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रसोइयों को छह महीने से नहीं मिला मानदेय
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रायबरेली। कई महीनों से भुगतान न मिलने से रसोइयों में नाराजगी है। उन्हें अपना परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण रसोइयों ने सोमवार को आल इंडिया सेंट्रल कौंसिल आफ ट्रेड यूनियन (एक्टू) से संबद्ध उत्तर प्रदेश मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर आवाज उठाई। विकास भवन में धरना दिया, फिर जुलूस निकाल कर कलेक्ट्रेट पहुंचकर और प्रदर्शन किया। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
यूनियन की जिलाध्यक्ष सरस्वती ने कहा कि उन्हें डेढ़ हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसके लिए हमेशा बजट का संकट रहता है। पिछले छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। एक तरफ अल्प मानदेय और दूसरी तरफ कई-कई महीने का बकाया होने से काफी दिक्कतें होती हैं। सरकार को हमारे बच्चों की भूख नहीं दिखती है। जिला सचिव विद्यावती ने कहा कि अदालत ने न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने और इसे 2005 से लागू करते हुए एरियर सहित भुगतान करने का आदेश दिया था, किंतु सरकार कुछ भी सुनने की तैयार नहीं है।
एक्टू के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने कहा कि सरकार रसोइया कर्मियों को न्यूनतम वेतन देने एवं उन्हें शिक्षणेत्तर कर्मचारी घोषित करने के बजाए शासनादेश जारी कर नवीनीकरण/चयन के नाम पर बाहर करने की साजिश कर रही है। यह आदेश वापस लेकर रसोइया कर्मियों की 15 वर्षों की सेवाओं को अबाध रूप से जारी रखते हुए न्यूनतम वेतन की गारंटी देनी चाहिए। सुशीला, साधना, सावित्री आदि रसोइयों ने नवीनीकरण का आदेश वापस लेने, बकाया मानदेय दिलाने, न्यूनतम वेतन देने की मांग की।
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यूनियन की जिलाध्यक्ष सरस्वती ने कहा कि उन्हें डेढ़ हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसके लिए हमेशा बजट का संकट रहता है। पिछले छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। एक तरफ अल्प मानदेय और दूसरी तरफ कई-कई महीने का बकाया होने से काफी दिक्कतें होती हैं। सरकार को हमारे बच्चों की भूख नहीं दिखती है। जिला सचिव विद्यावती ने कहा कि अदालत ने न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने और इसे 2005 से लागू करते हुए एरियर सहित भुगतान करने का आदेश दिया था, किंतु सरकार कुछ भी सुनने की तैयार नहीं है।
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एक्टू के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने कहा कि सरकार रसोइया कर्मियों को न्यूनतम वेतन देने एवं उन्हें शिक्षणेत्तर कर्मचारी घोषित करने के बजाए शासनादेश जारी कर नवीनीकरण/चयन के नाम पर बाहर करने की साजिश कर रही है। यह आदेश वापस लेकर रसोइया कर्मियों की 15 वर्षों की सेवाओं को अबाध रूप से जारी रखते हुए न्यूनतम वेतन की गारंटी देनी चाहिए। सुशीला, साधना, सावित्री आदि रसोइयों ने नवीनीकरण का आदेश वापस लेने, बकाया मानदेय दिलाने, न्यूनतम वेतन देने की मांग की।
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