{"_id":"61d87a1522d35e3a1f01c73b","slug":"ajit-and-bushra-first-in-debate-competition-raibaraily-news-lko61247241","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाद-विवाद प्रतियोगिता में अजीत और बुशरा प्रथम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाद-विवाद प्रतियोगिता में अजीत और बुशरा प्रथम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में अमृत महोत्सव के तहत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को इतिहास का पुनर्पाठ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता कराई गई, जिसमें काफी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
पक्ष में अजीत पांडेय को प्रथम, कोमल दीक्षित को द्वितीय, अजरा बानो को तृतीय, आदर्श कुमार को सांत्वना, विपक्ष में बुशरा को प्रथम, आदित्य श्रीवास्तव को द्वितीय, आदर्श मिश्र को तृतीय, अंकित शुक्ला को सांत्वना पुरस्कार मिला।
अध्यक्षता कर रहे उप प्राचार्य डॉ. बद्रीदत्त मिश्र ने कहा कि आयोजन समिति ने इतिहास का पुनर्पाठ जैसे विषय को वाद-विवाद प्रतियोगिता में शामिल कर एक अत्यंत उत्कृष्ट कार्य किया है।
विज्ञापन
वास्तव में इतिहास का पुनर्लेखन एवं पुनर्पाठ किया जाना जरूरी है। मुख्य अतिथि डॉ. तहसीलदार सिंह ने कहा कि इतिहास को लिखने के बजाए उसे बनाने पर ज्यादा जोर देना चाहिए।
यदि यह लिखा भी जाए तो पूरी वैज्ञानिकता, तटस्थता एवं तथ्यात्मकता का ध्यान रखा जाए। निर्णायक मंडल में देहरादून से आए समाजशास्त्र के विशेषज्ञ डॉ. परितोष सिंह तथा हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. किरण श्रीवास्तव शामिल रहीं। डॉ. संतोष पांडेय और डॉ. गरुण सेठ ने स्वागत किया।
संचालन डॉ. अजय सिंह ने किया। इस मौके पर डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. अभय सिंह, डॉ. पुनीत गुप्ता, डॉ. केपी बरनवाल, डॉ. शिवानी, दयाशंकर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
पक्ष में अजीत पांडेय को प्रथम, कोमल दीक्षित को द्वितीय, अजरा बानो को तृतीय, आदर्श कुमार को सांत्वना, विपक्ष में बुशरा को प्रथम, आदित्य श्रीवास्तव को द्वितीय, आदर्श मिश्र को तृतीय, अंकित शुक्ला को सांत्वना पुरस्कार मिला।
विज्ञापन
अध्यक्षता कर रहे उप प्राचार्य डॉ. बद्रीदत्त मिश्र ने कहा कि आयोजन समिति ने इतिहास का पुनर्पाठ जैसे विषय को वाद-विवाद प्रतियोगिता में शामिल कर एक अत्यंत उत्कृष्ट कार्य किया है।
विज्ञापन
वास्तव में इतिहास का पुनर्लेखन एवं पुनर्पाठ किया जाना जरूरी है। मुख्य अतिथि डॉ. तहसीलदार सिंह ने कहा कि इतिहास को लिखने के बजाए उसे बनाने पर ज्यादा जोर देना चाहिए।
यदि यह लिखा भी जाए तो पूरी वैज्ञानिकता, तटस्थता एवं तथ्यात्मकता का ध्यान रखा जाए। निर्णायक मंडल में देहरादून से आए समाजशास्त्र के विशेषज्ञ डॉ. परितोष सिंह तथा हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. किरण श्रीवास्तव शामिल रहीं। डॉ. संतोष पांडेय और डॉ. गरुण सेठ ने स्वागत किया।
संचालन डॉ. अजय सिंह ने किया। इस मौके पर डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. अभय सिंह, डॉ. पुनीत गुप्ता, डॉ. केपी बरनवाल, डॉ. शिवानी, दयाशंकर आदि मौजूद रहे।