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बेटा तो कोई पति की सलामती के लिए रखता है व्रत
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 Nov 2015 11:57 PM IST
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प्रदेश और जिला तो बदल गया, लेकिन विश्वास आज भी कायम है। महिलाओं की माने तो छठ मइया से जो मांगा वह पूरा हो गया है। किसी ने बेटा मांगा तो किसी ने पति के स्वस्थ होने की कामना की।
छठ मइया ने हर किसी की मन्नत पूरी कर दी। यही वजह है कि अपना प्रांत और जिला तो बदल गया, लेकिन विश्वास पहले से भी मजबूत हो गया।
पीडब्ल्यूडी कॉलोनी की उर्मिला मिश्रा 15 वर्ष से छठ पूजा करती चली आ रही हैं। कहती है कि उनके पति नरेंद्र कुमार मिश्रा पहले काफी बीमार रहते थे। इस पर उनकी सास ने व्रत रखना शुरू कर दिया।
इसके बाद वह बीमार नहीं हुए। पति की सलामती और निरोगी रहने के लिए सास के बाद यह व्रत शुरू किया। पूजा का प्रारंभ मायके से होता है। इसीलिए पहली बार मायके में जाकर व्रत प्रारंभ किया।
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सोनिया नगर की रहने वाली राजकली कहती है कि वह 20 वर्ष से लगातार छठ पूजा व्रत रख रही हैं। छठ को पुत्र के दीर्घायु और सुख समृद्धि का पर्व माना जाता है। व्रत के दौरान तमाम कठिनाई आईं, लेकिन कभी छोड़ा नहीं।
आज छठ मइया का प्रताप है कि हमारा गांव तो छूट गया, लेकिन परिवार दिनोंदिन समृद्धि कर रहा है। राजकीय कॉलोनी की इशरावती सिंह करीब 12 साल से लगातार छठ की पूजा कर रही हैं।
उनका कहना है कि व्रत का महत्व बिहार के साथ पूर्वांचल जिले में अधिक है। बेटे के लिए उन्होंने व्रत शुरू किया था। इसमें परिवार के सभी सदस्य बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। छठ पूजा नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।
राजकीय कॉलोनी की अनीता गुप्ता का कहना है कि मायके से छठ पूजा शुरू की थी। पति के स्वस्थ कामना और सुख समृद्धि के लिए पूजा करती हूं।
अब तक छठ मइया से जो भी मांगा, वह मन्नत पूरी हुई है। परिवार पर कोई बड़ा संकट नहीं आया। इससे बढ़कर उनको और क्या चाहिए। सामर्थ्य जब तक रहेगा व्रत करती रहूंगी।
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छठ मइया ने हर किसी की मन्नत पूरी कर दी। यही वजह है कि अपना प्रांत और जिला तो बदल गया, लेकिन विश्वास पहले से भी मजबूत हो गया।
पीडब्ल्यूडी कॉलोनी की उर्मिला मिश्रा 15 वर्ष से छठ पूजा करती चली आ रही हैं। कहती है कि उनके पति नरेंद्र कुमार मिश्रा पहले काफी बीमार रहते थे। इस पर उनकी सास ने व्रत रखना शुरू कर दिया।
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इसके बाद वह बीमार नहीं हुए। पति की सलामती और निरोगी रहने के लिए सास के बाद यह व्रत शुरू किया। पूजा का प्रारंभ मायके से होता है। इसीलिए पहली बार मायके में जाकर व्रत प्रारंभ किया।
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सोनिया नगर की रहने वाली राजकली कहती है कि वह 20 वर्ष से लगातार छठ पूजा व्रत रख रही हैं। छठ को पुत्र के दीर्घायु और सुख समृद्धि का पर्व माना जाता है। व्रत के दौरान तमाम कठिनाई आईं, लेकिन कभी छोड़ा नहीं।
आज छठ मइया का प्रताप है कि हमारा गांव तो छूट गया, लेकिन परिवार दिनोंदिन समृद्धि कर रहा है। राजकीय कॉलोनी की इशरावती सिंह करीब 12 साल से लगातार छठ की पूजा कर रही हैं।
उनका कहना है कि व्रत का महत्व बिहार के साथ पूर्वांचल जिले में अधिक है। बेटे के लिए उन्होंने व्रत शुरू किया था। इसमें परिवार के सभी सदस्य बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं। छठ पूजा नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।
राजकीय कॉलोनी की अनीता गुप्ता का कहना है कि मायके से छठ पूजा शुरू की थी। पति के स्वस्थ कामना और सुख समृद्धि के लिए पूजा करती हूं।
अब तक छठ मइया से जो भी मांगा, वह मन्नत पूरी हुई है। परिवार पर कोई बड़ा संकट नहीं आया। इससे बढ़कर उनको और क्या चाहिए। सामर्थ्य जब तक रहेगा व्रत करती रहूंगी।