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प्राइवेट प्रैक्टिस में मालामाल हुए सरकारी डॉक्टर

Sat, 30 Jul 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Sat, 30 Jul 2016 11:44 PM IST
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Rich in private practice, government doctor
चिकित्सक - फोटो : getty images
शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद सरकारी चिकित्सकों का प्राइवेट प्रैक्टिस से मोह भंग नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल के तमाम डॉक्टर तो इसी के चलते मालामाल हो गए हैं। इन्हें न तो आदेशों की चिंता है और न ही कार्रवाई का कोई डर।
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उच्चाधिकारियों के संरक्षण में प्राइवेट प्रैक्टिस का इनका तेजी से फलफूल रहा है। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को निजी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। यदि स्वास्थ्य महकमा सख्त हुआ तो इन चिकित्सकों की आमदनी घट जाएगी।
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सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस न करें, इसलिए शासन की ओर से उन्हें एनपीए (नॉन प्रैक्टिस एलाउंस) दिया जाता है। बावजूद इसके चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस से बाज नहीं आ रहे हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने तो प्राइवेट प्रैक्टिस में निजी चिकित्सकों को भी पीछे छोड़ दिया है।
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कोई अपने बंगले पर मरीज देखता है तो किसी ने क्लीनिक खोल रखी है। कई तो जिला अस्पताल के आसपास ही क्लीनिक चलाते हैं। बावजूद इसके उन पर कार्रवाई नहीं होती। ये हाल तब है जब जिला अस्पताल प्रशासन ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर अंकुश लगाने की कोशिश की।

उनसे प्राइवेट प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र भी लिया, लेकिन प्रशासन की यह कवायद भी फेल हो गई। कुछ चिकित्सक शपथ पत्र देने के बाद भी प्राइवेट प्रैक्टिस से बाज नहीं आ रहे हैं। वहीं कुछ ने तो शपथ पत्र ही नहीं दिया।


जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि सभी चिकित्सकों से प्राइवेट प्रैक्टिस न करने का शपथ पत्र मांगा गया है। कौन प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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