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Raebareli News: भीमेश्वर से भंवरेश्वर बन गए बाबा भोलेनाथ, तीन जिलों की सीमा पर सई नदी किनारे स्थित है मंदिर
Tue, 25 Feb 2025 01:33 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Tue, 25 Feb 2025 01:33 PM IST
सार
रायबरेली में बाबा भोलेनाथ भीमेश्वर से भंवरेश्वर महादेव बन गए। तीन जिलों की सीमा पर सई नदी किनारे मंदिर स्थित है।
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भंवरेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : संवाद
विस्तार
यूपी के रायबरेली में लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की सीमा पर सई नदी किनारे स्थित भंवरेश्वर मंदिर शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रत्येक सोमवार तथा सावन माह और शिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापरयुग में पांडव जब कौरवों के साथ चौसर में हार गए। उन्हें 12 वर्ष का वनवास व एक वर्ष का अज्ञातवास भुगतना पड़ा था। भ्रमण के दौरान पांडव सई नदी के किनारे इस क्षेत्र में पहुंचे थे।
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इस दौरान द्रौपदी शिव की पूजा किए बिना जल ग्रहण नहीं करती थीं। इस पर भीम ने सई नदी से मिलने वाले गंडे को जमीन में स्थापित कर शिवलिंग का रूप दिया था। इसी कारण मंदिर का नाम भीमेश्वर पड़ गया। समय बीता और शिवलिंग जमीन के भीतर समाहित हो गया।
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15वीं शताब्दी में एक दिन एक चरवाहे की गाय इसी स्थान पर दूध देती थी। इस पर जगह की खोदाई की गई और शिवलिंग को जमीन से निकाला गया। इसी बीच कुर्सी सुदौली की तत्कालीन महारानी को स्वप्न में मंदिर निर्माण का आभास होता है और भीमेश्वर मंदिर की स्थापना होती है।
इसके बाद इसकी जानकारी जब मुगल सम्राट औरंगजेब को होती है तो वह मंदिर को तोड़ने का आदेश देता है। इस पर मुगल सैनिक शिवलिंग को जड़ से खोदने में जुटते हैं लेकिन ओर छोर नहीं मिलता है तो शिवलिंग में जंजीरे बंधवा कर हाथियों से खिंचवाने का आदेश दिया जाता है, लेकिन शिवलिंग को सैनिक हिला नहीं पाते हैं।
इसी दौरान करोड़ों की संख्या में भंवरे मुगल सेना पर हमला कर देते हैं और सेना को जान बचाकर भागना पड़ता है। इस घटना के बाद से मंदिर का नाम भंवरेश्वर महादेव पड़ता है।
पुजारी सुनील बाबा पुजारी मुगल सेना के जाने के बाद मंदिर की फिर से मरम्मत होती है। सैकड़ों साल पुराना यह मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा कटा हुआ है। इसके पीछे की कहानी यह है कि जब शिवलिंग को निकालने के लिए जमीन की खोदाई हो रही थी तो फावड़ा लगने से ऊपर का हिस्सा कटकर अलग हो जाता है। उस हिस्से से खून बहने लगा था। जब माफी मांगी जाती है तो खून रिसना बंद हो जाता है। शिवलिंग के उत्तर मैं नंदेश्वर तथा बजरंगबली की मूर्ति स्थापित हैं।