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पेयजल किल्लत से जूझ रहे रोगी व तीमारदार
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Sun, 24 Apr 2016 11:41 PM IST
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- फोटो : getty
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गर्मी पूरे शबाब पर है। घर से निकलते ही गला सूखने लगता है। इन हालातों में भी जिले के सरकारी अस्पतालों में पेयजल का संकट रोगियों और तीमारदारों के लिए परेशानी का सबब बना है। बात चाहे जिला अस्पताल की हो या फिर ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की। ज्यादातर जगहों पर हालात एक जैसे हैं।
प्यास बुझाने के लिए लोगों को पानी की तलाश में पसीना बहाना पड़ रहा है। कहीं आरओ खराब पड़े हैं तो कहीं अफसरों ने ताला बंद कर दिया है। कहीं बजट न होने की वजह से पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में जाने वाले हजारों रोगियों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बावजूद इसके विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में लगे आरओ में ताला बंद होने से रोगियों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। यह हाल तब है, जब अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार महिला रोगी इलाज कराने आती हैं।
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यही नहीं यहां भर्ती महिला रोगियों और उनके तीमारदारों को भी पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। मजबूरन उन्हें पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। बंद पड़े आरओ के गेट पर तीमारदार अपने कपड़े सुखाते हैं।
अमावां सीएचसी में प्रतिदिन करीब पांच मरीज आते हैं। इस गर्मी में इस रोगियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। वजह सीएचसी में लगे आरओ प्लांट का खराब होना है। एक इंडिया मार्का हैंडपंप है, लेकिन यह लोगों की प्यास बुझाने में नाकाफी साबित हो रहा है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिलीप कहते हैं कि बजट न होने की वजह से वाटर कूलर बंद हैं। डलमऊ सीएचसी में रोगियों और तीमारदारों के पीने के पानी की व्यवस्था के लिए एक इंडियामार्का हैंडपंप और एक वाटर कूलर लगा है। वाटर कूलर जरूर है, लेकिन वह दिन में महज 10 घंटे की चल पाता है।
शेष समय हैंडपंप के पानी से लोग प्यास बुझाते हैं। अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार का कहना है बिजली आने पर वाटर कूलर चलता है। वैसे तो लगभग हर बार गर्मी में समाजसेवी और विभिन्न संगठन अस्पतालों समेत अन्य स्थानों पर पेयजल के लिए प्याऊ आदि की व्यवस्था करते हैं।
इस बार स्वास्थ्य विभाग तो उदासीन बना है ही, समाजसेवियों और संगठनों ने भी चुप्पी साध रखी है। निराला नगर के सुरेंद्र शुक्ला, इंदिरा नगर के राम कुमार तिवारी, डलमऊ के रमेश दत्त गौड़, हरचंदपुर के कमल तिवारी, सुरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
संगठनों को भी पहल करनी चाहिए, जिससे रोगियों और तीमारदारों को पीने का पानी मिल सके। वहीं सीएमओ डॉ.राकेश कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की अव्यवस्था की जानकारी नहीं है। इसे अपने स्तर से दिखवाऊंगा। सभी सरकारी अस्पतालों में पेयजल की समस्या को दूर किया जाएगा।
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प्यास बुझाने के लिए लोगों को पानी की तलाश में पसीना बहाना पड़ रहा है। कहीं आरओ खराब पड़े हैं तो कहीं अफसरों ने ताला बंद कर दिया है। कहीं बजट न होने की वजह से पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में जाने वाले हजारों रोगियों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बावजूद इसके विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में लगे आरओ में ताला बंद होने से रोगियों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। यह हाल तब है, जब अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार महिला रोगी इलाज कराने आती हैं।
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यही नहीं यहां भर्ती महिला रोगियों और उनके तीमारदारों को भी पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। मजबूरन उन्हें पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। बंद पड़े आरओ के गेट पर तीमारदार अपने कपड़े सुखाते हैं।
अमावां सीएचसी में प्रतिदिन करीब पांच मरीज आते हैं। इस गर्मी में इस रोगियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। वजह सीएचसी में लगे आरओ प्लांट का खराब होना है। एक इंडिया मार्का हैंडपंप है, लेकिन यह लोगों की प्यास बुझाने में नाकाफी साबित हो रहा है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिलीप कहते हैं कि बजट न होने की वजह से वाटर कूलर बंद हैं। डलमऊ सीएचसी में रोगियों और तीमारदारों के पीने के पानी की व्यवस्था के लिए एक इंडियामार्का हैंडपंप और एक वाटर कूलर लगा है। वाटर कूलर जरूर है, लेकिन वह दिन में महज 10 घंटे की चल पाता है।
शेष समय हैंडपंप के पानी से लोग प्यास बुझाते हैं। अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार का कहना है बिजली आने पर वाटर कूलर चलता है। वैसे तो लगभग हर बार गर्मी में समाजसेवी और विभिन्न संगठन अस्पतालों समेत अन्य स्थानों पर पेयजल के लिए प्याऊ आदि की व्यवस्था करते हैं।
इस बार स्वास्थ्य विभाग तो उदासीन बना है ही, समाजसेवियों और संगठनों ने भी चुप्पी साध रखी है। निराला नगर के सुरेंद्र शुक्ला, इंदिरा नगर के राम कुमार तिवारी, डलमऊ के रमेश दत्त गौड़, हरचंदपुर के कमल तिवारी, सुरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
संगठनों को भी पहल करनी चाहिए, जिससे रोगियों और तीमारदारों को पीने का पानी मिल सके। वहीं सीएमओ डॉ.राकेश कुमार का कहना है कि जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की अव्यवस्था की जानकारी नहीं है। इसे अपने स्तर से दिखवाऊंगा। सभी सरकारी अस्पतालों में पेयजल की समस्या को दूर किया जाएगा।