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एकलव्य बनाने को कोरोना काल में घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाते थे, जगाई शिक्षा की अलख
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मिसाल बने शिक्षकों में शामिल सविता सिंह।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। पिछले साल लॉकडाउन लगा तो स्कूल-कॉलेजों में भी ताले लग गए। पढ़ाई-लिखाई पटरी से उतर गई। इन विपरीत हालातों के बीच कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें हौसला नहीं हारा। शिक्षा की अलख जगाने के लिए पूरे मन से कोशिश की।
घर-घर जाकर पढ़ाने का काम किया। जरूरत पड़ने पर उनकी मदद भी की। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक भी किया। आज हम ऐसे कुछ शिक्षकों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने कोरोना काल में भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और समाज के लिए प्रेरणा बने।
विनीत ने की पहल तो दूसरे भी आगे आए
उच्च प्राथमिक विद्यालय खैरहना के सहायक अध्यापक विनीत श्रीवास्तव ने ऑनलाइन शिक्षा से वंचित बच्चों को घर-घर जाकर पढ़ाना शुरू किया। यह पहल उस समय की गई, जब मोहल्ला पाठशाला शुरू नहीं हुई थी। यह देख दूसरे शिक्षक भी प्रेरित हुए। इससे पढ़ाई से दूर होते जा रहे बच्चों को उन्होंने शिक्षा से जोड़े रखा। विनीत ने बंजारों की बस्ती में जाकर नशामुक्ति के बारे में बताया। स्कूल के आसपास गंदगी करने वालों को समझाया, ताकि विद्यालय परिसर और आसपास का माहौल साफ-सुथरा रहे।
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रुचि बनाए रखने को कराई प्रतियोगिताएं
उच्च प्राथमिक विद्यालय शंकरगंज की इंचार्ज प्रधानाध्यापक सविता सिंह ने ऐतिहासिक व्यक्तियों के बारे जानकारी जुटाकर उसकी सीडी तैयार की है। प्रार्थना का ऑडियो और वीडियो भी तैयार किया है। इससे बच्चों को जानकारी देने, पढ़ाने और समझाने में मदद मिलेगी। लॉकडाउन के दौरान एजुकेशनल नोट्स तैयार कर बच्चों को उपलब्ध कराती थीं, ताकि बच्चे पढ़ाई से दूर न जाने पाएं। रुचिकर गतिविधियां व प्रतियोगिताएं कराईं, जिससे बच्चों की रुचि बनी रहे।
शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए मिला पुरस्कार
उच्च प्राथमिक विद्यालय कोडरस बुजुर्ग की सहायक अध्यापिका डॉ. शिल्पी वर्मा को अभी कुछ दिन पहले ही शैक्षणिक गुणवत्ता में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए गोरखपुर में सम्मानित किया गया है। उन्होंने बच्चों को विज्ञान की ओर आकर्षित किया। एजुलीडर समूह के जरिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया, जिसमें बच्चों को पढ़ाने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। उनका मानना है कि बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना बहुत जरूरी है। उनका प्रयास रहा कि कोरोना काल में भी बच्चे शिक्षा से वंचित न रहने पाए।
बच्चों के घर जाकर देते थे होमवर्क
ऊंचाहार। प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर उधवन के प्रभारी प्रधानाध्यापक अतीश कुमार ने कोरोना काल में भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूले। वह गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को होमवर्क देते रहे। हर दिन किसी न किसी गांव में जाकर बच्चों को दिए गए होमवर्क को चेक करते थे। यही उनकी दिनचर्या बन गई थी। उन्होंने अपने वेतन से बच्चों, अभिभावकों को मास्क, साबुन उपलब्ध कराए। पढ़ाने के साथ-साथ कोरोना के प्रति जागरूक किया। अतीश बताते हैं कि बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना बहुत जरूरी था।
सभी विषयों के नोट्स बनाकर बच्चों को दिए
सरेनी। प्राथमिक विद्यालय कुशलखेड़ा के सहायक अध्यापक अश्वनी कुमार ने कोरोना काल के दौरान बच्चों को हिंदी, गणित, अंग्रेजी के नोट्स बना दिए, जिससे बच्चे घर में रहकर पढ़ाई कर सकें और उनकी शिक्षा के प्रति रुचि बनी रहे। साथ ही बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उन्हें समझाया, ताकि वे भी बच्चों की पढ़ाई में मदद कर सकें। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बच्चों को पढ़ाने का काम किया। जो बच्चे ग्रुप से नहीं जुड़े सके, उनके घर जाकर पढ़ाने का काम किया।
