। इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा का एरिया कमांडर इमरान अंसारी भी सलोन क्षेत्र में सक्रिय रहा। वह पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेने के बाद जब भारत लौटा तो कुपवाड़ा के पास जवाबी फायरिंग में घायल हो गया था।
इसके बावजूद वह बचते हुए मुंबई के रास्ते सलोन पहुंचा था। 23 मार्च 2006 को एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया था। 1993 में दिल्ली में बम कांड का आरोपी आतंकी डॉक्टर हबीब भी रायबरेली का रहने वाला था। अब ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के अकोढ़िया निवासी मूलचंद्र उर्फ लाला के भी तार आतंकियों से जुड़े होने की खबर से हड़कंप मच गया है।
एफजी कॉलेज की वेबसाइट की थी हैक, कश्मीर को आजाद कराने की दी थी धमकी
करीब आठ साल पहले पाकिस्तान हैकर एफजी कॉलेज की वेबसाइट भी हैक कर चुके हैं। इस मामले की एफआईआर भी सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई थी।
पाक हैकर अब्दुल्ला खान ने वेबसाइट की स्क्रीन पर पाक जिंदाबाद...का नारा भी लिखा था। साथ ही भारत के साथ ही इजरायल को निशाने पर लिए जाने की बात लिखी थी।
स्क्रीन पर हैकर ने कश्मीर स्वतंत्र करने की बात कहते हुए धमकी दी थी कि उनका अगला निशाना भारत के सरकारी और शैक्षणिक वेबसाइट होंगे। मामला उजागर होने पर सीबीआई की टीम ने यहां पर पहुंचकर पड़ताल भी की थी।
डी-कंपनी के गुर्गे ने किया था अवैध गुटखा कारोबार
रायबरेली जिले में डी कंपनी के गुर्गे भी ठिकाना बनाने से नहीं चूके। डी कंपनी के गुर्गे इमरान इस्माइल मेमन ने डेढ़ दशक पहले बछरावां कस्बे में अवैध गुटखा का कारोबार करने के लिए उद्योग लगाया था। यहां पर तैयार कराया गया गुटखा मुंबई से लेकर दुबई तक भेजा जाता था।
मेमन का बहनोई इस्तखार आलम खान उसे हवाला के जरिए पैसा उपलब्ध कराता था, ताकि अवैध गुटखा का कारोबार फलफूल सके। बाद में मामला पकड़ में आने पर बछरावां पुलिस ने इस अवैध गुटखा कारोबार को पकड़ा था और कार्रवाई की थी।
रायबरेली जिले में कुछ लोगों के तार आतंकियों से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद खुफिया विभाग को सतर्क कर दिया गया है। सीओ व थानेदारों से क्षेत्र में रहने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान करने के लिए कहा गया है। ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले संदिग्ध आतंकी के पकड़े जाने के बाद उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में भी पड़ताल कराई जा रही है।
श्लोक कुुमार, एसपी
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वर्ष 1992-93 में आतंकियों का रुख रायबरेली की ओर हुआ। सबसे पहले लश्कर-ए-तैयबा का बम स्क्वायड प्रमुख अब्दुल करीम टुंडा उर्फ डेढ़ फुटा का नाम सामने आया। वह करीब डेढ़ साल तक शहर के एक धर्मस्थल में पनाट लिए रहा।
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वह मूलरूप से मेरठ के पिलखुवा गांव का रहने वाला था। उसे यहां पर बम बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। बताते हैं कि बम बनाते वक्त विस्फोट हो गया। हादसे में दो बच्चों की मौत भी हो गई थी। खुफिया विभाग को जब इसकी जानकारी हुई तो करीम टुंडा बांग्लादेश में शरण ले चुका था।
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इसके बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के एरिया कमांडर बिलाल अहमद की 1994 में जिले में इंट्री हुई। वह शहर के खिन्नीतल्ला क्षेत्र में पांच माह तक रहा औैर फिर भाग निकला। वर्ष 2001 में दाऊद के शूटर रियाज अहमद ने अपने साथियों के साथ शहर में शरण ली थी।
वह महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के रुकुनपुर गांव का रहने वाला था। इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा का एरिया कमांडर इमरान अंसारी भी सलोन क्षेत्र में सक्रिय रहा। वह पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेने के बाद जब भारत लौटा तो कुपवाड़ा के पास जवाबी फायरिंग में घायल हो गया था।
इसके बावजूद वह बचते हुए मुंबई के रास्ते सलोन पहुंचा था। 23 मार्च 2006 को एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया था। 1993 में दिल्ली में बम कांड का आरोपी आतंकी डॉक्टर हबीब भी रायबरेली का रहने वाला था। अब ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के अकोढ़िया निवासी मूलचंद्र उर्फ लाला के भी तार आतंकियों से जुड़े होने की खबर से हड़कंप मच गया है।
एफजी कॉलेज की वेबसाइट की थी हैक, कश्मीर को आजाद कराने की दी थी धमकी
करीब आठ साल पहले पाकिस्तान हैकर एफजी कॉलेज की वेबसाइट भी हैक कर चुके हैं। इस मामले की एफआईआर भी सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई थी।
पाक हैकर अब्दुल्ला खान ने वेबसाइट की स्क्रीन पर पाक जिंदाबाद...का नारा भी लिखा था। साथ ही भारत के साथ ही इजरायल को निशाने पर लिए जाने की बात लिखी थी।
स्क्रीन पर हैकर ने कश्मीर स्वतंत्र करने की बात कहते हुए धमकी दी थी कि उनका अगला निशाना भारत के सरकारी और शैक्षणिक वेबसाइट होंगे। मामला उजागर होने पर सीबीआई की टीम ने यहां पर पहुंचकर पड़ताल भी की थी।
डी-कंपनी के गुर्गे ने किया था अवैध गुटखा कारोबार
रायबरेली जिले में डी कंपनी के गुर्गे भी ठिकाना बनाने से नहीं चूके। डी कंपनी के गुर्गे इमरान इस्माइल मेमन ने डेढ़ दशक पहले बछरावां कस्बे में अवैध गुटखा का कारोबार करने के लिए उद्योग लगाया था। यहां पर तैयार कराया गया गुटखा मुंबई से लेकर दुबई तक भेजा जाता था।
मेमन का बहनोई इस्तखार आलम खान उसे हवाला के जरिए पैसा उपलब्ध कराता था, ताकि अवैध गुटखा का कारोबार फलफूल सके। बाद में मामला पकड़ में आने पर बछरावां पुलिस ने इस अवैध गुटखा कारोबार को पकड़ा था और कार्रवाई की थी।
रायबरेली जिले में कुछ लोगों के तार आतंकियों से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद खुफिया विभाग को सतर्क कर दिया गया है। सीओ व थानेदारों से क्षेत्र में रहने वाले संदिग्ध लोगों की पहचान करने के लिए कहा गया है। ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले संदिग्ध आतंकी के पकड़े जाने के बाद उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में भी पड़ताल कराई जा रही है।
श्लोक कुुमार, एसपी