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भवन निर्माण में सुस्ती पर चार एक्सईएन व 126 प्रधानों को नोटिस
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रायबरेली। जिले में तीन साल पुराने आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का काम शत-प्रतिशत पूरा नहीं हो सका है। बजट लेने के बाद भी 206 भवनों में बिजली का काम अब तक पूरा न कराने पर सीडीओ प्रभाष कुमार ने बुधवार को चार अधिशासी अभियंताओं और 126 प्रधानों को नोटिस जारी किया है।
सभी को अब तक काम पूरा न कराने के संबंध में तीन दिन में जवाब देने के आदेश दिए हैं। संबंधितों पर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी है।
जिले में वर्ष 2018-19 में 126 आंगनबाड़ी केंद्र के भवन स्वीकृत हुए थे, जिसमें पंचायतों को 90, ग्रामीण अभियंता विभाग को 25 और खंड विकास अधिकारियों को 11 कार्यों के लिए कार्यदायी विभाग बनाकर समय से निर्माण कार्य पूरा कराने के आदेश दिए गए थे।
इसके अलावा वर्ष 2019-20 में 135 भवनों में पंचायतों को 91, आरईडी को 15, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड को 11 और पीडब्ल्यूडी खंड प्रथम व द्वितीय को नौ-नौ कार्य दिए गए थे।
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पिछले साल ही काम पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कार्यदायी विभागों ने मनमानी करते हुए अब तक शत-प्रतिशत काम पूरा नहीं कराया।
सीडीओ ने समीक्षा की तो 206 ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन मिले, जिनमें निर्माण संबंधी काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन बिजली का काम अब तक पूरा नहीं कराया गया।
कार्यदायी विभागों को पिछले साल ही बजट दे दिया गया था, लेकिन अब तक बिजली का काम नहीं कराया गया। मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए सीडीओ ने लोक निमाण विभाग खंड प्रथम, द्वितीय व प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंताओं के साथ ही ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता और डीपीआरओ के माध्यम से 126 प्रधानों को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब देने के आदेश दिए हैं।
जवाब न देने पर भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। संबंधितों से मामले में वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। सीडीओ के गंभीर होने के बाद मनमानी करने वाले इंजीनियरों और कार्यदायी विभागों में हड़कंप मच गया है।
प्रत्येक भवन के निर्माण 7.52 लाख दिए गए
जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए तीन विभागों ने 7.52 लाख रुपये दिए गए। इसमें मनरेगा से 4.46 लाख, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से दो लाख और पंचायतीराज विभगा से 1.06 लाख रुपये दिए गए। प्रत्येक भवन के निर्माण के लिए पहले ही कार्यदायी विभागों को 7.52 लाख रुपये दिए जा चुके हैं।
आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का काम पूरा कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन 206 भवनों के निर्माण के बाद भवनों में विद्युतीकरण का काम नहीं कराया गया, जबकि बजट पहले ही दिया जा चुका है। संबंधितों को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रभाष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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सभी को अब तक काम पूरा न कराने के संबंध में तीन दिन में जवाब देने के आदेश दिए हैं। संबंधितों पर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी है।
जिले में वर्ष 2018-19 में 126 आंगनबाड़ी केंद्र के भवन स्वीकृत हुए थे, जिसमें पंचायतों को 90, ग्रामीण अभियंता विभाग को 25 और खंड विकास अधिकारियों को 11 कार्यों के लिए कार्यदायी विभाग बनाकर समय से निर्माण कार्य पूरा कराने के आदेश दिए गए थे।
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इसके अलावा वर्ष 2019-20 में 135 भवनों में पंचायतों को 91, आरईडी को 15, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड को 11 और पीडब्ल्यूडी खंड प्रथम व द्वितीय को नौ-नौ कार्य दिए गए थे।
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पिछले साल ही काम पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कार्यदायी विभागों ने मनमानी करते हुए अब तक शत-प्रतिशत काम पूरा नहीं कराया।
सीडीओ ने समीक्षा की तो 206 ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन मिले, जिनमें निर्माण संबंधी काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन बिजली का काम अब तक पूरा नहीं कराया गया।
कार्यदायी विभागों को पिछले साल ही बजट दे दिया गया था, लेकिन अब तक बिजली का काम नहीं कराया गया। मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए सीडीओ ने लोक निमाण विभाग खंड प्रथम, द्वितीय व प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंताओं के साथ ही ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता और डीपीआरओ के माध्यम से 126 प्रधानों को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब देने के आदेश दिए हैं।
जवाब न देने पर भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। संबंधितों से मामले में वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। सीडीओ के गंभीर होने के बाद मनमानी करने वाले इंजीनियरों और कार्यदायी विभागों में हड़कंप मच गया है।
प्रत्येक भवन के निर्माण 7.52 लाख दिए गए
जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए तीन विभागों ने 7.52 लाख रुपये दिए गए। इसमें मनरेगा से 4.46 लाख, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से दो लाख और पंचायतीराज विभगा से 1.06 लाख रुपये दिए गए। प्रत्येक भवन के निर्माण के लिए पहले ही कार्यदायी विभागों को 7.52 लाख रुपये दिए जा चुके हैं।
आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का काम पूरा कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन 206 भवनों के निर्माण के बाद भवनों में विद्युतीकरण का काम नहीं कराया गया, जबकि बजट पहले ही दिया जा चुका है। संबंधितों को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रभाष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी