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एक शिफ्ट में एक स्टाफ नर्स के भरोसे 34 बच्चों की सेहत
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रायबरेली। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। एक शिफ्ट में एक स्टाफ नर्स के भरोसे 34 बच्चों की सेहत संभालने का जिम्मा है। यह हाल तब है, जब मौसम में बदलाव की वजह से बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
इसका खामियाजा तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। व्यवस्था में सुधार न होने पर कई लोग अपने बच्चों को निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा रहे हैं।
अमर उजाला टीम ने रविवार को चिल्ड्रेन वार्ड की पड़ताल की तो लापरवाही दिखी। वार्ड में कुल 34 बच्चे भर्ती मिले, जिसमें से करीब 15 बुखार से पीड़ित रहे।
साफ-सफाई ठीक तरीके से नहीं की गई थी। सांस लेना मुश्किल हो रहा था। स्टाफ कक्ष में पहुंचने के दौरान एक तीमारदार चादर मांगने गई तो स्टाफ नर्स ने जवाब दिया कि पुराने चादर से काम चलाओ। नया चादर नहीं मिलेगा।
इस पर तीमारदार वहां से चला गया। नाम न छापने की शर्त पर मौजूद स्टाफ नर्स ने बताया कि एक शिफ्ट में एक ही नर्स की ड्यूटी रहती है।
बच्चों की संख्या अधिक रहती हैै, जबकि एक स्टाफ नर्स को बच्चों की देखभाल करनी पड़ती है। फिर भी बच्चों का बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जाता है। वहीं एक महज चिकित्सक की तैनाती है।
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वार्ड में टहल रहे कुत्ते, नहीं देते ध्यान
चिल्ड्रेन वार्ड में बदइंतजामी का हाल ये है कि वार्ड में कुत्ते घूमते हैैं। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है। इस वजह से बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
बर्बाद हो रहा था ग्लूकोज
चिल्ड्रेन वार्ड के स्टाफ कक्ष में एक लोहे की पाइप पर ग्लूकोज की बोतल लगी थी। ग्लूकोज जमीन पर टपक रहा था। जो ग्लूकोज बच्चों को चढ़ाने के लिए दिया जाता है, उसे बर्बाद किया जा रहा था। इस पर किसी का ध्यान नहीं दिया गया। अमर उजाला की टीम के पहुंचने के बाद हड़कंप मचा रहा।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चों की देखभाल और बेहतर इलाज के लिए प्रभारी समेत छह स्टाफ नर्सों की तैनाती है। शिफ्ट में सभी की ड्यूटी लगाई जाती है। एक चिकित्सक की भी तैनाती है। बच्चों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। कहीं पर कोई दिक्कत नहीं आ रही है। यदि कोई खामी है तो उसे दूर किया जाएगा।
डॉ.एनके श्रीवास्तव, सीएमएस
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इसका खामियाजा तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। व्यवस्था में सुधार न होने पर कई लोग अपने बच्चों को निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा रहे हैं।
अमर उजाला टीम ने रविवार को चिल्ड्रेन वार्ड की पड़ताल की तो लापरवाही दिखी। वार्ड में कुल 34 बच्चे भर्ती मिले, जिसमें से करीब 15 बुखार से पीड़ित रहे।
साफ-सफाई ठीक तरीके से नहीं की गई थी। सांस लेना मुश्किल हो रहा था। स्टाफ कक्ष में पहुंचने के दौरान एक तीमारदार चादर मांगने गई तो स्टाफ नर्स ने जवाब दिया कि पुराने चादर से काम चलाओ। नया चादर नहीं मिलेगा।
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इस पर तीमारदार वहां से चला गया। नाम न छापने की शर्त पर मौजूद स्टाफ नर्स ने बताया कि एक शिफ्ट में एक ही नर्स की ड्यूटी रहती है।
बच्चों की संख्या अधिक रहती हैै, जबकि एक स्टाफ नर्स को बच्चों की देखभाल करनी पड़ती है। फिर भी बच्चों का बेहतर इलाज करने का प्रयास किया जाता है। वहीं एक महज चिकित्सक की तैनाती है।
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वार्ड में टहल रहे कुत्ते, नहीं देते ध्यान
चिल्ड्रेन वार्ड में बदइंतजामी का हाल ये है कि वार्ड में कुत्ते घूमते हैैं। इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है। इस वजह से बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
बर्बाद हो रहा था ग्लूकोज
चिल्ड्रेन वार्ड के स्टाफ कक्ष में एक लोहे की पाइप पर ग्लूकोज की बोतल लगी थी। ग्लूकोज जमीन पर टपक रहा था। जो ग्लूकोज बच्चों को चढ़ाने के लिए दिया जाता है, उसे बर्बाद किया जा रहा था। इस पर किसी का ध्यान नहीं दिया गया। अमर उजाला की टीम के पहुंचने के बाद हड़कंप मचा रहा।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चों की देखभाल और बेहतर इलाज के लिए प्रभारी समेत छह स्टाफ नर्सों की तैनाती है। शिफ्ट में सभी की ड्यूटी लगाई जाती है। एक चिकित्सक की भी तैनाती है। बच्चों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। कहीं पर कोई दिक्कत नहीं आ रही है। यदि कोई खामी है तो उसे दूर किया जाएगा।
डॉ.एनके श्रीवास्तव, सीएमएस