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चार कमरों में बैठते हैं 430 बच्चे, कैसे हो अच्छी पढ़ाई
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डीह (रायबरेली)। विकास क्षेत्र के अंतर्गत एक विद्यालय में 430 विद्यार्थी हैं पर उनके बैठने के लिए महज चार कमरे हैं। तकरीबन 100 बच्चे प्रति कमरे में कैसे पढ़ाई होगी, यह समझ से परे है। कई बार अतिरिक्त कक्ष की मांग की गई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे अभिभावकों में नाराजगी है।
मामला उच्च प्राथमिक विद्यालय मऊ का है। कक्षा छह से आठ तक के यहां 430 बच्चे नामांकित हैं। प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षक और दो अनुदेशक यहां कार्यरत हैं।
जबकि विद्यालय भवन के नाम पर महज चार कमरे हैं, इतनी कम जगह में बच्चों को पढ़ाई के दौरान बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि नियमानुसार एक कमरे में 40 बच्चों को बैठाने का मानक तय है, लेकिन यहां 100 से अधिक बच्चों को बैठा पाना मुश्किल भरा काम है।
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विद्यालय में बच्चों को बैठाने के लिए जगह कम होने पर अभिभावकों में नाराजगी हैं। वे कहते हैं कि शिक्षा का स्तर बढ़ाने की बात तो की जाती है, लेकिन सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
इतने ज्यादा बच्चे सिर्फ चार कमरों में कैसे बैठकर पढ़ पाएंगे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष बनवाने की बहुत जरूरत है।
प्रधानाध्यापक धीरेंद्र पुरवार ने बताया कि अतिरिक्त कक्षा कक्षों के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। बजट की व्यवस्था हो तो यहां पर कमरे बनवाए जाएं, जिससे बच्चों को बैठने की पर्याप्त जगह मिल सके।
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मामला उच्च प्राथमिक विद्यालय मऊ का है। कक्षा छह से आठ तक के यहां 430 बच्चे नामांकित हैं। प्रधानाध्यापक समेत चार शिक्षक और दो अनुदेशक यहां कार्यरत हैं।
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जबकि विद्यालय भवन के नाम पर महज चार कमरे हैं, इतनी कम जगह में बच्चों को पढ़ाई के दौरान बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि नियमानुसार एक कमरे में 40 बच्चों को बैठाने का मानक तय है, लेकिन यहां 100 से अधिक बच्चों को बैठा पाना मुश्किल भरा काम है।
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विद्यालय में बच्चों को बैठाने के लिए जगह कम होने पर अभिभावकों में नाराजगी हैं। वे कहते हैं कि शिक्षा का स्तर बढ़ाने की बात तो की जाती है, लेकिन सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
इतने ज्यादा बच्चे सिर्फ चार कमरों में कैसे बैठकर पढ़ पाएंगे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष बनवाने की बहुत जरूरत है।
प्रधानाध्यापक धीरेंद्र पुरवार ने बताया कि अतिरिक्त कक्षा कक्षों के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। बजट की व्यवस्था हो तो यहां पर कमरे बनवाए जाएं, जिससे बच्चों को बैठने की पर्याप्त जगह मिल सके।