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मनरेगा में पांच साल से 1.49 करोड़ का भुगतान नहीं

Sun, 15 Mar 2020 12:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 12:12 AM IST
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रायबरेली। मनरेगा से जुड़े अधिकारियों की मनमानी के कारण योजना पूरी तरह से धड़ाम हो रही है। मनमानी का ही नतीजा है कि करीब डेढ़ करोड़ का भुगतान पिछले पांच साल से फंसा हुआ है। शासन स्तर पर मामला पकड़ में आने के बाद संबंधित अधिकारियों को भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। बताते हैं कि एक बार एफटीओ रिजेक्ट होने के बाद दोबारा भुगतान की प्रक्रिया नहीं की गई जिसके कारण लंबित श्रम व सामग्री का भुगतान प्रभावित हो गया है।
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मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों को हरहाल में 15 दिन में भुगतान करने के आदेश हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण श्रमिकों को मजदूरी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इसी का नतीजा है कि गांवों में लोग मनरेगा में काम करने को राजी नहीं हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में मनरेगा की प्रगति पूरी तरह से खराब हो गई है।
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शासन स्तर पर समीक्षा हुई तो पिछले पांच वर्षों में 1.49 करोड़ रुपये की मजदूरी व सामग्री का भुगतान लंबित पाया गया। मामले में डीसी मनरेगा को भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराकर लंबित भुगतान को खत्म कराने के आदेश दिए गए हैं।
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उपायुक्त मनरेगा पीके सिंह ने बताया कि एफटीओ के माध्यम से मनरेगा में मजदूरी व सामग्री का ऑनलाइन भुगतान किया जाता है। कुछ समस्याओं के कारण भुगतान न होने पर दोबारा एफटीओ बनाकर भुगतान कराया जाता है। पूर्व में जो भी भुगतान बचा होगा, उसका भुगतान जल्द ही कराया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में काफी भुगतान लंबित है।
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