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आखिर कैसे रचेगी बेटियों के हाथों में मेहंदी
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Tue, 29 Mar 2016 11:55 PM IST
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अल्पसंख्यक गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में अड़चन न आये। इसके लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। यही नहीं शादी अनुदान योजना में धनराशि भी तीन गुना करने की घोषणा कर दी गई है। वहीं गरीब अल्पसंख्यक परिवारों को आज भी तंगहाली में बेटियों का विवाह करना पड़ता है।
जानकारी के अभाव में कुछ सीमित लोगों को ही योजना का लाभ मिल पा रहा है। ऐसे में गरीब परिवार की बेटियों के विवाह में आर्थिक समस्या जस की तस बनी हुई है। जिला अल्पसंख्यक विभाग की ओर से गरीब अल्पसंख्यक परिवार की बेटियों के लिए शादी अनुदान योजना चलायी जा रही है।
इसके तहत विवाह के लिए उन्हें 10 हजार रुपये आर्थिक लाभ दिए जाने का प्रावधान है। योजना का प्रचार-प्रसार नहीं हो पाने के कारण इसका लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते महत्वपूर्ण योजना कुछ ही लोगों तक सिमट कर रही गई है।
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वर्ष 2015-16 में बमुश्किल से 130 परिवारों को ही योजना का लाभ मिल सका है। विभाग की ओर से लोगों तक सरकार की योजना पहुंचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि आज भी ग्रामीण अंचलों में आर्थिक तंगी के बीच गरीब अल्पसंख्यक परिवार बेटियों का विवाह करने को विवश हो रहे हैं।
पात्रों के लिए वर्तमान में शहरी क्षेत्र में 25,540 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 19,884 रुपये वार्षिक आय निर्धारित की गई है। योजना का लाभ पाने के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में आवेदन करना होगा। विभाग की ओर से प्रपत्रों की जांच करायी जाती है कि वे मानक के अनुरूप हैं अथवा नहीं। उसके बाद विभाग शासन से धन की मांग करता है।
मियां टोला के साबित अली कहते है कि योजना की कोई जानकारी ही नहीं है। पहली बेटी का विवाह कर चुके हैं। अब दूसरे की तैयारी तंगी के बीच किसी तरह कर रहे हैं। चौहट्टा के अहमद हुसैन का कहना है कि बेटी का विवाह करना है।
सरकार की इस योजना के विषय में कोई जानकारी नहीं है। इसी तरह कजियाना के मो. शब्बीर का कहना है कि योजना तो दफ्तर तक ही सिमट कर रही गई। किसी तरह उधार लेकर तैयारी कर रहे हैं। इस योजना को पाने के लिए सबसे ज्यादा हेराफेरी आय प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर होता है।
अपात्र व्यक्ति प्रभाव और पहुंच का इस्तेमाल करके कम आय के प्रमाणपत्र हासिल कर लेते हैं। वहीं पात्र इसके लिए कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर ही काटते रहते है। जांच के दौरान कार्यालय में अपात्र सांठगांठ करके योजना का लाभ उठा लेते है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुनीता देवी का कहना है कि आवेदन पत्रों को जांच कराने के बाद ही लाभ दिया जाता है। लाभ पात्रों को मिले इसके लिए कई बार जांच में देरी हो जाती है। योजना का समय-समय पर प्रचार-प्रसार कराया जाता है।
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जानकारी के अभाव में कुछ सीमित लोगों को ही योजना का लाभ मिल पा रहा है। ऐसे में गरीब परिवार की बेटियों के विवाह में आर्थिक समस्या जस की तस बनी हुई है। जिला अल्पसंख्यक विभाग की ओर से गरीब अल्पसंख्यक परिवार की बेटियों के लिए शादी अनुदान योजना चलायी जा रही है।
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इसके तहत विवाह के लिए उन्हें 10 हजार रुपये आर्थिक लाभ दिए जाने का प्रावधान है। योजना का प्रचार-प्रसार नहीं हो पाने के कारण इसका लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते महत्वपूर्ण योजना कुछ ही लोगों तक सिमट कर रही गई है।
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वर्ष 2015-16 में बमुश्किल से 130 परिवारों को ही योजना का लाभ मिल सका है। विभाग की ओर से लोगों तक सरकार की योजना पहुंचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि आज भी ग्रामीण अंचलों में आर्थिक तंगी के बीच गरीब अल्पसंख्यक परिवार बेटियों का विवाह करने को विवश हो रहे हैं।
पात्रों के लिए वर्तमान में शहरी क्षेत्र में 25,540 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 19,884 रुपये वार्षिक आय निर्धारित की गई है। योजना का लाभ पाने के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में आवेदन करना होगा। विभाग की ओर से प्रपत्रों की जांच करायी जाती है कि वे मानक के अनुरूप हैं अथवा नहीं। उसके बाद विभाग शासन से धन की मांग करता है।
मियां टोला के साबित अली कहते है कि योजना की कोई जानकारी ही नहीं है। पहली बेटी का विवाह कर चुके हैं। अब दूसरे की तैयारी तंगी के बीच किसी तरह कर रहे हैं। चौहट्टा के अहमद हुसैन का कहना है कि बेटी का विवाह करना है।
सरकार की इस योजना के विषय में कोई जानकारी नहीं है। इसी तरह कजियाना के मो. शब्बीर का कहना है कि योजना तो दफ्तर तक ही सिमट कर रही गई। किसी तरह उधार लेकर तैयारी कर रहे हैं। इस योजना को पाने के लिए सबसे ज्यादा हेराफेरी आय प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर होता है।
अपात्र व्यक्ति प्रभाव और पहुंच का इस्तेमाल करके कम आय के प्रमाणपत्र हासिल कर लेते हैं। वहीं पात्र इसके लिए कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर ही काटते रहते है। जांच के दौरान कार्यालय में अपात्र सांठगांठ करके योजना का लाभ उठा लेते है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुनीता देवी का कहना है कि आवेदन पत्रों को जांच कराने के बाद ही लाभ दिया जाता है। लाभ पात्रों को मिले इसके लिए कई बार जांच में देरी हो जाती है। योजना का समय-समय पर प्रचार-प्रसार कराया जाता है।