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डिग्री कॉलेजों में दाखिले के लिए शुरू हुई जद्दोजहद

Mon, 23 May 2016 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Mon, 23 May 2016 11:18 PM IST
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A struggle began for admission in degree colleges
एडमिशन - फोटो : demo pics
सभी बोर्ड के इंटर के रिजल्ट आने के बाद अब बच्चों में उच्च शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेजों में दाखिला लेने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। जिले में 47 महाविद्यालयों में बीए, बीएससी व बीकॉम की करीब 28 हजार सीटे हैं। लेकिन इस बार इंटमीडिएट की परीक्षा में 34,900 बच्चे पास हुए हैं।
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ऐसी स्थिति में करीब सात हजार बच्चों के सामने महाविद्यालयों में दाखिले का संकट गहरा सकता है। साथ ही जिले के मशहूर महाविद्यालयों में दाखिले के लिए बच्चों को परेशान होना होगा, क्योंकि इस बार भी 70 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 16 हजार के पार है।
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कम अंक पाने वाले बच्चों की बडे़ स्कूलों में पढ़ने की मंशा पूरी नहीं हो पाएगी। इस साल यूपी बोर्ड, सीबीएसई व सीआईसीएसई में इंटरमीडिएट में 39,096 छात्र-छात्राओं में से 34,900 हजार से अधिक परीक्षार्थी पास हुए हैं। 16,275 हजार से अधिक विद्यार्थी 70 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर पास हुए हैं।
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जबकि जिले के प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में करीब 10 हजार सीटें ही उपलब्ध हैं। इन कॉलेजों को हाई मेरिट वाले बच्चों के दाखिले ही हो पाते हैं। ऐसे में कम अंक पाने वाले बच्चों को सामान्य स्कूलों में दाखिले के लिए हाथ-पैर मारना होगा। जिले में 47 महाविद्यालय हैं।

बीएससी व बीकॉम के लिए तकरीबन आठ हजार छात्र-छात्राओं के लिए ही व्यवस्था है। 20 हजार सीटें कला वर्ग के लिए हैं। जिले के इकलौते इंदिरा गांधी राजकीय महिला महाविद्यालय में आधी आबादी को उच्च शिक्षा मुहैया कराने के लिए पूरी व्यवस्था नहीं है।

बीए पास होने के बाद छात्राओं को एमए की पढ़ाई करने के लिए दूसरे स्कूलों का मुंह देेखना पड़ रहा है। बीएससी की व्यवस्था भी न होेने के कारण विज्ञान वर्ग की शिक्षा छात्राओं को नहीं मिल पा रही है। थकहार कर छात्राएं वित्तविहीन महाविद्यालयों में दाखिले के लिए मजबूर हो रही हैं।

बीए में गृह विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी, समाज शास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान व शारीरिक शिक्षा विषय की उपलब्ध हैं। अन्य विषयों के लिए छात्राओं को दूसरे महाविद्यालयों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

फिरोज गांधी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके पांडेय का कहना है कि दाखिले के लिए छात्र-छात्राओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। चूंकि मेरिट कम है तो बडे़ स्कूलों में दाखिला तो नहीं मिलेगा, लेकिन किसी भी स्कूल में एडमिशन लेकर अच्छी पढ़ाई कर सकते हैं।

काफी बच्चों का इंजीनियरिंग में चयन हो जाएगा। कुछ बच्चे लखनऊ, दिल्ली, इलाहाबाद व अन्य शहरों में एडमिशन ले लेंगे। इसलिए किसी भी बच्चे को परेशान होने जरूरत नहीं है। किसी भी कॉलेज में उसे दाखिला मिल जाएगा।


पंचशील कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश सोनकर का कहना है कि कम मेरिट वाले बच्चों को वित्तविहीन महाविद्यालयों में दाखिले के लिए प्रयास करना चाहिए, क्योंकि राजकीय व एडेड महाविद्यालयों में हाई मेरिट वाले बच्चों के ही दाखिले होंगे। इसलिए इसके लिए कम मेरिट वाले बच्चे परेशान न हों।
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