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सात दिन में 300 स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन के आदेश
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रायबरेली। जिले के 300 से अधिक निजी स्कूलों में वाहनों के फिटनेस व अन्य मानकों को पूरा कराने के लिए बाकायदा स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन के आदेश हैं, लेकिन ये समितियां कागजों पर ही संचालित हो रही हैं।
कई स्कूल संचालकों को तो इन समितियों के बारे में जानकारी तक नहीं है। जिले में 597 स्कूली वाहनों के अनफिट मिलने के बाद डीएम माला श्रीवास्तव ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्कूल संचालकों को सात दिन में समितियों का गठन करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। मामले में परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी डीएम ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
गाजियाबाद की घटना के बाद प्रदेश सरकार स्कूली वाहनों के नाम पर हो रही मनमानी के खिलाफ सख्त है। परिवहन आयुक्त के आदेश पर जिले में स्कूली वाहनों की जांच की गई तो 597 वाहनों के फिटनेस ही खत्म मिले।
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तमाम ऐसे स्कूली वाहन हैं जो मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, लेकिन बच्चों को ऐसे वाहनों से ढोया जा रहा है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों की व्यवस्था के लिए विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन के आदेश हैं, लेकिन यह आदेश कागजों तक ही सिमट कर रह गया है।
मनमानी उजागर होने के बाद डीएम ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्कूलों में सात दिन में समितियों के गठन के आदेश दिए हैं। एआरटीओ से समितियों के संबंध में रिपोर्ट भी मांगी है।
एसडीएम, कोतवाल तक समितियों में होंगे शामिल
स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों में स्कूलों का प्राधिकारी अध्यक्ष होता है। सदस्यों में नायब तहसीलदार व उससे बड़ा अधिकारी, थाना या चौकी प्रभारी, एबीएसए, मोटर यान ऑपरेटर के दो प्रतिनिधि, दो अभिभावक शामिल होंगे।
इस समिति की समय-समय पर बैठक होनी चाहिए और स्कूलों के वाहनों के मानकों व कागजातों को दुरुस्त कराना चाहिए। आदेश के बाद भी स्कूलों में इस संबंध में प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है।
स्कूली वाहनों के मानकों को पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों को सक्रिय व गठित कराने के लिए कहा गया है। इस संबंध में एआरटीओ को प्रक्रिया पूरी कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। अनफिट वाहनों से बच्चों को न ढोने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
माला श्रीवास्तव, जिलाधिकारी
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कई स्कूल संचालकों को तो इन समितियों के बारे में जानकारी तक नहीं है। जिले में 597 स्कूली वाहनों के अनफिट मिलने के बाद डीएम माला श्रीवास्तव ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्कूल संचालकों को सात दिन में समितियों का गठन करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। मामले में परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी डीएम ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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गाजियाबाद की घटना के बाद प्रदेश सरकार स्कूली वाहनों के नाम पर हो रही मनमानी के खिलाफ सख्त है। परिवहन आयुक्त के आदेश पर जिले में स्कूली वाहनों की जांच की गई तो 597 वाहनों के फिटनेस ही खत्म मिले।
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तमाम ऐसे स्कूली वाहन हैं जो मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, लेकिन बच्चों को ऐसे वाहनों से ढोया जा रहा है। स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों की व्यवस्था के लिए विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन के आदेश हैं, लेकिन यह आदेश कागजों तक ही सिमट कर रह गया है।
मनमानी उजागर होने के बाद डीएम ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्कूलों में सात दिन में समितियों के गठन के आदेश दिए हैं। एआरटीओ से समितियों के संबंध में रिपोर्ट भी मांगी है।
एसडीएम, कोतवाल तक समितियों में होंगे शामिल
स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों में स्कूलों का प्राधिकारी अध्यक्ष होता है। सदस्यों में नायब तहसीलदार व उससे बड़ा अधिकारी, थाना या चौकी प्रभारी, एबीएसए, मोटर यान ऑपरेटर के दो प्रतिनिधि, दो अभिभावक शामिल होंगे।
इस समिति की समय-समय पर बैठक होनी चाहिए और स्कूलों के वाहनों के मानकों व कागजातों को दुरुस्त कराना चाहिए। आदेश के बाद भी स्कूलों में इस संबंध में प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है।
स्कूली वाहनों के मानकों को पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों को सक्रिय व गठित कराने के लिए कहा गया है। इस संबंध में एआरटीओ को प्रक्रिया पूरी कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। अनफिट वाहनों से बच्चों को न ढोने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
माला श्रीवास्तव, जिलाधिकारी