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Raebareli News: सई नदी का जलस्तर बढ़ने से सतांव क्षेत्र में आवागमन प्रभावित, कई घरों में घुसा पानी
Thu, 08 Oct 2026 01:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:04 AM IST
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सई में बाढ़ आने से मैना हार कटरा गांव को जाने वाले रास्ते पर हुए जलभराव से निकलते बच्चे व ग्राम
सतांव। बछरावां के बाद अब सतांव क्षेत्र में भी सई नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ के हालात बनने लगे हैं। गांव की गलियों में पानी भरने लगा है। प्रभावित परिवारों ने जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है। वहीं, पोरई से बिरवल, पूरे शिवबख्श और नई बिरवल गांव का संपर्क टूट गया है।
बाढ़ से ब्लॉक क्षेत्र के पोरई, बिरवल, पूरे शिवबख्श, पूरे चौहानन, बरदर और आशाराम का पुरवा समेत कई गांव प्रभावित हैं। इन गांवों में पानी भरने लगा है। लोगों को आवागमन प्रभावित हो गया है। पोरई, बिरवल और पूरे शिवबख्श के कुछ घरों में भी जलभराव शुरू हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, सई नदी का पानी तेजी से बढ़ा और खेतों से होते हुए आबादी क्षेत्र तक पहुंच गया है।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वशंराज यादव ने बताया कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो आबादी में जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसकी जानकारी प्रशासन को दे दी गई है। पोरई से बिरवल गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग की स्थिति सबसे खराब है। यह क्षेत्र का प्रमुख मार्ग है, जिससे प्रतिदिन करीब दो हजार लोगों, स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और किसानों का आवागमन होता है। जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है और स्कूली बच्चों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
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200 बीघा धान की फसल डूबी
सई नदी के पानी से किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। करीब 200 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में तैयार धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों से पानी नहीं निकलने पर फसल के खराब होने की आशंका है।
किसान जगतराम, नरेश कुमार, रामप्रसाद, रामफल, दुखी, हसन मोहम्मद, रामस्वरूप प्रजापति और रामदीन पासवान ने बताया कि उनकी धान की फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई है। लेखपाल आंशिका जायसवाल ने बताया कि निचले इलाकों में करीब 200 बीघा फसल डूबी हुई है। नदी का जलस्तर घटने के बाद ही नुकसान का सही आकलन हो सकेगा।
ग्रामीण खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
बछरावां। सई नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के करीब 12 गांवों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। कई घरों में पानी भरने से ग्रामीणों को दूसरे स्थानों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। बरचंदा गांव की स्थिति सबसे अधिक खराब है। पानी से घिरने के कारण गांव टापू जैसा नजर आ रहा है।
सई नदी का जलस्तर घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। इससे बरचंदा, मदाखेड़ा, अघौरा, सुबशखेड़ा, मैना हार और कटरा आदि गांव प्रभावित हैं। बरचंदा निवासी राजू, पिंटू, लखन और मयंक ने बताया कि गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है और कई घरों में पानी भरा है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि जलस्तर घटेगा, लेकिन करीब 10 दिन बीतने के बाद भी पानी कम होने के बजाय बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
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बाढ़ से ब्लॉक क्षेत्र के पोरई, बिरवल, पूरे शिवबख्श, पूरे चौहानन, बरदर और आशाराम का पुरवा समेत कई गांव प्रभावित हैं। इन गांवों में पानी भरने लगा है। लोगों को आवागमन प्रभावित हो गया है। पोरई, बिरवल और पूरे शिवबख्श के कुछ घरों में भी जलभराव शुरू हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, सई नदी का पानी तेजी से बढ़ा और खेतों से होते हुए आबादी क्षेत्र तक पहुंच गया है।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वशंराज यादव ने बताया कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो आबादी में जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसकी जानकारी प्रशासन को दे दी गई है। पोरई से बिरवल गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग की स्थिति सबसे खराब है। यह क्षेत्र का प्रमुख मार्ग है, जिससे प्रतिदिन करीब दो हजार लोगों, स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और किसानों का आवागमन होता है। जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है और स्कूली बच्चों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
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200 बीघा धान की फसल डूबी
सई नदी के पानी से किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। करीब 200 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में तैयार धान की फसल जलमग्न हो गई है। खेतों से पानी नहीं निकलने पर फसल के खराब होने की आशंका है।
किसान जगतराम, नरेश कुमार, रामप्रसाद, रामफल, दुखी, हसन मोहम्मद, रामस्वरूप प्रजापति और रामदीन पासवान ने बताया कि उनकी धान की फसल पूरी तरह प्रभावित हो गई है। लेखपाल आंशिका जायसवाल ने बताया कि निचले इलाकों में करीब 200 बीघा फसल डूबी हुई है। नदी का जलस्तर घटने के बाद ही नुकसान का सही आकलन हो सकेगा।
ग्रामीण खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
बछरावां। सई नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के करीब 12 गांवों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। कई घरों में पानी भरने से ग्रामीणों को दूसरे स्थानों पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। बरचंदा गांव की स्थिति सबसे अधिक खराब है। पानी से घिरने के कारण गांव टापू जैसा नजर आ रहा है।
सई नदी का जलस्तर घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। इससे बरचंदा, मदाखेड़ा, अघौरा, सुबशखेड़ा, मैना हार और कटरा आदि गांव प्रभावित हैं। बरचंदा निवासी राजू, पिंटू, लखन और मयंक ने बताया कि गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है और कई घरों में पानी भरा है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि जलस्तर घटेगा, लेकिन करीब 10 दिन बीतने के बाद भी पानी कम होने के बजाय बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

सई में बाढ़ आने से मैना हार कटरा गांव को जाने वाले रास्ते पर हुए जलभराव से निकलते बच्चे व ग्राम

सई में बाढ़ आने से मैना हार कटरा गांव को जाने वाले रास्ते पर हुए जलभराव से निकलते बच्चे व ग्राम

सई में बाढ़ आने से मैना हार कटरा गांव को जाने वाले रास्ते पर हुए जलभराव से निकलते बच्चे व ग्राम