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बारिश ने खोली गंगा के रेत में दफन शवों की पोल

Fri, 21 May 2021 11:07 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 11:07 PM IST
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CORONA
रायबरेली। पिछले तीन दिनों में हुई बारिश से गंगा की रेत में कई दफन बाहर आ गए हैं। वहीं कुछ शवों जंगली जानवरों का निवाला भी बन गए हैं। बालू पर मानव कंकाल देखकर प्रशासन के झूठ की पोल खुल रही है।
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कोराना संक्रमण के दौरान शवों का दाह संस्कार न कर पाने वाले लोगों ने मजबूरी में शवों को बालू में दफन कर दिया था। उनकी लाचारी पर प्रशासन का तर्क था कि दफन शव पुराने हैं। वहीं अब बारिश ने प्रशासन की दावों की पोल खोल दी है।
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कोरोना काल में लाचार लोगों ने गंगा घाटों पर शवों को जलाने के बजाय बालू के रेत में दफन कर दिया। इसे लकड़ी की कमी कहा जाए या फिर आम लोगों की मजबूरी कि वे चाहकर भी अपनों का अंतिम संस्कार ठीक से नहीं कर सके।
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वजह कोई भी रही हो, लेकिन अफसर रेत में शव दफन होने से इंकार करते रहे या फिर अविवाहितों को बिना जलाए दफन करने की परंपरा बताते रहे, लेकिन बारिश ने गंगा के रेत में अनगिनत शवों के दफन होने की पोल खोल दी है।
ऊंचाहार, डलमऊ, सरेनी विकास खंड क्षेत्र के गंगा घाटों की तस्वीरों ने कोराना संक्रमणकाल के दरम्यान हुई मौतों की दहशत और भयावहता की ऐसी तस्वीर दिखाई दी, जिसे सोचकर ही किसी की भी रूह कांप उठे।
कहीं शवों के अस्थि पंजर तो कहीं बांस और कपड़े बिखरे दिखाई पड़ रहे हैं। यही नहीं इलाकाई लोगों की मानें तो इन शवों को जंगली जानवर भी नोच रहे हैं। यह अलग बात है कि अफसर यह कहने से संकोच नहीं करते कि दफनाए गए शव पुराने हैं, लेकिन घाटों पर आने वाले लोग कुछ और ही कहानी कहते हैं।
शवों को खा रहे जंगली जानवर
ऊंचाहार। लगातार रुक-रुक कर तीन दिन हुई बारिश से गंगा की रेत में दफन शवों की कब्रों से बालू बह गई, जिससे बाहर निकले शवों को जंगली जानवर खा रहे हैं।
जानवरों के खाने के बाद कंकाल रेत पर साफ दिखाई दे रहे हैं। हड्डियां भी रेत पर पड़ी हैं। गंगा नदी के तट पर स्थित गोकना घाट पर शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।
जिले व अमेठी के लोग शवों का अंत्येष्टि करने यहां आते हैं। बताते हैं कि बीते एक माह में कोरोना महामारी के दौरान इस घाट पर सैकड़ों की संख्या में शवों को बालू में दफन किया गया था।
किसी ने मजबूरी तो किसी ने परंपरागत शव दफनाए। बारिश में शवों के खुलने और जानवरों के खाने के बाद मांस लगे कंकाल रेत में फैले दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय प्रशासन सिर्फ जांच कराने की बात कहकर अपनी नाकामी छुपा रहा है। एसडीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। जांच कराने के लिए टीम भेजी जाएगी।
गंगा घाटों पर बालू में शव दफन करने पर रोक
ऊंचाहार। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र के गंगा घाटों पर बालू में शव दफन करने पर रोक लगा दी है। रेत में शव दफन करने का मामला तूल पकड़ने के बाद तहसील प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
रेत में शव दफन करने से रोकने के लिए गोकना घाट व गोला घाट पर पुलिस के दो सिपाही तैनात किए गए हैं। अब घाट पर शव का दाह संस्कार ही किया सकेगा। इसके लिए तीर्थ पुरोहितों व लकड़ी विक्रेताओं को सामान्य रेट पर लकड़ी बेचने का निर्देश दिया गया है।
लोग गंगा नदी के तट पर गोकना घाट व गोलाघाट पर शवों का अंतिम संस्कार अरसे से करते आ रहे हैं। एसडीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि घाटों पर शव दफन करने पर पाबंदी लगा दी गई है। घाट पर सिर्फ दाह संस्कार किया जा सकेगा।
तीर्थ पुरोहितों ने बताया नेक पहल
मां गंगा गोकर्ण जन कल्याण सेवा समिति के सचिव एवं तीर्थ पुरोहित जितेंद्र द्विवेदी, संतोष शुक्ला, सत्यम द्विवेदी व हरि प्रकाश दीक्षित ने बताया कि प्रशासन ने यह नेक पहल की है।
रेत में शव दफन होने के बाद मां गंगा में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया था। लगातार शवों के अवशेषों से मां गंगा प्रदूषित हो रही थी। अब रोक लग जाने के बाद मां गंगा की स्वच्छ निर्मल धारा स्नान व पीने योग्य बनी रहेगी।
सभी ने आदेश का स्वागत किया है और लोगों से शवों का सिर्फ दाह संस्कार ही करने की अपील की है। पुरोहितों ने इसके लिए लोगों को हर संभव मदद देने की भी बात कही है।
पुलिस का पहरा और चलाया सफाई अभियान
डलमऊ। बारिश ने अधिकारियों की झूठ की पोल भी खुल गई। अब रेत में दफन शवों को लेकर हलचल मची तो पुलिस का पहरा बैठा दिया गया। यही नहीं सच्चाई सामने आने के बाद अब रेत से बांस और कपड़ों को हटाने के लिए नगर पंचायत डलमऊ की ओर से सफाई अभियान चलाया गया और ट्रैक्टर से रेत में शवों के आसपास बिखरा मलबा हटाया गया।
डलमऊ एसडीएम विजय कुमार ने बताया कि सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार अविवाहित महिलाओं और बच्चों और साधु-संतों के शवों को दफन करने की परंपरा है। उपजिलाधिकारी ने बताया कि हाल ही में कोई भी शव श्मशान घाट के आसपास दफन नहीं किया गया है।
ये शव कई माह पूर्व दफनाए गए थे। नगर पंचायत अध्यक्ष बृजेश दत्त गौड़ ने बताया कि सफाई कर्मियों को भेजकर श्मशान घाट और तराई घाट में बांस की तख्तियां, कफन, चादरें और अन्य कपड़ों को नष्ट कराया गया।
घाटों की सफाई कराई गई। कब्रों पर मिट्टी आदि डलवा कर दबवा दिया गया। क्षेत्राधिकारी डलमऊ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि श्मशान घाट पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई और किसी को भी मिट्टी में शव दफन करने नहीं दिया जाएगा
गेगासों घाट पर कोई भी शव खुला नहीं
सरेनी। सरेनी ब्लॉक क्षेत्र के गेगासों शमशान घाट में भी अनगिनत शव दफनाए गए हैं। घाट की तस्वीर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने शव दफनाए गए होंगे। इधर बारिश कम हुई है, इसलिए शव खुले नहीं हैं।

एसडीएम का कहना है कि परंपरागत तरीके से जिन शवों को दफनाया गया है, उनमें कोई भी खुला नहीं पड़ा है। एसडीएम विनय कुमार मिश्रा का कहना है कि गेगासों घाट में कोई भी शव खुला नहीं है। घाट पर परंपरागत शवों को दफनाया गया है।
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