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छह सचिवों के निलंबन की संस्तुति, पांच के खिलाफ आज बैठक
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रायबरेली। एक-एक किसान के नाम 20 से 248 बोरी खाद देने का मामला पीओएस मशीन से पकड़ में आने के बाद साधन सहकारी समितियों के सचिवों और दो निजी खाद दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे के बाद अन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। सहायक निबंधक सहकारिता से छह सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के लिए समितियों की प्रबंध कमेटियों को पत्र भेज दिया है। इसके अलावा कैडर के पांच सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बुधवार को बैठक बुलाई गई है।
अधिकारियों की जांच में पकड़ में आया कि साधन सहकारी समितियों के सचिवों व निजी खाद के दुकानदारों ने एक-एक किसान के नाम पर 20 से 248 बोरी खाद तक बेचा गया है। प्रथम दृष्टया खाद की कालाबाजारी का मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम ने 11 सचिवों समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर के साथ ही सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराने के बाद सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सहायक निबंधक सहकारिता आरएस सेंगर ने बताया कि छह समितियों में सचिवों को तैनात करने और हटाने का अधिकारी समितियों की प्रबंध कमेटियों को है। इसी कारण छह सचिवों के खिलाफ निबंधन की कार्रवाई के लिए समितियों की प्रबंध कमेटियों को पत्र भेजा गया है। कैडर के पांच सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष की कमेटी को निर्णय लेना है। इसके लिए बुधवार को बैठक बुलाई गई है। कार्रवाई के संबंध में बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
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अमूमन दुकानों पर किसानों की अधिक भीड़ होने के कारण समितियों के सचिव और निजी खाद के दुकानदार खाद की बिक्री करने के बाद ही पीओएस मशीन से खाद खारिज करते हैं। कहीं नेटवर्क की समस्या तो कहीं किसानों द्वारा आधार कार्ड न लाने के कारण उनके नाम खाद पीओएस मशीन में खारिज नहीं हो पाती है। पहले भी ऐसे मामले प्रकाश में आए थे, कि दोबारा खाद की उठान करने के लिए दुकानदारों ने एक या दो किसानों के आधार नंबरों पर ही पीओएस मशीन से खाद को खारिज किया है।
पहली बार इस चूक पर सचिवों व दुकानदारों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। हालांकि कार्रवाई को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक समिति के सचिव का कहना है कि किसान आधार कार्ड लेकर नहीं आते हैं। ऊपर से दबाव भी बनाते हैं। कभी-कभी भीड़ अधिक होने के कारण बिना पीओएस मशीन के ही किसानों को खाद दे दी जाती है। बाद में स्टाक को खारिज किया जाता है। इसमें किसी भी स्तर पर कालाबाजारी नहीं की गई है।
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अधिकारियों की जांच में पकड़ में आया कि साधन सहकारी समितियों के सचिवों व निजी खाद के दुकानदारों ने एक-एक किसान के नाम पर 20 से 248 बोरी खाद तक बेचा गया है। प्रथम दृष्टया खाद की कालाबाजारी का मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम ने 11 सचिवों समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर के साथ ही सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराने के बाद सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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सहायक निबंधक सहकारिता आरएस सेंगर ने बताया कि छह समितियों में सचिवों को तैनात करने और हटाने का अधिकारी समितियों की प्रबंध कमेटियों को है। इसी कारण छह सचिवों के खिलाफ निबंधन की कार्रवाई के लिए समितियों की प्रबंध कमेटियों को पत्र भेजा गया है। कैडर के पांच सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष की कमेटी को निर्णय लेना है। इसके लिए बुधवार को बैठक बुलाई गई है। कार्रवाई के संबंध में बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
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अमूमन दुकानों पर किसानों की अधिक भीड़ होने के कारण समितियों के सचिव और निजी खाद के दुकानदार खाद की बिक्री करने के बाद ही पीओएस मशीन से खाद खारिज करते हैं। कहीं नेटवर्क की समस्या तो कहीं किसानों द्वारा आधार कार्ड न लाने के कारण उनके नाम खाद पीओएस मशीन में खारिज नहीं हो पाती है। पहले भी ऐसे मामले प्रकाश में आए थे, कि दोबारा खाद की उठान करने के लिए दुकानदारों ने एक या दो किसानों के आधार नंबरों पर ही पीओएस मशीन से खाद को खारिज किया है।
पहली बार इस चूक पर सचिवों व दुकानदारों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। हालांकि कार्रवाई को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक समिति के सचिव का कहना है कि किसान आधार कार्ड लेकर नहीं आते हैं। ऊपर से दबाव भी बनाते हैं। कभी-कभी भीड़ अधिक होने के कारण बिना पीओएस मशीन के ही किसानों को खाद दे दी जाती है। बाद में स्टाक को खारिज किया जाता है। इसमें किसी भी स्तर पर कालाबाजारी नहीं की गई है।