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अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं हुई वोटिंग

Sat, 15 Apr 2017 11:44 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Sat, 15 Apr 2017 11:44 PM IST
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No Voting on confidence motion
रायबरेली में शनिवार को प्रदर्शन करते जिला पंचायत सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने को लेकर शनिवार को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं हो सकी। बिना वोट डाले ही 25 डीडीसी सदस्य सदन का बहिष्कार करते हुए लौट गए। इस दौरान न सिर्फ जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए गए, बल्कि उन पर साथी डीडीसी सदस्यों का अपहरण किए जाने का आरोप लगाया।
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डीडीसी सदस्यों में फूटन साफ नजर आई, जिसका नतीजा रहा कि अविश्वास प्रस्ताव सौंपने वाले सभी सदस्य वोटिंग करने ही नहीं पहुंचे। इससे फिलहाल अवधेश सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बने रहेंगे। वोटिंग न होने की तस्वीर साफ होने पर जिला प्रशासन के अफसरों ने शासन को पूरी रिपोर्ट भेज दी है।
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जिला जज की ओर से नामित अपर जिला जज विजेश कुमार, सीडीओ हरीराम, उप जिला निर्वाचन अधिकारी शत्रोहन वैश्य की मौजूदगी में जिला पंचायत सभागार में शनिवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया शुरू कराई गई।
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एक के बाद एक डीडीसी सदस्य जिला पंचायत सभागार पहुंचते रहे। वैसे तो डीएम को 32 जिला पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन शनिवार को 25 डीडीसी सदस्य ही जिला पंचायत सभागार पहुंचे।

बैठक कर चर्चा करने का कोरम तो पूरा हो गया, लेकिन वोटिंग के लिए 27 सदस्य होने जरूरी थे, लेकिन बैठक होने तक केवल वहां 25 डीडीसी सदस्य ही मौजूद रहे। इसके बाद वहां मौजूद रहे सदस्यों ने सदन का बहिष्कार कर दिया।

डीडीसी सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए लौट गए। आरोप लगाया कि जिला पंचायत अध्यक्ष की ओर से डीडीसी सदस्यों का अपहरण कर लिया गया है। इसलिए और सदस्य नहीं आ सके। 

जिला पंचायत के कुल 52 सदस्यों में 27 डीडीसी सदस्य जिला पंचायत सभागार नहीं पहुंचे। ऐसे में अवधेश सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहेंगे। इसको लेकर दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। खाकी की कड़ी किलेबंदी रही।

कई थानों की फोर्स के अलावा एएसपी वीरेंद्र यादव डटे रहे। उप जिला निर्वाचन अधिकारी शत्रोहन वैश्य ने बताया कि बार-बार कहने के बावजूद अविश्वास प्रस्ताव पर किसी डीडीसी सदस्य ने वोटिंग नहीं की। इस वजह से अविश्वास पर मतदान प्रक्रिया नहीं हो सकी।

इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। फिलहाल मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे। जिला पंचायत सभागार में एक के बाद एक डीडीसी सदस्यों के पहुंचने का सिलसिला लगा रहा।

इसमें प्रभात साहू, चंद्रराज पटेल, अनुज सिंह, रामलौटन, राजेंद्र, प्रतिमा सिंह, रानी, दयावती, कमला, विनय, रामबरन पासी, दिनेश सिंह, राकेश कुमार, मो. इस्माइल, मो. मोईद, किशनलाल लोधी, वीरेंद्र यादव, शेर बहादुर, निर्मला देवी, कुमोदनी देवी, अमृता सिंह, गीता, अमरेंद्र यादव, कर्मा देवी, अमित कुमार सभागार पहुंचे, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के बजाय बहिष्कार करके वापस लौट गए।

प्रभात साहू के खेमे के डीडीसी सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए जिला पंचायत सभागार तो पहुंचे, लेकिन दूसरे खेमे के डीडीसी सदस्य वहां पर नहीं पहुंचे। चर्चा थी कि दूसरा खेमा इसलिए डीडीसी सदस्यों को लेकर वहां पर नहीं पहुंचा था कि कहीं वोटिंग करने में उनके साथ उनके ही डीडीसी सदस्य न धोखा दे दें।

