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एम्स में ब्लड बैंक यूनिट को हरी झंडी, बढेंगी सहूलियतें
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एम्स का ब्लड कलेक्शन सेंटर।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ब्लड बैंक की यूनिट को हरी झंडी मिल गई है। औषधि विभाग के केंद्र व स्टेट के अधिकारियों की टीम ने एम्स पहुंचकर ब्लड बैंक के मानकों की जांच की।
करीब 2000 यूनिट की क्षमता के ब्लड बैंक के मानक जांच में सही पाए गए हैं। लाइसेंस देने के लिए राज्य के स्तर से अनुमोदन के लिए पत्र केंद्र को भेजा दिया गया है। जल्द ही अनुमोदन मिलते ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
एम्स के ब्लड बैंक में दो हजार से अधिक यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कंपोनेंट सेपरेटर मशीनें भी लग चुकी हैं। हाईटेक यूनिट से संबंधित सभी संसाधन जुटाए गए हैं।
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मानकों की जांच करने के लिए केंद्र से सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन नार्थ जोन (सीडीएससीओ) के ड्रग इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रताप, स्टेट से सहायक आयुक्त (ड्रग) बृजेश यादव और जिले के ड्रग इंस्पेक्टर शिवेंद्र प्रताप सिंह की टीम एम्स पहुंची। टीम ने एक-एक करके मानकों की जांच की।
जांच में सभी मानक सही पाए गए हैं। जांच के दौरान एम्स की डीन प्रो. नीरज कुमारी, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुयश सिंह, उप निदेशक प्रशासन डॉ. एसके सिंह, यूनिट प्रभारी डॉ. अरुणप्रीत कौर मौजूद रहे।
सभी मानक पूरे मिलने के बाद स्टेट के स्तर से लाइसेंस जारी करने के लिए केंद्र से अनुमोदन लेने का पत्र भेज दिया गया है। जल्द ही लाइसेंस जारी होने के बाद यूनिट काम करनी शुरू कर देगी।
ब्लड के कंपोनेंट को नहीं भटकेंगे मरीज
जिले में ब्लड आसानी से मिल जाता है, लेकिन ब्लड के कंपोनेंट के लिए मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एम्स में यूनिट के काम करने के बाद रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, क्रायोप्रेसीपिटेट आदि कंपोनेंट मरीजों को आसानी से मिल सकेंगे। खासकर एम्स में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को बेहतर सहूलियतें मिलेंगी।
सीडीएससीओ व सहायक आयुक्त के साथ एम्स के ब्लड बैंक के मानकों की जांच की गई है। जांच में सभी मानक पूरे मिले हैं। लाइसेंस जारी करने के लिए केंद्र से अनुमोदन जरूरी है। इसकेे लिए पत्र भेजा गया है। अनुमोदन मिलते ही एम्स का ब्लड बैंक काम करन शुरू कर देगा।
शिवेंद्र प्रताप सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर
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करीब 2000 यूनिट की क्षमता के ब्लड बैंक के मानक जांच में सही पाए गए हैं। लाइसेंस देने के लिए राज्य के स्तर से अनुमोदन के लिए पत्र केंद्र को भेजा दिया गया है। जल्द ही अनुमोदन मिलते ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
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एम्स के ब्लड बैंक में दो हजार से अधिक यूनिट ब्लड रखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कंपोनेंट सेपरेटर मशीनें भी लग चुकी हैं। हाईटेक यूनिट से संबंधित सभी संसाधन जुटाए गए हैं।
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मानकों की जांच करने के लिए केंद्र से सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन नार्थ जोन (सीडीएससीओ) के ड्रग इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रताप, स्टेट से सहायक आयुक्त (ड्रग) बृजेश यादव और जिले के ड्रग इंस्पेक्टर शिवेंद्र प्रताप सिंह की टीम एम्स पहुंची। टीम ने एक-एक करके मानकों की जांच की।
जांच में सभी मानक सही पाए गए हैं। जांच के दौरान एम्स की डीन प्रो. नीरज कुमारी, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुयश सिंह, उप निदेशक प्रशासन डॉ. एसके सिंह, यूनिट प्रभारी डॉ. अरुणप्रीत कौर मौजूद रहे।
सभी मानक पूरे मिलने के बाद स्टेट के स्तर से लाइसेंस जारी करने के लिए केंद्र से अनुमोदन लेने का पत्र भेज दिया गया है। जल्द ही लाइसेंस जारी होने के बाद यूनिट काम करनी शुरू कर देगी।
ब्लड के कंपोनेंट को नहीं भटकेंगे मरीज
जिले में ब्लड आसानी से मिल जाता है, लेकिन ब्लड के कंपोनेंट के लिए मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एम्स में यूनिट के काम करने के बाद रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, क्रायोप्रेसीपिटेट आदि कंपोनेंट मरीजों को आसानी से मिल सकेंगे। खासकर एम्स में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को बेहतर सहूलियतें मिलेंगी।
सीडीएससीओ व सहायक आयुक्त के साथ एम्स के ब्लड बैंक के मानकों की जांच की गई है। जांच में सभी मानक पूरे मिले हैं। लाइसेंस जारी करने के लिए केंद्र से अनुमोदन जरूरी है। इसकेे लिए पत्र भेजा गया है। अनुमोदन मिलते ही एम्स का ब्लड बैंक काम करन शुरू कर देगा।
शिवेंद्र प्रताप सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर