{"_id":"58518dd34f1c1bdc39649781","slug":"ruckus-timardaron-writing-out-drugs","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाहर से दवाएं लिखने पर तीमारदारों का हंगामा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाहर से दवाएं लिखने पर तीमारदारों का हंगामा
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Wed, 14 Dec 2016 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल में बुधवार को एक रोगी को बाहरी दवाएं लिखने पर तीमारदार भड़क गए। तीमारदारों ने इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। यही नहीं मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर पर कर दी।
पोल खुलने के बाद फार्मासिस्ट ने मेडिकल स्टोर से खरीदकर लाई गई दवाएं गायब कर दीं और मामले को मैनेज करने में जुट गया। मुख्य चिकित्साधीक्षक ने मामले में जांच बैठा दी है। सीएमएस का कहना है कि आरोप सही मिलने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सतांव ब्लॉक क्षेत्र के आशानंदपुर निवासी सूरजदीन (75) को कई दिन से पेट और सीने में दर्द था। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर सूरजदीन का भाई राम आसरे, गांव के ही मिथिलेश कुमार व अन्य परिवारीजनों के साथ उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचा।
विज्ञापन
रोगी के भाई ने बताया कि इमरजेंसी में तैनात एक फार्मासिस्ट ने बाहर की दवाओं की पर्ची परिवारीजनों को पकड़ा दी। परिवारीजन करीब 500 रुपये की दवा मेडिकल स्टोर से खरीद लाए। इसका पता चला तो साथ आए मिथिलेश कुमार ने बाहर से दवा लिखने पर विरोध जताया।
इसे लेकर उससे व फार्मासिस्ट के बीच जमकर कहासुनी शुरू हो गई। मिथिलेश के साथ परिवारीजन भी फार्मासिस्ट का विरोध करने लगे। बात बढ़ने पर परिवारीजनों ने इसकी शिकायत इमरजेंसी की दीवार पर लिखे टोल फ्री नंबर पर कर दी।
उच्चाधिकारियों से शिकायत होने पर फार्मासिस्ट ने बाहर से मंगाई गई दवाएं गायब कर दी और मामले को रफादफा करने में जुट गया। सूचना मिलने पर सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ की। इमरजेंसी में हंगामे की घटना से अन्य रोगियों और तीमारदारों में अफरातफरी का माहौल रहा।
विज्ञापन
पोल खुलने के बाद फार्मासिस्ट ने मेडिकल स्टोर से खरीदकर लाई गई दवाएं गायब कर दीं और मामले को मैनेज करने में जुट गया। मुख्य चिकित्साधीक्षक ने मामले में जांच बैठा दी है। सीएमएस का कहना है कि आरोप सही मिलने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
सतांव ब्लॉक क्षेत्र के आशानंदपुर निवासी सूरजदीन (75) को कई दिन से पेट और सीने में दर्द था। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर सूरजदीन का भाई राम आसरे, गांव के ही मिथिलेश कुमार व अन्य परिवारीजनों के साथ उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचा।
विज्ञापन
रोगी के भाई ने बताया कि इमरजेंसी में तैनात एक फार्मासिस्ट ने बाहर की दवाओं की पर्ची परिवारीजनों को पकड़ा दी। परिवारीजन करीब 500 रुपये की दवा मेडिकल स्टोर से खरीद लाए। इसका पता चला तो साथ आए मिथिलेश कुमार ने बाहर से दवा लिखने पर विरोध जताया।
इसे लेकर उससे व फार्मासिस्ट के बीच जमकर कहासुनी शुरू हो गई। मिथिलेश के साथ परिवारीजन भी फार्मासिस्ट का विरोध करने लगे। बात बढ़ने पर परिवारीजनों ने इसकी शिकायत इमरजेंसी की दीवार पर लिखे टोल फ्री नंबर पर कर दी।
उच्चाधिकारियों से शिकायत होने पर फार्मासिस्ट ने बाहर से मंगाई गई दवाएं गायब कर दी और मामले को रफादफा करने में जुट गया। सूचना मिलने पर सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ की। इमरजेंसी में हंगामे की घटना से अन्य रोगियों और तीमारदारों में अफरातफरी का माहौल रहा।