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घर-घर जाकर पढ़ाने का काम किया। जरूरत पड़ने पर उनकी मदद भी की। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक भी किया। आज हम ऐसे कुछ शिक्षकों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने कोरोना काल में भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और समाज के लिए प्रेरणा बने।
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विनीत ने की पहल तो दूसरे भी आगे आए
उच्च प्राथमिक विद्यालय खैरहना के सहायक अध्यापक विनीत श्रीवास्तव ने ऑनलाइन शिक्षा से वंचित बच्चों को घर-घर जाकर पढ़ाना शुरू किया। यह पहल उस समय की गई, जब मोहल्ला पाठशाला शुरू नहीं हुई थी। यह देख दूसरे शिक्षक भी प्रेरित हुए। इससे पढ़ाई से दूर होते जा रहे बच्चों को उन्होंने शिक्षा से जोड़े रखा। विनीत ने बंजारों की बस्ती में जाकर नशामुक्ति के बारे में बताया। स्कूल के आसपास गंदगी करने वालों को समझाया, ताकि विद्यालय परिसर और आसपास का माहौल साफ-सुथरा रहे।
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रुचि बनाए रखने को कराई प्रतियोगिताएं
उच्च प्राथमिक विद्यालय शंकरगंज की इंचार्ज प्रधानाध्यापक सविता सिंह ने ऐतिहासिक व्यक्तियों के बारे जानकारी जुटाकर उसकी सीडी तैयार की है। प्रार्थना का ऑडियो और वीडियो भी तैयार किया है। इससे बच्चों को जानकारी देने, पढ़ाने और समझाने में मदद मिलेगी। लॉकडाउन के दौरान एजुकेशनल नोट्स तैयार कर बच्चों को उपलब्ध कराती थीं, ताकि बच्चे पढ़ाई से दूर न जाने पाएं। रुचिकर गतिविधियां व प्रतियोगिताएं कराईं, जिससे बच्चों की रुचि बनी रहे।
शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए मिला पुरस्कार
उच्च प्राथमिक विद्यालय कोडरस बुजुर्ग की सहायक अध्यापिका डॉ. शिल्पी वर्मा को अभी कुछ दिन पहले ही शैक्षणिक गुणवत्ता में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए गोरखपुर में सम्मानित किया गया है। उन्होंने बच्चों को विज्ञान की ओर आकर्षित किया। एजुलीडर समूह के जरिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया, जिसमें बच्चों को पढ़ाने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। उनका मानना है कि बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना बहुत जरूरी है। उनका प्रयास रहा कि कोरोना काल में भी बच्चे शिक्षा से वंचित न रहने पाए।
बच्चों के घर जाकर देते थे होमवर्क
ऊंचाहार। प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर उधवन के प्रभारी प्रधानाध्यापक अतीश कुमार ने कोरोना काल में भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूले। वह गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को होमवर्क देते रहे। हर दिन किसी न किसी गांव में जाकर बच्चों को दिए गए होमवर्क को चेक करते थे। यही उनकी दिनचर्या बन गई थी। उन्होंने अपने वेतन से बच्चों, अभिभावकों को मास्क, साबुन उपलब्ध कराए। पढ़ाने के साथ-साथ कोरोना के प्रति जागरूक किया। अतीश बताते हैं कि बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना बहुत जरूरी था।
सभी विषयों के नोट्स बनाकर बच्चों को दिए
सरेनी। प्राथमिक विद्यालय कुशलखेड़ा के सहायक अध्यापक अश्वनी कुमार ने कोरोना काल के दौरान बच्चों को हिंदी, गणित, अंग्रेजी के नोट्स बना दिए, जिससे बच्चे घर में रहकर पढ़ाई कर सकें और उनकी शिक्षा के प्रति रुचि बनी रहे। साथ ही बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उन्हें समझाया, ताकि वे भी बच्चों की पढ़ाई में मदद कर सकें। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बच्चों को पढ़ाने का काम किया। जो बच्चे ग्रुप से नहीं जुड़े सके, उनके घर जाकर पढ़ाने का काम किया।