फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   bridge

मुसाफिरों के लिए कभी भी खतरा बन सकती हवा में झूलती रेलिंग

Wed, 02 Nov 2022 11:34 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Nov 2022 11:34 PM IST
विज्ञापन
bridge
महराजगंज ड्रेन पर बने जर्जर पुल से निकलता ट्रक। - फोटो : RAIBARAILY
10 साल से जर्जर पुल
विज्ञापन

जगपुर ब्लॉक क्षेत्र में डलमऊ से आए गंग नहर पर रामगढ़ टिकरिया गांव के पास बना पुल 10 सालों से जर्जर है। दोनों तरफ की रेलिंग गिर गई है। लोग जान हथेली पर रखकर पुल से आवागमन को विवश होना पड़ता है। इस दौरान जरा सी चूक पर वाहन सवार गिरकर चोटिल हो जाते हैं।
तीन महीने से टूटी पड़ी रेलिंग
शिवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र में बांदा-बहराइच राजमार्ग पर गूढ़ा गांव के पास बने पुलिया की रेलिंग बीते तीन माह से टूटी पड़ी है। इस पुल मार्ग से हर दिन 30 हजार लोगों का आवागमन होता है। टूटी पुलिया के स्थान पर लोक निर्माण विभाग ने कंटीली झाड़ियां रखकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कस लिया है।
विज्ञापन

जर्जर पुल से भरना पड़ रहा फर्राटा
रायबरेली-डीह राजमार्ग पर इमली तिराहे के पास महराजगंज डे्रन के जर्जर पुल से छोटे और भारी वाहनों को फर्राटा भरने की मजबूरी उठाना पड़ रही है। पांच साल पहले पुल की मरम्मत के लिए वाहनों के आने-जाने के लिए रास्ता बनाने को ईंटें और पाइप लाइन उतारी गईं थी। उसके बाद से जर्जर पुल के निर्माण का कार्य ठंडा पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रायबरेली। मरम्मत व निर्माण कार्य न होने से राहगीरों को जान हथेली पर रखकर जर्जर पुल व पुलियों को पार कर अपना सफर पूरा करना पड़ रहा है। सालों से मरम्मत के भरोसे पर चल रहे इन जर्जर पुलों से गुजरने वाले वाहनों के यात्री इस दौरान बस सकुशल सफर पूरा हो जाने की दुआ करते हैं।
गुजरात के मोरबी में झूला पुल टूटने के हादसे ने इन जर्जर पुलों से गुजरने वाले राहगीरों की धुकधुकी और बढ़ा दी है। जर्जर पुलों से जुड़े उक्त मामले तो बस बानगी मात्र है। जमीनी तौर पर जिले में ऐसे जर्जर व जानलेवा हो चुके छोटे बड़े पुल व पुलियों की संख्या का आंकड़ा 22 सौ तक है। इसमें से 30 पुल ऐसे हैं, जो किसी भी हालत में आवागमन लायक उपयुक्त नहीं हैं।
सिंचाई व सेतु विभाग के जिम्मेदारों की माने तो इन जर्जर पुलों में से कुछ की मरम्मत व अनुश्रवण और कुछ को नए सिरे से बनाने का कार्य जल्द ही पूरा कराया जाना बहुत जरूरी है। अन्यथा आवागमन के दौरान इन पुलों से गुजरने पर कभी भी कोई जानलेवा हादसा हो सकता है। विभागीय स्तर पर इन जर्जर हो चुके पुलों के निर्माण की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। इसकी अनुमति के आधार पर ही नए पुलों का निर्माण संभव हो सकेगा।
विकास के नाम पर जिले में सड़कों में और नहरों का जाल सा बिछा है। ऐसे में सड़कों के ऊपर बनी कई पुल व पुलिया अपनी आयु पूरी कर चुकने के बाद पूरी तरह जर्जर व बदहाल स्थिति में हैं। सिंचाई विभाग के अफसरों का दावा है कि 1235 पुलियों की मरम्मत कराई गई है, जबकि 41 पुल खराब है। इसमें 13 पुलों का निर्माण कराया जा चुका है।
बजट के अभाव में शेष पुल बनने हैं। इसी तरह लोक निर्माण विभाग ने 46 पुल है। यह पुल 10 से लेकर 40 मीटर लंबे हैं। इसमें 17 पुलों को छोडक़र शेष चलने लायक नहीं है। यही वजह पुलियों का भी है। करीब 854 पुलियां ऐसी हैं, जिनकी रेलिंग टूटी है तो कहीं छत जर्जर है। विभाग की ओर से इनको बनवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाली 1235 पुल व पुलियों की मरम्मत कराई गई है। इनमें से 41 पुलों का निर्माण होना है। 13 पुल बन चुके हैं। शेष पुलों के निर्माण के लिए बजट मिलने का इंतजार है।
हेमंत कुमार वर्मा, नोडल अधिकारी सिंचाई विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed