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बिना रोक-टोक धंधक रही कोयले की भट्ठियां, दूषित हो रही आबोहवा
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डलमऊ (रायबरेली)। वन क्षेत्र डलमऊ के अंतर्गत बिना रोकटोक कोयले की भट्टियां संचालित हो रही हैं। कई जगह तो आबादी क्षेत्र में भट्ठियां धुआं उगल रही हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इसको लेकर न तो वन विभाग गंभीर है, न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर।
यही वजह है कि यहां की आबोहवा को दूषित कर बड़े पैमाने पर भट्ठियाें का संचालन हो रहा है। कहने को तो वन क्षेत्र डलमऊ के अंतर्गत करीब कोयला बनाने के लिए 18 भट्ठियाें की अनुमति वन विभाग से ली गई है। इसके अलावा कई जगह बिना किसी अनुमति के भट्ठियां सुलग रही हैं।
वन क्षेत्र के अंतर्गत डलमऊ, दीनशाह गौरा, जगतपुर और ऊंचाहार ब्लॉक क्षेत्र के गांव आते हैं। यहां पर विभाग से 18 कोयले की भट्टियों को चलाने के लिए अनुमति ली गई है।
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केवल डलमऊ क्षेत्र में ही कई जगह भट्टियां सुलग रही है। इनसे निकलने वाला धुआं वातावरण को दूषित कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन कर्मियों की मिलीभगत से बगैर अनुमति के भट्ठियां चल रही हैं। कोई परमीशन भी नहीं लिया गया है। यहां मानकों को ताक पर रखकर भट्ठियां चलाई जा रही है।
डलमऊ कस्बे के निकट विद्युत वितरण खंड डलमऊ के निकट कोयले की भट्टी चल रही है। इसी तरह पूरे डेरा मजरे पखरौली, रसूलपुर धरांवा में कोयले की भट्टी चलाई जा रही है। लगातार धुएं के रूप में जहर निकल रहा है।
ग्रामीण धीरेंद्र कुमार सिंह, नरसिंह, मनीष कुमार ने इनके संचालन पर रोक लगाए जाने की मंाग की है। वन क्षेत्राधिकारी हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि आबादी क्षेत्र से एक किलोमीटर दूर कोयले की भट्ठियों के संचालन की अनुमति है।
इसके लिए करीब 18 भट्ठियों ने अनुमति ली है। इनके लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। यदि कहीं पर बगैर परमीशन के भट्ठी चल रही है तो नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।
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यही वजह है कि यहां की आबोहवा को दूषित कर बड़े पैमाने पर भट्ठियाें का संचालन हो रहा है। कहने को तो वन क्षेत्र डलमऊ के अंतर्गत करीब कोयला बनाने के लिए 18 भट्ठियाें की अनुमति वन विभाग से ली गई है। इसके अलावा कई जगह बिना किसी अनुमति के भट्ठियां सुलग रही हैं।
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वन क्षेत्र के अंतर्गत डलमऊ, दीनशाह गौरा, जगतपुर और ऊंचाहार ब्लॉक क्षेत्र के गांव आते हैं। यहां पर विभाग से 18 कोयले की भट्टियों को चलाने के लिए अनुमति ली गई है।
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केवल डलमऊ क्षेत्र में ही कई जगह भट्टियां सुलग रही है। इनसे निकलने वाला धुआं वातावरण को दूषित कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन कर्मियों की मिलीभगत से बगैर अनुमति के भट्ठियां चल रही हैं। कोई परमीशन भी नहीं लिया गया है। यहां मानकों को ताक पर रखकर भट्ठियां चलाई जा रही है।
डलमऊ कस्बे के निकट विद्युत वितरण खंड डलमऊ के निकट कोयले की भट्टी चल रही है। इसी तरह पूरे डेरा मजरे पखरौली, रसूलपुर धरांवा में कोयले की भट्टी चलाई जा रही है। लगातार धुएं के रूप में जहर निकल रहा है।
ग्रामीण धीरेंद्र कुमार सिंह, नरसिंह, मनीष कुमार ने इनके संचालन पर रोक लगाए जाने की मंाग की है। वन क्षेत्राधिकारी हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि आबादी क्षेत्र से एक किलोमीटर दूर कोयले की भट्ठियों के संचालन की अनुमति है।
इसके लिए करीब 18 भट्ठियों ने अनुमति ली है। इनके लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। यदि कहीं पर बगैर परमीशन के भट्ठी चल रही है तो नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।