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दो घंटे ओपीडी ठप, परेशान रहे रोगी
रायबरेली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jul 2015 12:07 AM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी सोमवार को ठप होने से दो घंटे तक रोगी इधर-उधर भटकते रहे। दवा काउंटर पर जाते तो वहां कोई दवा देेने वाला नहीं था। खून जांच कराने जाते तो वहां से बैरंग लौटना पड़ा।
दूरदराज से आए रोगी दर्द से कराहते रहे। कुछ तीमारदारों ने तो अपने रोगियों को नर्सिंग होम ले जाकर इलाज कराया। वजह पैरामेडिकल व नर्सों के कार्य बहिष्कार करने के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी रहीं।
नर्सों के काम न करने से वार्ड में भर्ती रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला अस्पताल में सुबह सात बजे से रोगियों का आना-जाना शुरू हो गया। अस्पताल खुला लेकिन ओपीडी में कामकाज ठप था।
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रोगी इधर-उधर पूछते नजर आए। अधिकतर चैंबरों में डॉक्टर नदारद थे। दवा काउंटर, खून जांच समेत अन्य कार्य बंद था। वार्डों में भर्ती रोगियों का इलाज नहीं हो पा रहा था। कुछ रोगी तो इलाज न होने से नर्सिंग होम चले गए।
शिवगढ़ से आए रोगी शमशेर ने बताया कि उसे बुखार था। किसी तरह डॉक्टर ने दवा लिख दी। काउंटर पहुंचा, लेकिन वहां दवा देने के लिए कोई नहीं था। इससे दो घंटे तक परेशानी हुई।
इंदिरा नगर के राहुल, सोनिया नगर के बृजेश कुमार ने बताया कि नाक, कान में दिक्कत थी। डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन दवा पाने के लिए दो घंटे तक इधर-उधर भटकना पड़ा।
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दूरदराज से आए रोगी दर्द से कराहते रहे। कुछ तीमारदारों ने तो अपने रोगियों को नर्सिंग होम ले जाकर इलाज कराया। वजह पैरामेडिकल व नर्सों के कार्य बहिष्कार करने के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी रहीं।
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नर्सों के काम न करने से वार्ड में भर्ती रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला अस्पताल में सुबह सात बजे से रोगियों का आना-जाना शुरू हो गया। अस्पताल खुला लेकिन ओपीडी में कामकाज ठप था।
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रोगी इधर-उधर पूछते नजर आए। अधिकतर चैंबरों में डॉक्टर नदारद थे। दवा काउंटर, खून जांच समेत अन्य कार्य बंद था। वार्डों में भर्ती रोगियों का इलाज नहीं हो पा रहा था। कुछ रोगी तो इलाज न होने से नर्सिंग होम चले गए।
शिवगढ़ से आए रोगी शमशेर ने बताया कि उसे बुखार था। किसी तरह डॉक्टर ने दवा लिख दी। काउंटर पहुंचा, लेकिन वहां दवा देने के लिए कोई नहीं था। इससे दो घंटे तक परेशानी हुई।
इंदिरा नगर के राहुल, सोनिया नगर के बृजेश कुमार ने बताया कि नाक, कान में दिक्कत थी। डॉक्टर ने दवा लिखी, लेकिन दवा पाने के लिए दो घंटे तक इधर-उधर भटकना पड़ा।