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मांगें 300 करोड़, दो माह में नहीं मिल पाई फूटी कौड़ी

Sun, 03 Jul 2022 09:21 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 09:21 PM IST
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रोजाना गुजरते 10 हजार वाहन
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गदागंज। ऊंचाहार-डलमऊ राजमार्ग गड्ढों में तब्दील है। इस मार्ग से प्रतिदिन 10 हजार लोग गुजरते हैं, जो अक्सर गिरकर चोटिल होते हैं। गदागंज कस्बे में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिसमें आए दिन लोग गिरकर चोटिल होते हैं। यह मार्ग उन्नाव और प्रयारागज हाईवे को जोड़ता है। इससे दिन रात भारी वाहनों का आवागमन रहता है। बदहाल राजमार्ग को ठीक नहीं कराया जा रहा है।
बारिश में तालाब बन जाता दहिगवां संपर्क मार्ग
शिवगढ़। ब्लॉक क्षेत्र में बांदा-बहराइच राजमार्ग से निकला दहिगवां मार्ग जर्जर है। गड्ढों में तब्दील यह मार्ग बरसात में तालाब बन जाता है। इससे निकलने में लोगों को परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत विद्यार्थियों को होती है, जो गिरते पड़ते स्कूल पहुंचते हैं। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने पैच मरम्मत के नाम पर महज खानापूर्ति कराई। लोगों ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
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सड़क से गायब हो गया डामर
हरचंदपुर। ब्लॉक क्षेत्र के पहराखेड़ा संपर्क मार्ग का डामर उखड़कर पूरी तरह से गायब हो गया है। गिट्टियां निकलकर बाहर आ गई है। इस मार्ग से हुलासखेड़ा, मनऊ खेड़ा, लुकुआ खेड़ा समेत अन्य गांव के ग्रामीण आते-जाते हैं। मार्ग बदहाल होने के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी जान कर भी अनजान बने हुए हैं।
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टेकारी दांदू मार्ग ध्वस्त, लोगों में नाराजगी
डीह। ब्लॉक क्षेत्र में डीह से टेकारी दांदू जाने वाले पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। पांच किलोमीटर इस मार्ग से मझिलहा, टेकारी सहन, बतौरा समेत 10 गांवों के लोग आते-जाते हैं। जगह-जगह सड़क उखड़ गई है। इलाकाई लोगों ने बताया कि इस सड़क को ठीक कराने के लिए कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
रायबरेली। जिले की सड़कों को दुरुस्त कराने में किस तरह करोड़ों रुपये का वारा न्यारा होता है, यह दिखाने के लिए यह चार केस एक बानगी भर हैं। ऐसे ही करीब 500 से ज्यादा सड़कें जो चलने लायक नहीं हैं। लोक निर्माण विभाग के अफसरों का दावा है कि बजट के अभाव में सड़कें ठीक नहीं हो पा रही है।
जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। हर विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए दो महीने पहले क्षेत्रीय विधायकों की संस्तुति पर हर विधानसभा क्षेत्र से 50-50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
यानि 300 करोड़ रुपये का बजट मांगने के बाद भी उसे फूटी कौड़ी नहीं मिली। इसके अलावा अन्य कई राजमार्ग, प्रमुख जिला मार्ग, ग्रामीण मार्ग हैं, जिनकी बदहाली दूर कराने के लिए बजट नहीं है।
बरसात बाद ही फर्राटा भर सकेंगे लोग
हर विधानसभा क्षेत्र की सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बाद यदि धन भी मिलता है तो सड़कों की बदहाली दूर नहीं हो पाएगी। क्योंकि इस बारिश का समय आ गया है। ऐसे में सड़कों का डामरीकरण होना संभव नहीं हैं। अब तीन महीने तक सड़कों पर काम नहीं हो सकेगा। उधर सितंबर अक्तूबर में बारिश थमी तो डामरीकरण का काम होगा।

बरसात में निकलना होगा मुश्किल
रायबरेली। सड़कों की बदहाली से लोगों को आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। हरचंदपुर निवासी केके सिंह, देवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बरसात में सड़कें तालाब बन जाती है, जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है। शिवगढ़ क्षेत्र के रहने वाले बलबीर सिंह, पवन कुमार शुक्ला ने बताया कि सड़कें खस्ताहाल है। बरसात में और समस्या का सामना करना पड़ेगा।
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