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Raebareli News: महिलाओं के जिम्मे 980 सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव, हाईकोर्ट ने जताया आश्चर्य
Sat, 03 May 2025 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
Updated Sat, 03 May 2025 12:47 AM IST
सार
रायबरेली में 980 सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव महिलाओं के जिम्मे है। इसको लेकर डाली गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया है।
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मधुकरपुर गांव में बना सामुदायिक शौचालय।
- फोटो : संवाद
विस्तार
यूपी के रायबरेली में स्वच्छ भारत मिशन के तहत महाराजगंज क्षेत्र के गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव का मामला गरमा गया है। जिले के 980 महिला व पुरुष सामुदायिक शौचालयों का रखरखाव महिलाओं के जिम्मे है। इस पर हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया है। ज्योना गांव निवासी व्यक्ति की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले में डीपीआरओ ने रिट याचिका को मंगवाने के बाद मार्गदर्शन के लिए निदेशालय भेजा है।
शासन की मंशा पर जिले की सभी 980 ग्राम पंचायतों में पुरुष व महिलाओं के लिए एक-एक सामुदायिक शौचालय बनवाया गया है। सभी सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। रखरखाव का काम देख रही महिलाओं को छह-छह हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए समान खरीदने के लिए अलग से तीन-तीन हजार रुपये भी दिए जाते हैं। यह सारा भुगतान ग्राम पंचायतों के स्तर से किया जाता है।
महराजगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत ज्योना के निवासी जमुना प्रसाद ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें बताया कि सामुदायिक शौचालय में ताला लगा रहता है। साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है। महिला के साथ ही पुरुषों के लिए बने शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी महिलाओं को ही दी गई है। हाईकोर्ट ने पुरुष शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी महिलाओं को देने पर नाराजगी जताते हुए पूरा ब्योरा तलब किया है।
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शासन की मंशा पर जिले की सभी 980 ग्राम पंचायतों में पुरुष व महिलाओं के लिए एक-एक सामुदायिक शौचालय बनवाया गया है। सभी सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। रखरखाव का काम देख रही महिलाओं को छह-छह हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए समान खरीदने के लिए अलग से तीन-तीन हजार रुपये भी दिए जाते हैं। यह सारा भुगतान ग्राम पंचायतों के स्तर से किया जाता है।
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महराजगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत ज्योना के निवासी जमुना प्रसाद ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें बताया कि सामुदायिक शौचालय में ताला लगा रहता है। साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है। महिला के साथ ही पुरुषों के लिए बने शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी महिलाओं को ही दी गई है। हाईकोर्ट ने पुरुष शौचालयों के रखरखाव की जिम्मेदारी महिलाओं को देने पर नाराजगी जताते हुए पूरा ब्योरा तलब किया है।
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