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फिल्मी अंदाज में भाग निकला बंदी
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:01 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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बस्ती जिला कारागार से शुक्रवार को दीवानी कचहरी में पेशी पर आया बंदी शकील सुरक्षा में लगे सिपाहियों को चकमा देकर फिल्मी अंदाज में फरार हो गया। साथ आए सिपाही देखते ही रह गए और बंदी गेट से निकला, एक बाइक सवार हुआ और फरार हो गया।
इस घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस बंदी की धरपकड़ के लिए प्रयास शुरू किए, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। उसके साथ आए सह अभियुक्त भाई सगीर से पुलिस पूछताछ कर रही है। खबर लिखे जाने बस्ती से आए सिपाहियों की ओर से अभी तक कोई तहरीर कोतवाली में नहीं दी गई है।
प्रतापगढ़ जिले के सांगीपुर निवासी शकील और उसके भाई सगीर के खिलाफ वर्ष 2015 में रायबरेली जिले के नसीराबाद थाने में चोरी की रिपोर्ट लिखाई गई थी। इस मामले में दोनों के खिलाफ गैंगस्टर की भी कार्रवाई की गई है।
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मौजूदा समय में शकील बस्ती और सगीर प्रतापगढ़ जिला कारागार में बंद थे। दोनों को पुलिस अभिरक्षा में शुक्रवार को यहां दीवानी कचहरी स्थित गैंगस्टर कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। शकील के पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ था। पेशी से निकलने के बाद उसने बस्ती जिले से आए दो सिपाहियों से नित्यक्रिया जाने की बात कही।
इस पर सिपाहियों ने उसे छोड़ा। बताते हैं कि वह जैसे ही कचहरी गेट के पास पहुंचा, वैसे ही एक बाइक सवार वहां आ गया। बंदी शकील फौरन उसी बाइक पर बैठ गया। सिपाही देखते रहे और बाइक सवार बंदी को लेकर फरार हो गया।
यह हाल तब रहा, जब गेट से चंद कदम दूरी पर पुलिस चौकी भी है। सूचना पर सदर कोतवाल कमलेश पांडेय फोर्स के साथ पहुंचे। वायरलेस के जरिए सभी थानों को अलर्ट किया गया। चेकिंग कराई गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। पुलिस सह अभियुक्त उसके भाई सगीर से पूछताछ कर रही है।
एसपी हरिनारायण सिंह ने बताया कि बस्ती से आए सिपाहियों की तहरीर पर बंदी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। मामले की जांच कराई जा रही है। जल्द फरार बंदी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जिस तरह फिल्मी अंदाज में शुक्रवार को बंदी शकील सिपाहियों को चकमा देकर भागा, उससे आशंका जताई जा रही है कि यह घटना प्री प्लान के तहत हुई। पुलिस की मानें तो जैसे ही बंदी गेट पर पहुंचा, वैसे ही बाइक सवार पहुंच गया।
इससे यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बाइक सवार से पहले ही बात हो चुकी थी कि वह गेट के पास पहुंच गया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बंदी को बैठाकर भागने वाला बाइक सवार कौन है।
दीवानी कचहरी में पेशी पर आए बंदियों के भागने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बंदी फरार हो चुके हैं। बावजूद बंदियों को पेशी लाए जाने के दौरान सुरक्षा के दावे हर बार झूठे ही साबित हुए। 16 दिसंबर 2009 को बंदी छोटू उर्फ इसरार पेशी पर लाया गया था।
लॉकअप से ले जाते समय सिपाही फगराज सिंह की आंख में मिर्च झोंककर फरार हो गया था। 30 अप्रैल 2010 को डलमऊ क्षेत्र के बलीपुर निवासी एवं बंदी राहुल सिंह सिपाही अमृतलाल का हाथ छुड़ाकर फरार हो गया था। 29 अप्रैल 2011 को मिर्जापुर निवासी शैलेंद्र उर्फ मिंटू पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।
इसके अलावा 27 मई 2009 को लॉकअप लाए गए बंदी अशोक कुमार, दिनेश यादव ने सिपाही हवलदार राम को घायल करके भागने की कोशिश की थी, जिसे वकीलों ने पकड़ लिया था। इसी तरह 5 मार्च 2010 को प्रदीप कुमार सिंह उर्फ नंटा उर्फ राजू सिपाही रामचंद्र वर्मा का हाथ छुड़ाकर भागने की कोशिश की थी, जिसे वकीलों ने पकड़ लिया था। 22 अक्तूबर 2013 को सिपाही श्यामलाल का हाथ छुड़ाकर बंदी सुल्तान फरार हो गया था।