नतीजतन उन्होंने वहां जाना उचित नहीं समझा। प्रभात साहू के खेमे ने हार के डर से वोटिंग न करके बहिष्कार करना ही उचित समझा। महिला डीडीसी सदस्य सुनीता पटेल के अपहरण का आरोप लगाया गया। इस पर उसकी पुलिस ने खोजबीन शुरू की, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

बताते हैं कि सुनीता के जिला पंचायत सभागार न पहुंचने पर उसके पति परमेश पटेल को अधिकारियों के सामने अन्य डीडीसी सदस्य लेकर पहुंचे थे। अधिकारियों ने जब उसकी पत्नी के अपहरण की बात पूछी की गई तो उसने यह कहते हुए सबको हैरत में डाल दिया कि उसका स्वयं अपहरण कर लिया गया था।

इस पर अधिकारियों ने परमेश को ले जाकर उसकी पत्नी की खोजबीन कराने के निर्देश दिए। इसी तरह सरेनी की जिला पंचायत सदस्य गीता साहू के भी अपहरण का आरोप लगाया गया। साथी डीडीसी सदस्य प्रभात साहू ने इसकी शिकायत एसपी व अन्य अधिकारियों से की।   

एक बार फिर अपनों ने ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने में नैया डुबाो दी। अविश्वास प्रस्ताव सौंपने के दौरान 32 डीडीसी सदस्य पहुंचे थे, लेकिन शनिवार को इनकी संख्या महज 25 थी। यह कोई पहला मौका नहीं था। इससे पहले भी डीडीसी सदस्यों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया था।

प्रभात साहू की अगुवाई में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ा गया था। उन्हें जीत हासिल नहीं हो पाई थी। उनके करीबी डीडीसी सदस्यों ने ही उन्हें धोखा दिया था। सूबे का निजाम बदलने पर एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, लेकिन एक बार फिर अपनों ने ही ठेंगा दिखा दिया।

डीडीसी सदस्य प्रभात साहू ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष की ओर से डीडीसी सदस्यों का अपहरण किया गया। जब उन्हें जिला पंचायत सभागार जाने से रोका गया। उन्होंने कहा कि डीडीसी सदस्यों के मान सम्मान और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

वे कभी अपने पैर नहीं खींचेंगे। 25 डीडीसी सदस्य पहुंच गए थे। अन्य डीडीसी सदस्यों को न रोका जाता तो तस्वीर कुछ और होती। उन्होंने कहा कि कुछ डीडीसी सदस्योेें ने भी धोखा दिया, जिसकी वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी में बदलाव नहीं हो सका।

जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बचाने में सपा का बड़ा योगदान रहा है। पूर्व सीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा के डीडीसी सदस्यों ने सदन का बहिष्कार किया। जगतपुर प्रथम के जिला पंचायत सदस्य राधेश्याम पासी, रामसेवक वर्मा ने बताया कि गठबंधन धर्म निभाने का निर्देश दिया गया था, जिसका पालन किया गया।

सपा जिलाध्यक्ष राम बहादुर यादव ने कहा कि गठबंधन धर्म निभाकर कांग्रेस की नैय्या बचाई गई। उधर, सांसद प्रतिनिधि केएल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस और सपा के प्रयास से अध्यक्ष की कुर्सी बच गई।

जिला पंचायत की गहमागहमी के बाद सिविल लाइंस स्थित अपने आवास में कांग्रेस एमएलसी दिनेश सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस में या तो सांसद प्रतिनिधि केएल शर्मा रहेंगे या फिर वे खुद रहेंगे।


एमएलसी जिला पंचायत को लेकर कांग्रेस के असहयोग से काफी खफा दिखे। उन्होंने कुर्सी बचाने के लिए जिला पंचायत सदस्यों का आभार जताया। जिस तरह एमएलसी ने कांग्रेस को लेकर तीखे शब्दबाण चलाए हैं उससे माना जा रहा है कि उनकी नजर किसी और दल की ओर है।
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