गरीबों के नौनिहालों से ही चल रहे सरकारी स्कूल
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सरकारी वेतन भोगियों के महज 9 फीसदी लाडले ही इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं। 91 फीसदी बच्चे किसानों व मजदूरों के हैं। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की सर्वे रिपोर्ट मेें यह खुलासा हुआ है।
शिक्षा का अधिकार कानून तो लागू किया गया और सर्व शिक्षा अभियान के तहत अधिक से अधिक बच्चों का दाखिला प्राथमिक स्कूलों में कराने का भी प्रयास किया। लेकिन विभाग अपने स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं के बच्चों को भी स्कूल से नहीं जोड़ सका।
जिस स्कूल में शिक्षक तैनात हैं, उस स्कूल में अपने बच्चों का दाखिला न कराकर किसी निजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। एनआईओएस ने जुलाई 2015 से गांवों में रहन-सहन, सामाजिक आर्थिक स्थिति, शिक्षा के अवसर व शैक्षिक प्रगति के बिंदुओं पर सर्वे किया तो जिले में परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था तार-तार मिली।
एनआईओएस को सर्वे में मिला कि शिक्षा सत्र 2014-15 में 29 स्कूलों में एक भी टीचर नहीं हैं। 489 स्कूल एक शिक्षकों के सहारे संचालित हैं, जबकि 270 स्कूल दो शिक्षकों के सहारे हैं। मजदूरी करने वाले 23 प्रतिशत और खेती किसानी करने वाले 68 प्रतिशत किसानों के बच्चों का दाखिला परिषदीय स्कूलों में है।
महज 9 प्रतिशत सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के बच्चे ही परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे हैं। हालांकि यह रिपोर्ट आने के बाद एनआईओएस ने छात्रों तक पहुुंचने के लिए नए विकल्प की अनुसंशा की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एनआईओएस की संस्तुति के बाद परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था में नए शिक्षासत्र में सुधार के प्रयास चल रहे हैं।
100 स्कूलों में फ्लैक्स व कंप्यूटरों के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। तीन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू कराया जा रहा है। पिछले साल ही एक मामले में हाईकोर्ट ने आदेश जारी करके नौकरी पेशा अधिकारियों व कर्मचारियों अपने बच्चों का दाखिला प्राथमिक स्कूलों में कराने का आदेश दिया था।
हालांकि अब हाईकोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया है, लेकिन जिले में आदेश को कोई असर नहीं है। अधिकारी व कर्मचारी अपने लाडलों का दाखिला निजी स्कूलों में ही करा रहे हैं।एनआईओएस की रिपोर्ट में रायबरेली के साथ ही अमेठी जिले की बेसिक शिक्षा की स्थिति भी खराब मिली है।
अमेठी में 54 स्कूल शिक्षक विहीन व 230 स्कूल एक शिक्षकों के सहारे संचालित मिले। 466 स्कूलों में प्रसाधन कक्षों की व्यवस्था नहीं। 64 प्रतिशत बच्चों के अभिभावक मजदूरी करते हैं। इस जिले में भी शिक्षा का स्तर बहुत पीछे है।
बीएसए रामसागर त्रिपाठी ने बताया कि नए शिक्षासत्र में शिक्षा के स्तर और व्यवस्था में सुधार लाया जाएगा। इस बार छात्र संख्या भी बढे़गी और बच्चों को बेहतर शिक्षा भी मिलेगी। एनआईओएस की रिपोर्ट से प्रकाश में आई कमियों को दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है।