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इस घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस बंदी की धरपकड़ के लिए प्रयास शुरू किए, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। उसके साथ आए सह अभियुक्त भाई सगीर से पुलिस पूछताछ कर रही है। खबर लिखे जाने बस्ती से आए सिपाहियों की ओर से अभी तक कोई तहरीर कोतवाली में नहीं दी गई है।
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प्रतापगढ़ जिले के सांगीपुर निवासी शकील और उसके भाई सगीर के खिलाफ वर्ष 2015 में रायबरेली जिले के नसीराबाद थाने में चोरी की रिपोर्ट लिखाई गई थी। इस मामले में दोनों के खिलाफ गैंगस्टर की भी कार्रवाई की गई है।
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मौजूदा समय में शकील बस्ती और सगीर प्रतापगढ़ जिला कारागार में बंद थे। दोनों को पुलिस अभिरक्षा में शुक्रवार को यहां दीवानी कचहरी स्थित गैंगस्टर कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। शकील के पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ था। पेशी से निकलने के बाद उसने बस्ती जिले से आए दो सिपाहियों से नित्यक्रिया जाने की बात कही।
इस पर सिपाहियों ने उसे छोड़ा। बताते हैं कि वह जैसे ही कचहरी गेट के पास पहुंचा, वैसे ही एक बाइक सवार वहां आ गया। बंदी शकील फौरन उसी बाइक पर बैठ गया। सिपाही देखते रहे और बाइक सवार बंदी को लेकर फरार हो गया।
यह हाल तब रहा, जब गेट से चंद कदम दूरी पर पुलिस चौकी भी है। सूचना पर सदर कोतवाल कमलेश पांडेय फोर्स के साथ पहुंचे। वायरलेस के जरिए सभी थानों को अलर्ट किया गया। चेकिंग कराई गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। पुलिस सह अभियुक्त उसके भाई सगीर से पूछताछ कर रही है।
एसपी हरिनारायण सिंह ने बताया कि बस्ती से आए सिपाहियों की तहरीर पर बंदी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। मामले की जांच कराई जा रही है। जल्द फरार बंदी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जिस तरह फिल्मी अंदाज में शुक्रवार को बंदी शकील सिपाहियों को चकमा देकर भागा, उससे आशंका जताई जा रही है कि यह घटना प्री प्लान के तहत हुई। पुलिस की मानें तो जैसे ही बंदी गेट पर पहुंचा, वैसे ही बाइक सवार पहुंच गया।
इससे यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बाइक सवार से पहले ही बात हो चुकी थी कि वह गेट के पास पहुंच गया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बंदी को बैठाकर भागने वाला बाइक सवार कौन है।
दीवानी कचहरी में पेशी पर आए बंदियों के भागने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बंदी फरार हो चुके हैं। बावजूद बंदियों को पेशी लाए जाने के दौरान सुरक्षा के दावे हर बार झूठे ही साबित हुए। 16 दिसंबर 2009 को बंदी छोटू उर्फ इसरार पेशी पर लाया गया था।
लॉकअप से ले जाते समय सिपाही फगराज सिंह की आंख में मिर्च झोंककर फरार हो गया था। 30 अप्रैल 2010 को डलमऊ क्षेत्र के बलीपुर निवासी एवं बंदी राहुल सिंह सिपाही अमृतलाल का हाथ छुड़ाकर फरार हो गया था। 29 अप्रैल 2011 को मिर्जापुर निवासी शैलेंद्र उर्फ मिंटू पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।
इसके अलावा 27 मई 2009 को लॉकअप लाए गए बंदी अशोक कुमार, दिनेश यादव ने सिपाही हवलदार राम को घायल करके भागने की कोशिश की थी, जिसे वकीलों ने पकड़ लिया था। इसी तरह 5 मार्च 2010 को प्रदीप कुमार सिंह उर्फ नंटा उर्फ राजू सिपाही रामचंद्र वर्मा का हाथ छुड़ाकर भागने की कोशिश की थी, जिसे वकीलों ने पकड़ लिया था। 22 अक्तूबर 2013 को सिपाही श्यामलाल का हाथ छुड़ाकर बंदी सुल्तान फरार हो गया था।